
रामनगर का किला
डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. ताजमहल को लेकर उठा विवाद भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद शांत हो गया हो पर राज्य सूचना एवं जनसपर्क विभाग द्वारा तैयार राज्य के कैलेंडर को लेकर काशी में सुगबुगाहट तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कैलेंडर में महज दो स्थान सारनाथ का धम्मेक स्तूप और काशी विश्वनाथ मंदिर को जगह दी गई है। लेकिन काशी में अनेक ऐसे स्थान हैं जिसे विश्व धरोहर में शामिल किया जाना चाहिए और कई तो पहले से शामिल हैं। उनका कहना है कि इस कैलेंडर में काशी को जो महत्व मिलना चाहिए था वह नहीं मिला है। इतना ही नहीं काशी वासी अपने राज परिवार और उनके निवास स्थल रामनगर किले को प्रदेश के पर्यटन कैलेंडर में स्थान न दिए जाने से भी मायूस हैं। उनका कहना है कि यह वो धरोहर है जिसका उल्लेख महाभारत काल में मिलता है। स्वतंत्रता आंदोलन में काशिराज का प्रमुख योगदान रहा है। फिर हिंदुस्तान के गिने चुने राज परिवारों में से है जिन्होंने आजादी के बाद कभी भी राजनीति में आने की कोशिश नहीं की या यूं कहें कि जब भी किसी ने राजनीति में घसीटने की कोशिश भी की तो राजपरिवार ने हमेशा इंकार ही किया। साथ ही आज भी जिस किसी समारोह या धार्मिक कार्यक्रम में राजपरिवार का प्रतिनिधित्व होता है उनका स्वागत हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ होता है यानी एक तरह से उन्हें शिव के समान प्रतिष्ठा प्राप्त है। ऐसे में इस रामनगर के किले को पर्टन कैलेंडर व प्रदेश व देश के पर्यटन मानचित्र में अवश्य शामिल किया जाना चाहिए। इसे पुरातात्विक धरोहर मानते हुए इसके संरक्षण की मांग भी उठने लगी है।
रामनगर राज्य व किला का इतिहास व महत्व
इतिहास गवाह है कि काशी राज्य की स्थापना 18 वीं शताब्दी में ही हो गई थी। तत्कालीन काशिराज बलवंत सिंह ने 1750 रामनगर किले का निर्माण कराया। यह किला मुगल स्थापत्य शैली में नक्काशीदार छज्जों, खुले प्रांगण और सुरम्य गुंबददार मंडपों से सुसज्जित है। वैसे काशीराज का एक अन्य महल चेत सिंह महल के नाम से भी जाना जाता है जो शिवाला घाट के निकट महाराजा चेत सिंह ने बनवाया था। रामनगर राज्य ब्रिटिश शासन काल में यह प्रमुख व्यापारिक और धार्मिक केंद्र के रूप में जाना जाता रहा। इतिहासकार बताते हैं कि 1910 में ब्रितानी प्रशासन ने वाराणसी को एक नया भारतीय राज्य घोषित किया और रामनगर को इसका मुख्यालय बनाया। काशी नरेश अभी भी रामनगर किले में रहते हैं। ये किला वाराणसी नगर के पूर्व में गंगा के तट पर बना हुआ है। शहर के पुरनिए बताते हैं कि भले ही भारतीय गणतंत्र में विलय के बाद राजा का अधिकार चला गया हो पर पूर्व काशिराज डॉ विभूति नारायण सिंह जब तक जीवित रहे, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष रहे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आजीवन चांसलर रहे। वर्तमान में कुंवर अनंत नारायण भले ही किसी महत्वपूर्ण पद पर न हों पर उनके सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं आई है। चाहे वह रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला हो या नाटी इमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप। देव दीपावली पर भी काशिराज के प्रतिनिधि के रूप में वह काशी के घाटों का निरीक्षण करते हैं। काशी के लक्का मेलों में शुमार नाग नत्थैया में भी इनकी उपस्थिति प्रतिष्ठा परख होता है। रामनगर किले के भीतर एक आकर्षक संग्रहालय है जिसमें तत्कालीन राज घराने की कीमती और दर्शनीय वस्तुएं संग्रहीत हैं। इस संग्रहालय का काफी महत्व है। ऐसे में स्थानीय लोगों का मानना है कि रामनगर के किले को पर्यटन के मानचित्र पर उचित स्थान मिले, पर्यटन कैलेंडर में इसे प्रमुखता से स्थान दिया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश जनसंपर्क विभाग का कैलेंडर
उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपंर्क विभाग द्वारा तैयार राज्य के कलेंडर में जनवरी के माह के पृष्ठ पर प्रयागराज त्रिवेणी संगम का चित्र दर्शाया गया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के मध्य में ‘सबका साथ-सबका विकास-उत्तर प्रदेश सरकार का सतत विकास’ का नारा भी है। हर माह के पृष्ठ पर प्रदेश सरकार की छह माह की उपलब्धियां गिनाई गई हैं। फरवरी माह के पृष्ठ में अयोध्या स्थित रामपैड़ी मनोरम दृश्य है तो मार्च माह के पृष्ठ पर मथुरा के बरसाने की होली का दृश्य। अप्रैल माह के पृष्ठ पर पीलीभीत गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब की तस्वीर, मई माह के पृष्ठ पर ललितपुर स्थित देवगढ़ जैन मंदिर का मनोरम दृश्य है। जून के पृष्ठ पर वाराणसी सारनाथ स्तूप को स्थान मिला तो जुलाई माह के पृष्ठ पर आगरा का ताजमहल ध्यान खींच रहा। अगस्त माह के पृष्ठ पर रानी झांसी का किला , सितम्बर माह में मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर, अक्तूबर माह के पृष्ठ पर विंध्याचल त्रिकोणदर्शन -मिर्जापुर अष्टभुजा देवी, विन्धवासिनी देवी, काली देवी(काली खोह) की तस्वीर लगाई गई है। नवंबर माह के पृष्ठ पर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर एवं दिसंबर माह के पृष्ठ पर गोरखपुर के गोरक्षनाथ मंदिर की मनोरम तस्वीर प्रकाशित है।
रामनगर के किले को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए
प्रमुख समाजवादी, पूर्व मंत्री और विधानपरिषद सदस्य शतरुद्र प्रकाश ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि रामनगर के किले को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए। रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। रामलीला स्थलों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए। रामनगर के सात शिवाला स्थित राजा चेत सिंह के किले को भी राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। बताया कि 15 अगस्त 1781 को काशिराज और वारेन हेस्टिंग के बीच हुए युद्द को कैसे भूला जा सकता है। वह युद्ध इसी राजा चेत सिंह किले से हुआ था। उन्होंने कहा कि हैदराबाद के निजाम के किले को महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है। झांसी की रानी के किले को महत्व मिल सकता है तो रामनगर के किले को क्यों नहीं। कहते हैं कि काशिराज परिवार को काशी में शिव स्वरूप मान्यता प्राप्त है। काशी के राजा का उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व है। निःसंदेह राज्य सरकार से यह भूल हुई है उसे सुधारते हुए रामनगर के किले को अब से भी प्रदेश के कैलेंडर में शामिल किया जाना चाहिए। सपा नेता ने कहा कि वैसे तो काशी का कण-कण पुरातात्विक महत्व रखता है। केवल काशी ही है जहां भारत माता का मंदिर है, रानी लक्ष्मीबाई का जन्मस्थान है, इसे भी राष्ट्रीय धरोहर व प्रदेश तथा भारीय पर्यटन के मानचित्र में शामिल किया जाना चाहिए। संत रैदास, व संत कबीर की जन्मस्थली है। इन्हें भी प्रमुखता मिलनी चाहिए।
-- क्रमशः
Published on:
21 Oct 2017 01:32 pm
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