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पूर्वांचल में हीट स्ट्रोक अलर्ट: लू से बचने के लिए जानें आयुर्वेद विशेषज्ञ की क्या है खास सलाह

Heat wave in UP news: पूर्वांचल में हीट स्ट्रोक को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है। ऐसे मौसम में ख्याल ना रखने पर गंभीर परिणाम भुगतने ने हो सकते हैं। ऐसे में लू लगने के बाद लोगों को प्राथमिक उपचार पर किस तरह शरीर को स्वस्थ रखना चाहिए, इसको लेकर वाराणसी के आयुर्वेद अस्पताल के डॉक्टर ने सुझाव बताएं हैं।

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Heat wave alert Varanasi news

AI image (chatgpt)

वाराणसी: देश के विभिन्न राज्यों के साथ उत्तर प्रदेश में भी प्रचंड गर्मी का आलम है। ऐसे में अत्यधिक गर्म हवा के झोंकों से लू लगना, पानी की कमी होना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लोगों को ऐसे मौसम में अत्यधिक सावधानियां बरतने की अपील की गई है। इसके साथ ही पूर्वांचल में हीट स्ट्रोक को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है। ऐसे मौसम में ख्याल ना रखने पर गंभीर परिणाम भुगतने ने हो सकते हैं। ऐसे में लू लगने के बाद लोगों को प्राथमिक उपचार पर किस तरह शरीर को स्वस्थ रखना चाहिए, इसको लेकर वाराणसी के आयुर्वेद अस्पताल के डॉक्टर ने सुझाव बताएं हैं।

राजकीय अस्पताल के डॉक्टर ने क्या दिया सुझाव

चौकाघाट स्थित राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के कायचिकित्सा एवं पंचकर्म विभाग के डॉक्टर अजय कुमार ने बताया है कि गर्मी के दिनों में उच्च तापमान लगने का दर सबसे अधिक होता है। आसान सी भाषा में इसे ही हीट स्ट्रोक (heat stroke) और सन स्ट्रोक (sun stroke) कहा जाता है। उन्होंने बताया कि ग्रीष्म ऋतु में शरीर से बार-बार अत्यधिक मात्रा में पसीना निकलने के कारण शरीर में पानी और लवण की कमी हो जाती है।

डॉ अजय ने बताया कि इसके कारण शरीर का तापमान अचानक से तेजी से बढ़ने लगता है और शरीर के जलियांश सूखने लगते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मौसम में और ऐसे हालात में शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है, जिसके कारण लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि यह एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, जिसमें चक्कर आना, उल्टी आना, रक्तचाप कम होना (low BP), बुखार और अन्य समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं और यदि समय रहते मरीज को इलाज ना मिले तो उसकी मौत होने की संभावना भी बनी रहती है।

डॉक्टर ने बताए क्या है लू लगने के लक्षण ?

  1. अत्‍यधिक प्यास लगना एवं मुंह सूखना।
  2. शरीर, आंख, हाथ-पैर के तलवों में जलन और कमजोरी।
  3. शरीर का तापमान बढ़ना या तेज बुखार होना।
  4. नाड़ी की गति और सांस तेज चलना।
  5. बदन में दर्द एवं कमजोरी महसूस होना।
  6. बेहोशी जैसी स्थिति का होना।
  7. काफी पसीना आना या एकदम पसीना आना बंद हो जाना।

लू लगने से कैसे बचें ?

  1. तेज गर्म हवाओं में नंगे बदन और नंगे पैर बाहर जाने से बचें। धूप से बचने के लिए सिर पर टोपी या  छाता लगाकर निकलें।
  2. धूप में निकलने से पहलें पूरे शरीर को किसी कपड़े से कवर करके और सूती कपड़े पहनकर ही निकले, काले गहरे रंग के रेशमी या सिंथेटिक के कपड़े नही पहने।
  3. धूप में निकलते समय आंखों पर काले चश्मे  का प्रयोग करें।
  4. घर से पानी या शरबत जैसे आम पन्ना, शिकंजी, खस का शर्बत पीकर निकलें एवं साथ में पानी लेकर चलें।
  5. भोजन करके ही बाहर निकलें, कभी भी खाली पेट बाहर न निकलें।
  6. एकदम गर्मी से आकर ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए।
  7. धूप से आकर ठंडे कमरे में जाना और ठंडे कमरे से धूप में तुरंत नहीं जाना चाहिए।
  8. कार या अन्य बंद वाहन  दोपहर में अंदर से ज्यादा गर्म हो गयी हो तो पहले शीशे खोलकर गाड़ी से गर्म हवा बाहर निकाल दें फिर एसी चला दें। अंदर का तापमान सामान्य होने पर ही गाड़ी में बैठें।
  9. दो पहिया वाहन तेज़ धूप में ना चलाएं।

आयुर्वेद में क्या है लू से बचने के उपाय ?

  1. लू लगने पर कच्चे आम का पन्ना पीना काफी फायदेमंद होता है। कच्चे आम को पकाकर इसमें जीरा, धनिया, चीनी , नमक, कालीमिर्च डालकर पन्ना बनाकर पिएं।
  2. कच्चे नारियल का पानी, नीबू की शिकंजी आदि प्यास लगने पर बार-बार पिएं।
  3. प्रतिदिन खस, ब्राह्मी, चंदन, फालसा, गुलाब, केवड़ा, का शरबत पीने से लू से बचा जा सकता है।
  4. छाछ या लस्सी का पर्याप्त सेवन करें। इसमें काला नमक और जीरा पाउडर मिलाकर गर्मियों में लू से बचने के लिए नियमित सेवन करें।
  5. गन्ने का रस सेहत के लिए गुणकारी औषधि है। इसमें मौजूद मिनरल्स शरीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करते हैं और लू से बचाते हैं।
  6. चने का सत्तू , चीनी या नमक मिलाकर गर्मी में पीने से शीतलता मिलती है।
  7. ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, संतरा, फालसा, शहतूत, अनार के  रस का नियमित सेवन करें।
  8. पुदीने, सौंफ, इलायची, धनिया, काला नमक, जीरा आदि अपने खाने में शामिल करें।
  9. हल्का, सुपाच्य आहार जैसे चावल का मांड, पतली खिचड़ी, मसूर की दाल का सूप पिएं।
  10. चंदन के पाउडर को पानी में घोलकर पेस्ट बना पूरे बदन में लगाएं। इससे काफी शीतलता मिलती है और शरीर का तापमान भी कम होता है।
  11. अत्यधिक गर्मी के मौसम में मांस, मछली, अण्डा, गर्म मसाला, चाय और शराब आदि गर्म चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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