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पति ही नहीं भाई के लिए भी रखा जाता है करवाचौथ का व्रत

चांद को पत्नियां, तो तारों को देख बहने खोलती हैं अपना करवा चौथ व्रत

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Sarweshwari Mishra

Oct 18, 2016

Karwa Chauth

Karwa Chauth


वाराणसी. हिंदू धर्म में अनेक ऐसे त्योहार आते हैं जो हमें रिश्तों की गहराइयों तथा उसके अर्थ से परिचित करवाते हैं। करवा चौथ भी उन्हीं त्योहारों में से एक है। यह पर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 19 अक्टूबर को है।
यह व्रत सुहाग और सौभाग्य का माना जाता है। इसलिए सुहागन स्त्रियां श्रद्घा और विश्वास के साथ यह व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इससे पति की उम्र लंबी होती है, दांपत्य जीवन में वियोग का कष्ट नहीं भोगना पड़ता है। लेकिन परंपरा से एक कदम आगे बढ़कर अब प्रेमिकाएं भी अपने प्रेमी को पति रूप में पाने के लिए यह व्रत रखने लगी हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि भाई के लिए रखा गया करवा चौथ व्रत तारों को देखकर तोड़ा जाता है।

भाई की लम्बी उम्र के लिए बहनें भी रहती हैं करवाचौथ
यह व्रत अधिकतर सुहागिनों को करते देखा गया है। लेकिन इस त्योहार की मान्यता है कि आप जिसकी मंगल कामना और लम्बी उम्र चाहती हैं तो आप इस व्रत को कर सकती हैं। यहां तक ही बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और उनकी सलामती के लिए भी यह व्रत रख सकती हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है। इससे करवामाता का आशीर्वाद ही मिलेगा, कोई नुकसान नहीं होगा।
भाई के लिए रखा जाने वाला करवाचौथ का व्रत चांद को देखकर नहीं बल्कि तारों को देखकर खोला जाता है। जो कुंवारी कन्याएं अपने भाई के लिए करवाचौथ का व्रत रखती हैं तो उन्हें विवाहित स्त्रियों की तरह सजने संवरने और सोलह श्रंगार करने की जरूरत नहीं है। इन्हें सिर्फ भाई की मंगल कामना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए।

शुभ मुहुर्त
18 अक्टूबर को रात 10 बजकर 48 मिनट पर चतुर्थी तिथि का प्रारंभ हो रहा है। यह 19 अक्टूबर को शाम सात बजकर 32 मिनट तक रहेगी। वहीं 19 अक्टूबर, बुधवार को चंद्रमा का उदय रात आठ बजकर 45 मिनट पर होगा।

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