
Lord Kaal Bhairav
वाराणसी. शिव की नगरी काशी में काल भैरव के दर्शन मात्र से ही जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। धार्मिक मान्यता है कि काशी में बिना भैरव की अनुमति से यमराज किसी को मौत नहीं दे सकते हैं। 30 नवम्बर को भैरावाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव का अद्भृत दर्शन कर जीवन को सफल बना सकते हैं।
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शिव की नगरी काशी में काशी के कोतवाली बाबा कालभैरव का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के बाद काल भैरव का दर्शन नहीं किया तो पूरा पुण्य नहीं मिलता है इसलिए जो भी काशी में आता है वह महादेव के साथ उनके रूद्र रूप काल भैरव का दर्शन अवश्य करता है। काशी में बिना भैरव की अनुमति के निवास करना भी संभव नहीं है इसलिए सप्ताह के प्रत्येक रविवार व मंगलवार को काल भैरव मंदिर में दर्शनार्थियों की लंबी लाइन लगती है।
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काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव मंदिर में खुद शिव के रौद्र रुप महाकाल स्वंय आकर विराजमान हुए है। काल भैरव मंदिर में साल का सबसे बड़ा पर्व भैरवाष्टमी ही होता है। मार्गशीष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भैरवाष्टमी मनायी जाती है। 30 नवम्बर को भैरवाष्टमी के लिए मंदिर में तैयारी जोरो पर चल रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बाबा काल भैरव का धरती पर अवतरण होता है। काल भैरव मंदिर में रात 12 बजे से 2 बजे तक बाबा काल भैरव का प्राकट्य रुप का दर्शन मिलता है।
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काल भैरव ने हाथ के नाखून से काटा था ब्रह्मा का सिर
धार्मिक मान्यातओं के अनुसार ब्रह्मा के पांच मुख होते थे। एक बार ब्रह्मा ने अपने पांचवे मुख से भगवान शिव के बारे गलत बात कह दी थी जिससे भगवान शिव बहुत नाराज हुए थे और उन्होंने काल भैरव को उत्पन्न किया था। भगवान शिव ने काल भैरव से कहा था कि तुम ब्रह्मा पर शासन करो। इसके बाद काल भैरव ने अपने सबसे छोटी उंगली के नाखून से ब्रह्मा के पांचवे मुख का काट दिया था इसके बाद काल भैरव पर ब्रह्म हत्या का पाप चढ़ गया था। काल भैरव के हाथ से ब्रह्मा का मुख चिपक गया था। शिव के रौद्र रुप होने के चलते बाबा काल भैरव जहां पर जाते थे उनकी अग्रि से सब कुछ भस्म हो जाता था। तीनों लोक में हाहाकार मच गया था। इसके बाद बाबा काल भैरव ने भगवान शिव से अपनी समस्या बतायी। इस पर भगवान शिव ने कहा कि तुम मेरी नगरी काशी जाओ, वहां पर सारी समस्या का समाधान हो जायेगा। काशी के लोगों को पापों से मुक्त करके मोक्ष की राह प्रशस्त करना। इसके बाद बाबा काल भैरव ईश्वरगंगी के पास लाट भैरव कुंड पहुंचे। यहां पर बाबा के हाथ से ब्रह्मा को सिर गिर गया। इसके बाद बाबा काल भैरव ने अपने हाथों से यहां पर कुंड का निर्माण किया। नहाने के बाद भैरवनाथ पहुंचे। यहां पर बाबा काल भैरव को सुई बराबर ही जमीन मिल पायी। इसके चलते बाबा ने एक पैर का अंगुठा यहां पर रखा और दूसरा पैर श्वान पर रख दिया। भैरवनाथ में विराजमान होने के बाद काल भैरव का रुप चन्द्रमा जैसा शीतल हो गया। इसके बाद बाबा अपने भक्तों को दर्शन देकर उन्हें पापों से मुक्ति दिलाते हैं।
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काशी में है भैरव के विभिन्न मंदिर
काशी में काल भैरव व बटुक भैरव के अतिरिक्त आस भैरव, दंडपाणी भैरव, आदि भैरव, भूत भैरव, लाट भैरव, संहार भैरव, क्षत्रपाल भैरव का मंदिर है। जहां पर भैरवाष्टमी के दिन उत्सव का माहौल रहता है। काल भैरव का दर्शन रविवार व मंगलवार को करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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भैरव की पूजा में इन बातों का रखे ध्यान
काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव प्रसन्न हो गये तो आपके जीवन में आने वाले सभी कष्ट खत्म हो जायेंगे। गृहस्थ व्यक्ति को तामसी विधि से भैरव की पूजा करने से बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त किसी के विनाश के लिए भी भैरव की पूजा नहीं करनी चाहिए।
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काल भैरव की पूजा से लाभ
काल भैरव की पूजा भैरवाष्टमी के दिन रात में 12 बजे से होती है। इस दिन उपवास रख कर रात भर जागते हुए भैरवाष्टक का पाठ करने से बहुत लाभ मिलता है। शनि व राहु ग्रह ठीक नहीं है तो भैरवाष्टमी की रात की गयी पूजा बहुत फलदायी साबित होती है। काल भैरव की पूजा में एक बात ध्यान देना चाहिए कि किसी जानकार से पूछने के बाद ही नियमो के अनुसार पूजा करनी चाहिए। भैरव नाराज हो गये तो नुकसान उठाना भी पड़ सकता है।
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क्या कहते हैं काल भैरव के सेवक
काल भैरव मंदिर में बाबा के सेवक पंडित राजेश मिश्र ने बताया कि भैरव मंदिर के लिए भैरवाष्टमी सबसे महत्वपूर्ण पर्व होता है। इस बार 30 नवम्बर को भैरवाष्टमी पड़ रही है। इस दिन रात में 12बजे से बाबा का विशेष दर्शन मिलता है और रात में तीन बजे सवा लाख बत्ती से बाबा की शयन आरती होती है। भैरवाष्टमी के दिन बाबा के दर्शन करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है।
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काशी में काल भैरव से यमराज को भी लेनी पड़ती है अनुमति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में मृत्यु देने से पहले यमराज को काल भैरव से अनुमति लेनी पड़ती है। भैरव की अनुमति के बिना काशी में यमराज भी कुछ नहीं कर सकते हैं। जीवन में ग्रहों की स्थिति खराब हो या फिर मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती हो। ऐसे में काल भैरव का दर्शन करने से सारी बाधा दूर हो जाती है।
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Published on:
27 Nov 2018 12:58 pm
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