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 शब्दों व चित्रों की मणि में गुंथी रामनगर की राम लीला

दो साल के अथक प्रयास के बाद तैयार हुई लीला की डाक्यूमेंट्री, गागर में सागर भरने का प्रयास है IIT BHU का. 

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Ajay Chaturvedi

Sep 15, 2016

world famous Ramlila of Ramnagar

world famous Ramlila of Ramnagar

वाराणसी.
बीएचयू आईआईटी के छात्रों व शिक्षकों ने मिल कर काशी के इतिहास को समेटने का किया है प्रयास। शब्दों और चित्रों की माला में पिरोया है ऐतिहासिक राम नगर की रामलीला को। साथ ही तैयार की है 30 मिनट की डाक्यूमेंट्री। चाहे पुस्तक हो या डाक्यूमेंट्री. लीला का सजीव चित्रण। एक बारगी लगेगा कि हम हूबहू लीला मैदान में हैं। इसे जीवंत करने में लग गए दो साल। एक प्रोजेक्ट के तैयार किया गया है। सब कुछ। इसमें है लीला में भाग लेने वाले कलाकारों से बातचीत। उनके अनुभवों को साझा किया गया है तो दर्शनार्थियों के अनुभवों को भी दिया गया है आकार। लीला के एक-एक अंश के चित्रों की है अनुपम कड़ी। इसका लोकार्पण भी ऐसे मौके पर हुआ जब लीला बस शुरू होने वाली है।





अनंत चतुर्दशी से शुरू होती है रामनगर की रामलीला
अनंत काल से अनंत चतुर्दशी से ही शुरू होती है रामनगर की रामलीला। ये वो लीला है जिसमें 500 साल पुरानी जीवन शैली, संस्कृति व परिवेश की झलक मिलती है। रामनगर दुर्ग के द्वारपालों के उद्घोष के बाद किले से निकलने वाली शाही सवारी की झलक पाने को दर्शनार्थी सड़क के दोनों किनारों पर खड़े हो कर हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ करते हैं अपने राजा का अभिवादन। इस लीला दर्शन के लिए काशी ही नहीं अयोध्या व चित्रकूट के संत भी पहुंचते हैं जो पहुंच चुके हैं। बतादें कि 1776 में महाराज उदित नारायण सिंह द्वारा शुरू रामनगर की रामलीला मेहताबी रोशनी में होती है। मशाल की रोशनी में रामायणी, मानस की चौपाइयों व दोहों का सप्रसंग ढोल की थाप सस्वर गीतमय गायन करते हैं। मशाल जलाने के लिए दक्ष मशालची का इंतजाम हो गया है। पूर्व काशिराज के शस्त्रागर से भाला, तोप, तलवार निकाला जाएगा। तोप दगेगी। मान्यता है कि इस लीला में प्रभु दर्शन के भाव की अभिव्यक्ति के लिए पहुंचते हैं लीला प्रेमी। वैसे मंगलवार को आकाशवाणी के उद्घोष व समुद्र मंथन के साथ लीला का शुभारंभ हो चुका है। लेकिन यह दृश्य रामनगर नहीं धूपचंडी स्थित चित्रकूट कुंड में दर्शाया गया। अब तो रावण जन्म के साथ भगवान श्री राम का वामनअवतार में प्रकट होंगे। यह लीला महीने भर तक चलेगी। हालांकि इसका कोई एक निश्चित स्थल नहीं। हर प्रसंग के लिए अलग-अलग स्थल तय है। थोड़ी-थोड़ी देर के बाद लोग यहां से वहां जाते रहते हैं। इन सभी दृश्यों को पिरोया है बीएचयू आईआईटे के छात्रों ने।





रामनगर की रामलीला का पहला ऐतिहासिक दस्तावेज
डॉ. अवधेश दीक्षित, अरविन्द कुमार मिश्र एवं ईशान त्रिपाठी के संपादकत्व में प्रकाशित यह पुस्तक रामनगर के इतिहास, रामलीला का इतिहास, स्थल शोधन के साथ-साथ नेपथ्य एवं रंगमंचीय पक्ष को भी दुर्लभ आकर्षक चित्रों के साथ दर्शाया गया है। इस अमूल्य दस्तावेज के लोक में आ जाने से भक्तों, सुधीजनों के साथ-साथ शोधार्थियों को भी काफी मदद मिलेगी। पुस्तक तथा सीडी, डॉक्यूमेंट्री के रूप में उपलब्ध यह दुर्लभ दस्तावेज काशी की अक्षय सांस्कृतिक धरोंहर की सूचक है जिसे लगभग 2 वर्षों के अथक प्रयास के बाद प्रकाशित किया गया है। वर्षों से आ रहे भक्तों, साधुओं और नेमियों का क्रमवार व्यक्तिगत विवरण पुस्तक के विषयवस्तु के गहराई को इंगित करती है।




30 मिनट की आकर्षक डाक्यूमेंट्री भी

रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला की पूर्व संध्या पर आईआईटी-बीएचयू के एबीएलटी सभागार में च्प्रोजेक्ट वाराणसीज् के तहत विश्वप्रसिद्ध रामलीला : रामनगर पुस्तक एवं 30 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्म का विमोचन हुआ। विमोचन करते हुए आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने कहा कि- रामनगर की रामलीला के समग्र पक्षों को अपने में समेटी यह पुस्तक निश्चित रूप से प्रथम पूर्ण प्रयास है। विमोचन के अवसर पर निदेशक प्रो राजीव संगल, प्रो पीके मिश्र, डॉ नंदलाल सिंह, डॉ अवधेश दीक्षित, अरविन्द मिश्र, ईशान त्रिपाठी, डॉ विकास सिंह, राजीव झा, बलराम यादव, राहुल पटेल आदि उपस्थित रहे।