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विंध्यांचल एसटीपी से बहकर गंगा में आया था हरा शैवाल, पानी हरा होने के कारणों का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने किया खुलासा

Investigation Committee Important Disclosure On Green Water Of Ganga. गंगा में हरा शैवाल दिखने से पानी का रंग बदलने लगा है। इसके कारणों का पता लगाने पर अहम खुलासा हुआ है। गंगा में हरे शैवाल मामले की जांच कर रही समिति ने खुलासा किया है कि विंध्याचल एसटीपी से बहकर ये शैवाल आए हैं।
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वाराणसी

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Karishma Lalwani

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Updated: 11 Jun 2021, 1:47 PM IST

Investigation Committee Important Disclosure On Green Water Of Ganga

Investigation Committee Important Disclosure On Green Water Of Ganga

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी.Investigation Committee Important Disclosure On Green Water Of Ganga. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा की खराब स्थिति ने शासन और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले दिनों गंगा में एल्गी ब्लूम (Algae Bloom) यानी कि हरे शैवाल दिखने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया। शैवाल के कारण गंगा के इको सिस्टम पर संकट मंडराने लगा है। गंगा में हरा शैवाल दिखने से पानी का रंग बदलने लगा है। इसके कारणों का पता लगाने पर अहम खुलासा हुआ है। गंगा में हरे शैवाल मामले की जांच कर रही समिति ने खुलासा किया है कि विंध्याचल एसटीपी से बहकर ये शैवाल आए हैं। पुरानी तकनीक से बने एसटीपी के कारण ये घटना हुई है। समिति ने रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा (Varanasi DM Kaushal Raj Sharma) को सौंपा है।

हरे शैवाल बनने का कारण

दरअसल, 15-20 दिन पहले गंगा के पानी का रंग बदला था, लेकिन उसके बाद तीन दिन तक लगातार हुई बारिश से ये प्रभाव कुछ कम हुआ। बाद में गंगा में शैवाल दिखने पर लोगों ने विकास के प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े कर दिए। इसके बाद ही यह मामला तूल पकड़ गया। गंगा के पानी रंग बदलकर हरा होने की घटना सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया। मामले में डीएम कौशल राज शर्मा ने पांच सदस्यीय टीम बनाते हुए जांच के आदेश दिए। शुक्रवार को टीम ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपी जिसमें बताया गया कि विंध्याचल में पुरानी तकनीक से बने एसटीपी से यह शैवाल बहकर वाराणसी आ रहे हैं। पिछले दिनों हुई बरसात में इनकी संख्या काफी ज्यादा थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्राथमिक जांच में भी यह बात सामने आई है कि गंगाजल में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा निर्धारित मानकों से ज्यादा हो गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।

हरे शैवाल से होती है पानी में ऑक्सीजन की कमी

बीएचयू में इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वैज्ञानिक डॉ कृपाराम के अनुसार जल में युट्रोफिकेशन प्रक्रिया होने से हरे शैवाल बनते हैं। यह तब होता है जब पानी में न्यूट्रिएंट की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गैर जरूरी स्वस्थ जीवों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होती है। इस स्थिति में शैवालों को प्रकाश संश्लेषण करने का सबसे उपयुक्त वातावरण मिलता है। पानी में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है जिससे बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) प्रभावित होता है।

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