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कोरोना से उबरने के बाद की बीमारियों का पता लगाएंगे BHU के वैज्ञानिक, उपचार भी होगा, सैंपल कलेक्शन शुरू

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान और जंतु विज्ञान विभाग अब कोरोना महामारी से उबरने वाले लोगों की दिक्कतों को दूर करने के लिए आगे आया है। इसके तहत आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी और जंतु विज्ञान विभाग के दो सीनियर प्रोफेसर्स के नेतृत्व में शोध शुरू कर दिया गया है। कोरोना से उबर चुके लोगों को बीएचयू अस्पताल खुद फोन करके बुला रहा और उनकी पड़ताल कर रहा है। इस दौरान ऐसे लोगों के जीन्स का भी पता लगाया जाएगा। तो वैज्ञानिकों ने पत्रिका से जो बताया जानते हैं उसके बारे में विस्तार से...

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बीेएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में पोस्ट कोविड पेशेंट की बीमारियों का पता लगाने की कोशिश करते प्रो विजय नाथ मिश्र

बीेएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में पोस्ट कोविड पेशेंट की बीमारियों का पता लगाने की कोशिश करते प्रो विजय नाथ मिश्र

वाराणसी. पिछले दो साल में लाखों लोग कोरोना महामारी की चपेट में आए। इसमें से कई को असमय ही अपनी जान गंवानी पड़ी तो एक बड़ा तबका ऐसा है जो अपनी जीवन शक्ति के बल पर स्वस्थ हो कर लौटा। लेकिन इस कोरोना वायरस की चपेट में एक बार आने के बाद स्वस्थ होने पर भी इन लोगों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान और जंतु विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने नया शोध शुरू किया है। ये शोध पोस्ट कोरोना पेशेंट्स पर किया जा रहा है। इसे "पोस्ट कोविड न्यूरोलॉजिकल सिंड्रोम (पीसीएनएस)" नाम दिया गया है। इस शोध के बारे में पत्रिका ने वैज्ञानिकों से खास बातचीत की, प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश...

क्या है ये नया शोध

ये शोध क्या है और क्यों किया जा रहा है इस संबंध में आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष व विख्यात न्युरोलॉजिस्ट प्रो विजय नाथ मिश्र पत्रिका को बताया कि कोरोना महामारी से उबरने के बाद भी लोगों को तरह-तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें मिर्गी, लकवा, सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आना, हृदय रोग, बीपी बढ़ना या घटना, खून का भारी होना जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सर सुंदरलाल चिकित्सालय में भर्ती रहे कोरोना मरीजों को बुला कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही है। इसके लिए बीएचयू अस्पताल उन मरीजों को फोन करके अस्पताल बुला रहा है। यहीं उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के साथ ही रक्त नमूने भी एकत्र किए जा रहे हैं।

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कोरोना के बाद कई तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं लोग

प्रो मिश्र ने बताया कि कोरोना से उबरने के बाद लोग न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर से परेशान हैं। किसी को हृदय रोग संबंधी दिक्कत है तो किसी को चर्म रोग की शिकायत। लकवा, मिर्गी के मरीज भी मिल रहे हैं। सिर दर्द व कमजोरी भी महसूस कर रहे हैं। ऐसे में इस शोध ये पता लगाया जाएगा कि लोगों को और किन-किन तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और इससे उन्हें कैसे मुक्त कराया जाए।

1200 केस का डॉटा उपलब्ध है बीएचयू के पास

न्यूरोलॉजिस्ट प्रो मिश्र ने बताया कि अभी 1200 कस का डॉटा हमलोगों के पास मौजूद है। ये वो लोग हैं जिनका इलाज बीएचयू में हुआ। इसके अलावा मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से बाकी लोगों को भी आमंत्रित किया जा रहा है ताकि उनकी दिक्कतों की जानकारी हासिल कर उसे दूर किया जा सके। उन्होंने बताया कि ये परीक्षण बिल्कुल मुफ्त है। कोई भी मरीज हर शनिवार को न्यूरोलॉजी प्रयोगशाला में 12-1 बजे के बीच आकर अपनी पीड़ा बता सकता है, परीक्षण करा सकता है।

पोस्ट कोविड मरीजों के जीन का अध्ययन करेगा जंतु विज्ञान विभाग

जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि इस शोध के तहत गंगा घाटी क्षेत्र के पोस्ट कोविड पेशेंट्स के जीन की जानकारी हासिल की जाएगी। ये जानने की कोशिश होगी कि कोरोना महामारी से उबरने के बाद लोगों को न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर की दिक्कत क्यों आ रही है। क्या है जीन फैक्टर। बताया कि ऐेसे मरीजों की दिक्कतों में जीन फैक्टर ज्यादा महत्वपूर्ण है। लिहाजा उनके नमूने एकत्र किए जा रहे हैं ताकि ये पता चल सके कि कौन-कौन से जीन इस न्यूरोल़जिकल डिसआर्डर के लिए जिम्मेदार हैं और उनसे कैसे ठीक किया जा सकता है।

बनाएंगे डायगोनिस्टिक किट

प्रो चौबे ने बताया कि शोध के तहत करीब 10-15 दिन से नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। ये प्रोसेस थोड़ा लंबा है। बताया कि इस शोध के दौरान पोस्ट कोविड पेशेंट्स को होने वाली दिक्कतों का पता लगाने के बाद हम लोग एक डायगोनिस्टक किट भी तैयार करेंगे जिससे मरीजों को भविष्य में कोई दिक्कत न हो।

सबसे बड़ी दिक्कत समान लक्षण मिलने को लेकर

प्रो चौबे ने बताया कि सबसे मुश्किल काम गंगा घाटी क्षेत्र के लोगों की दिक्कतों का पता लगाना है क्योंकि इस क्षेत्र के लोगों की आदते, स्वास्थ्यगत दिक्कतें अक्सर समान होती हैं। इसमें सजातीय विवाह भी बड़ा कारण है। सजातीय विवाह के चलते बीमारियों के लक्षण समान होने से ये पता लगाना भी थोड़ा मुश्किल हो जाता है कि पोस्ट कोविड पेशेंट्स में आ रही दिक्कतों के लिए कौन से जीन जिम्मेदार हैं। हो सकता है कि शोध पूरा होने और पूरी तरह से लोगों को फिट करने में चार से पांच साल भी लग सकते हैं।