
इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्वामी तुलसीदास सभी का आगमन हुआ है।
काशी विश्वनाथ मंदिर
विश्वनाथ मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना माना जाता है। ये मंदिर गंगा नदी के तट पर है. कहा जाता है कि इस मंदिर का दोबारा निर्माण 11 वीं सदी में राजा हरीशचन्द्र ने करवाया था। 1194 में मुहम्मद गौरी ने इसे ध्वस्त कर दिया था।
यह भगवान शिव को समर्पित है तथा स्वर्ण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है. भगवान् शिव को काशी के नाथ देवता भी कहा जाता है.
दशाश्वमेध घाट
वाराणसी में गंगा तट का प्रमुख्य स्थान है. जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यहाँ प्रयागेश्वर का मंदिर है। सन् 1929 में यहाँ रानी पुटिया के मंदिर के नीचे खोदाई में अनेक यज्ञकुंड निकले थे।
संकट मोचन हनुमान मंदिर
मंदिर की स्थापना तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में की थी. इस मंदिर में भगवान हनुमान को अपने भगवान,रामका सामना करने का गौरव प्राप्त होता है, ऐसा माना जाता है कि मंदिर का निर्माण उसी स्थान पर किया गया है जहां तुलसीदास को हनुमान के दर्शन हुए थे।
अस्सी घाट
अस्सी गंगा नदी के संगम पर स्थित है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी दुर्गा ने राक्षस शुम्भा-निशुम्भा का वध करने के बाद यहां ही अपनी तलवार को फेंक दिया था. माना जाता है कि वह तलवार जिस स्थान पर गिरी, वहां से अस्सी नदी का क्षेत्र शुरू हो जाता है।
विश्वनाथ गली
खरीदारी के लिए प्रसिद्ध और सबसे अच्छी जगहों में से एक है। कोई भी आसानी से आधुनिक या पारंपरिक परिधान, घरेलू सामान, घर की सजावट का सामान, देवताओं की पीतल की मूर्तियों आदि को पा सकता है। गली अपने स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड और मिठाइयों के लिए भी जानी जाती है, जिनमें चूरमा मटर, बाटी चोखा बनारस की प्रसिद्ध मिठाई शामिल हैं।
Updated on:
12 Nov 2022 01:46 pm
Published on:
12 Nov 2022 12:37 pm
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