
फाइल फोटो
वाराणसी: नगर निगम में शहर को हाईटेक बनाने की कवायद तेज कर दी है। यहां एक अत्याधुनिक एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का निर्माण किया गया है, जिसमें कुत्तों का नि:शुल्क बंध्याकरण और रेबीज बीमारी को लेकर टीकाकरण भी किया जा रहा है। इसके साथ ही वाराणसी में उत्तर प्रदेश का पहला पेपरलेस एनिमल ट्रैकिंग केंद्र भी बन चुका है। यहां शहर के अलग-अलग क्षेत्र से पकड़े गए कुत्तों के गले में हाईटेक चिप लगाई जा रही है, जिससे उनके मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी सिर्फ एक क्लिक पर लोगों को मिल जाएगी।
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया है कि शहर में बनाए गए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में बीमार और बेसहारा कुत्तों को लाकर उनका इलाज किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें एंटी रेबीज का टीका भी दिया जा रहा है और बंध्याकरण भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन कुत्तों को इलाज के बाद उनके गले में एक चिप लगाई जा रही है जिससे इन कुत्तों की मेडिकल हिस्ट्री को आसानी से लोग जान पाएंगे। उन्होंने बताया कि इसमें सिर्फ आवारा और बेसहारा पशुओं को ही नहीं बल्कि पेट डॉग्स को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य बीमार और हिंसक कुत्तों को लाकर उनका ट्रीटमेंट करना है। उन्होंने बताया कि इन कुत्तों को शिकायत मिलने के बाद पकड़ कर केंद्र में लाया जाता है और उनका इलाज करके वापस उन्हें इस स्थान पर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि संबंधित कुत्तों का इलाज किए जाने के बाद इन्हें 4 से 5 दिन सेंटर में रखा जाता है और इन पर कड़ी निगरानी की जाती है, ताकि उनके स्वास्थ्य में हो रहे सुधार पर नजर रखी जा सके।
संदीप ने बताया कि एढ़े गांव में अत्याधुनिक एनिमल बर्थ कंट्रोल का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही नगर निगम ने मेदांता ग्रुप के साथ 15 वर्ष का अनुबंध किया है और इसका संचालन पूरी तरह से नि:शुल्क होगा और संस्था ही इसे चलाएगी। उन्होंने बताया कि लोगों को काटने वाले कुत्तों को पकड़ कर इन सेंटर्स पर ले जाया जाएगा और वहां पर उनके बंध्याकरण और एंटी रेबीज टीकाकरण की व्यवस्था की जाएगी। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि कुत्तों को इलाज के बाद उनके गले में एक चिप डाल दिया जाएगा और उसे चिप में एक बारकोड होगा, जिसे फोन के माध्यम से स्कैन करते ही कुत्ते की फोटो और उसके मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी खुलकर सामने आ जाएगी।
उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था केवल आवारा कुत्तों के लिए ही नहीं बल्कि पालतू कुत्तों के लिए भी है। यदि कुत्तों के मालिक उनके कुत्ते से संबंधित मेडिकल हिस्ट्री को डिजिटल करना चाहते हैं तो वह भी इसका लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि शहर में घूम रहे कुत्ते बीमार या लोगों को काटते हैं तो उनकी जानकारी टोल फ्री नंबर 1533 पर दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि सूचना मिलने के बाद नगर निगम की एक टीम तत्काल ही उस स्थान पर पहुंचेगी और उन कुत्तों को ट्रेस करके पकड़ कर केंद्र में लाएगी और उनके इलाज की व्यवस्था करेगी। उन्होंने बताया कि अब तक 300 कुत्तों का बंध्याकरण किया गया है और करीब 50 कुत्तों के गले में इस चिप को इंस्टॉल किया जा चुका है।
संदीप ने बताया कि यह केंद्र पूरी तरीके से डिजिटल है और इसमें किसी भी प्रकार की कागजी कार्रवाई नहीं की जाती। यह प्रदेश का पहला अत्याधुनिक एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर है। जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस केंद्र में लाये गए कुत्तों के ब्लड सैंपल लिए जाते हैं, जिनमें उनके सीबीसी, केएफटी और एलएफटी इत्यादि की जांच होती है। उन्होंने बताया है कि नगर निगम ने इन कुत्तों के इलाज के लिए डॉक्टर के साथ-साथ एंबुलेंस की व्यवस्था की है।
Updated on:
24 May 2026, 10:13 AM IST
Published on:
24 May 2026, 10:13 AM IST
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