
काशी के अस्सी की जगन्नाथ गली का हाल
वाराणसी. वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव गुजरात मॉडल पर हुआ था, लेकिन अब 2019 का चुनाव वाराणसी के विकास मॉडल पर हो सकता है। ऐसी चर्चा है। वाराणसी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। यहां के विकास के लिए केंद्र सरकार, राज्य सररकार के साथ विश्व बैंक और कई विकसित राष्ट्रों से अकूत धनराशि भी मिली। खुद प्रधानमंत्री खरबों रुपेय दे चुके हैं। ऐसा कहा जाता है। ये वही काशी है जहां से राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान का आगाज हुआ था। प्रधानमंत्री ने खुद काशी के अस्सी घाट पर फावड़ा चलाया था तो घाट से सटी जगन्नाथ गली में झाड़ू भी लगाया था। लेकिन वह गली आज बदतर हालत में है। बच्चे कैसे स्कूल जा रहे हैं ये वही जानते हैं। बुजुर्ग कैसे घरों से निकलते हैं उनका दिल ही जानता है। महिलाएं कैसे निकलती हैं वह उनसे ही पता चलेगा। आलम यह कि चार साल में इस एक गली की सीवर लाइन तक दुरुस्त नहीं हो सकी। ये भी है काशी का विकास।
प्रधानमंत्री बनने के बद जब दूसरी बार नरेंद्र मोदी काशी आए तो इसी जगन्नाथ गली में झाड़ू लगाकर पूरे देश में सफाई अभियान की शुरुआत की थी। वार्ड नंबर 54 में आती है यह गली, जिसके पार्षद हैं गोविंद शर्मा, जिन्हें अभी हाल ही में सफाई अभियान का अवॉर्ड मिला है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागृति फाउंडेशन के महासचिव रामयश मिश्र बताते हैं कि 04 साल से ऊपर हो गया इस गली में चल रहा सीवर का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। हर दिन इस गली की खोदाई होती रहत है मानों मोहन जोदड़ो व हड़पप्पा की खुदाई हो रही है। जिला प्रशासन हो या नगर निगम किसी अधिकारी को इस गलि की सुधि लेने की फुर्सत नहीं। सुधि तो उन्हें भी नहीं जिन्हों प्रधानमंत्री के साथ झाड़ू लेकर सैकड़ों फोटो खिंचवाई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया। वो सत्ताधारी दल के नेता भी इस गली में नजर नहीं आते।
हाल यह है कि गली की सीवर लाइन जाम है जिससे पूरी गली सीवर के गंदे पानी से बजबजा रही है। पूरी गली का पत्थर उखड़ गया है जिसके कारण वहां बड़े बड़े गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों में सीवर का पानी भरा रहता है जिसके कारण उधर से गुजरने वाले राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे।
प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद इस गली के प्रति जिला प्रशासन का उदासीन होना गहरे सवाल खड़ा करता है। हमारे माननीय पार्षद गोविंद शर्मा जी जो बात-बात पर सफाई अभियान और क्षेत्र के विकास का ढिंढोरा पीटते हैं वह भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। अब किससे कहा जाए, कहां की जाए शिकायत। आखिर कब तक यह गली बनेगी। अब तो अगला चुनाव भी सिर पर है। कुछ ही दिनों की बात है जब आचार संहिता लग जाएगी। तो क्या अब अगली पंचवर्षीय योजना का इंतजार किया जाए।
Published on:
02 Jan 2019 01:22 pm
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