
Agricultural Scientific Selection Board, New Delhi, Chairman and Vice Chairman of NASA, Dr. AK Srivastava
वाराणसी. आयोडीन की सुलभता नमक से है लेकिन भोजन में डालकर पकाने से मात्र तीन मिनट में आयोडीन की उपलब्धता नमक से समाप्त हो जाती है। ऐसे में आवश्यकता है कि इसे कच्चे सलाद के साथ लिया जाए। इसी प्रकार अब आयरन की कमी की पूर्ती दूध में डालकर की जाएगी। यह कहना है कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड, नई दिल्ली के चेयरमैन एवं नासा के वायस चेयरमैन डॉ. ए. के श्रीवास्तव का। वह मंगलवार को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में विशेष व्याख्यान दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि कहा कि वर्तमान समय में सब्जियों का उत्पादन 181 मिलियन टन हो रहा है जिसमें, बड़ी संख्या में लोग कार्यरत हैं। उन्होने कहा कि गांवो में रहने वाले को जिंक एवं आयरन की उपलब्धता शहरी क्षेत्र से ज्यादा है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य विविधता की उपलब्धता है। कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड, नई दिल्ली के चेयरमैन ने कहा कि भारत में अधिक उत्पादन के साथ जरूरत संरक्षण और प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन को बढावा देने की है, ताकि हर समय उपलब्धता सुनिश्चित हो और किसानो को उपज का वाजिब मूल्य प्राप्त हो सके। कहा कि देश में पाये जाने वाले पशुओं, पक्षियों, फलों, सब्जियों, फूलों, खाद्यान फसलों एवं उनके उत्पाद की विश्व बाजार में मांग बढ़ी है। डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि प्रत्येक किसान के हाथ में संबंधित तकनीकी का होना आवश्यक है जैसे- पैकिंग, परिवहन, भंडारण आदि।
इस मौके पर संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. गौतम कल्लू ने कहा कि तकनीकी आधारित आंकड़े से ही शोध की नई नीतिया बनाई जा सकती हैं। नासा के निदेशक डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि नास चैप्टर के अंतर्गत, ब्रेन स्ट्रामिंग कान्फ्रेंस, पालसी कार्य आदि का आयोजन लगातार चलता रहेगा। विशेष व्याख्यान का संचालन डॉ. नीरज सिंह ने किया जबकि डॉ. जगदीश सिंह ने आभार जताया।
Published on:
29 Jan 2019 07:26 pm
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