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बनारस में बनेगा देश का पहला फ्रेट विलेज, 100 एकड़ भूमि अधिग्रहण की तैयारी

-3000 करोड़ होगी लागत-2020 में काम पूरा करने का लक्ष्य-विश्‍व बैंक की सहमति के बाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय और नीति आयोग की मिली मंजूरी

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freight village

freight village सांकेतिक फोटो

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक और ड्रीम प्रोजेक्ट को केंद्रीय वित्त मंत्रालय और नीति आयोग की मंजूरी मिल गई है। विश्व बैंक इस परियोजना के लिए पहले स्वीकृति दे चुका है। यह और कुछ नहीं फ्रेट विलेज है। बताया जा रहा है कि देश का पहला फ्रेट विलेज पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में बनेगा। इसके लिए 100 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जाएगी।

मोदी सरकार-1 के ड्रीम प्रॉजेक्‍ट गंगा जल परिवहन के तहत प्रस्‍तावित फ्रेट विलेज का सपना जल्द पूरा होगा। फ्रेट विलेज प्रोजेक्‍ट को अमली जामा पहनाने के लिए इनलैंड वॉटर वेज अथॉरिटी (आईडब्‍ल्‍यूएआई) ने कवायद शुरू कर दी है। योजना के मुताबिक रामनगर में बने मल्‍टी मॉडल टर्मिनल (वाराणसी टर्मिनल) को केंद्र में रखकर यह फ्रेट विलेज बनेगा। यह वॉटर हाइवे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और रोड हाइवे के मेन जंक्‍शन की तरह काम करेगा। इसके लिए डिप्टी डायरेक्‍टर अरविंद कुमार ने 100 एकड़ जमीन उपलब्‍ध कराने की खातिर चंदौली और मिर्जापुर के डीएम से मुलाकात भी कर ली है। फ्रेट विलेज 100 एकड़ भूमि में तैयार होगा इसमें से 60 एकड़ जमीन वाराणसी और चंदौली उपलब्ध कराएगा जबकि शेष 40 एकड़ मिर्जापुर जिला प्रशासन। वाराणसी और चंदौली जिला प्रशासन ने अपने हिस्से की जमीन जल्‍द उपलब्‍ध कराने के लिए आश्‍वस्‍त किया है।

आईडब्‍लयूएआई के प्‍लान के मुताबिक, वाराणसी टर्मिनल के फ्रेट विलेज के रूप विस्‍तार का काम वर्ष 2020 पूरा करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है। इसके लिए स्‍पेशल पर्पज व्‍हीकल (एसपीवी) बनाया जाएगा, जो एक कंपनी होगी। इसमें आईडब्‍ल्‍यूएआई के अलावा डेडीकेटेड फ्रेड कॉरिडोर कॉरपोरेशन और यूपी सरकार की हिस्‍सेदारी होगी। यही एसपीवी पूरे प्रॉजेक्‍ट का काम देखेगा। एसपीवी के संगठनात्‍मक ढांचे को पोत मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।

प्रस्‍तावित फ्रेट विलेज में वेयर हाउस, कोल्‍ड स्‍टोरेज, पैकेजिंग-रैपिंग, कारगो स्‍टोरेज, रोड ट्रांसपोर्ट सर्विस के अलावा शहरी जीवन की बुनियादी सुविधाएं उपलब्‍ध होंगी। इसके बनने से बड़े कारोबारियों के अलावा वाराणसी और पूर्वांचल के कारोबारी भी अपना माल यहां सुरक्षित स्‍टोर कर देश के दूसरे हिस्‍से में भेज सकेंगे या फिर मंगा सकेंगे। फ्रेट विलेज के आकार लेने पर गंगा पार एक नया शहर बसेगा तो हजारों लोगों को रोजगार उपलब्‍ध होगा।

आईडब्‍ल्‍यूएआई के अधिकारियों के मुताबिक, वाराणसी-हल्दिया वॉटर हाइवे में 365 दिन और 24 घंटे बड़े मालवाहक जहाज चलाने के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण गंगा चैनल बनाने का काम जल्द शुरू होने वाला है। कैपिटल ड्रेजिंग के जरिए 45 मीटर चौड़े चैनल में हर मौसम में 2.50 से तीन मीटर तक एश्‍योर्ड डेफ्थ मिलेगी। चैनल के लिए तीन सेगमेंट बनाए गए हैं। पहला हल्दिया से फरक्‍का, दूसरा फरक्‍का से बिहार और तीसरा बिहार से वाराणसी तक का है।