21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Mahashivaratri 2020: काशी के इन महादेव के दर्शऩ-पूजन से ही महाशिवरात्रि का पूजन होता है सफल

-Mahashivaratri 2020: दर्शन मात्र से मिलता है मोक्ष-कृत्ति वासेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है-काशी विश्वनाथ के मस्तक के रूप में है मान्यता

3 min read
Google source verification
कृत्ति वासेश्वर महादेव

कृत्ति वासेश्वर महादेव

वाराणसी. महाशिवरात्रि (Mahashivaratri 2020) पर काशी में आमतौर पर लोग काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन को महत्व देते हैं। भक्तों की भारी भीड़ जमा होती है। लेकिन कम लोगों को पता है कि महाशिवरात्रि पर काशी में बाबा विश्वनाथ से कहीं ज्यादा महत्व है कृत्ति वासेश्वर महादेव का। मान्यता है कि इनके दर्शऩ-पूजन से ही महाशिवरात्रि का पूजन सफल होता है। बाबा विश्वनाथ का एक ऐसा स्वरूप जिसे उनके मस्तक की मान्यता हासिल है।

कृत्ति वासेश्वर महादेव के महत्व को जानकर ही गुरुवार को डीएम ने इस मंदिर का भ्रमण कर श्रद्धालुओं की सहूलियत और सुरक्षा का जायजा लिया।

IMAGE CREDIT: patrika

भगवान शंकर के मस्तक के रूप में मिली है मान्यता
मंदिर के महंत सुधीर गौड़ बताते हैं कि भगवान शंकर के 18 अंग (स्वरूपों) में एक मस्तक स्वरूप है यह कृत्ति वासेश्वर का शिवलिंग। यह एक मात्र ऐसा शिवलिंग है जहां 24 घंटे भोलेनाथ विराजमान रहते हैं। इनके दर्शऩ मात्र से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है अर्थात भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्राचीन काल का काशी का यह सबसे बड़ा मंदिर है।

महिषासुर के पुत्र गजासुर को मिली थी मुक्ति
महंत गौड़ बताते हैं कि काशी खंड व शिव के 18 पुराणों के युद्ध खंड में वर्णित है कि प्राचीन काल में महिषासुर के पुत्र गजासुर को जब किसी ने मुक्ति का मार्ग नहीं सुझाया तो गुरुओं ने उसे एक रास्ता बताया कि तुम काशी जाओ और वहां के सबसे बड़े शिवालय में पहुंच कर जितने भी ऋषि-मुनी हों उनकी बली चढाओ, तभी भगवान शिव प्रकट होंगे और वही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेंगे। गजासुर ने वैसा ही किया। तब भोले नाथ प्रकट हुए और उसका वध कर उसे मुक्ति दिलाई। उसी वक्त भगवान शंकर ने वर मांगने को कहा तो गजासुर ने अपना चर्म धारण करने को कहा जिसे भगवान भोले नाथ ने उस चर्म को धारण किया जिसके चलते उनका शरीर गज रूपी हो गया। यह शिवलिंग भी गज के ही समान है।

IMAGE CREDIT: patrika

औरंगजेब ने इस मंदिर पर सबसे पहले किया था हमला

उन्होंने बताया कि मुगल बादशाह औरंगजेब काशी आया तो उसने सबसे पहले कृत्ति वासेश्वर मंदिर पर ही हमला किया। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ, बिंदु माधव और काल भैरव पर 8 बार हमला किया पर वहां उसे जीत हासिल नहीं हो सकी। कृत्ति वासेश्वर मंदिर पर अंग्रेजों ने भी कटार से 4 बार हमला किया ऐसा कहा जाता है। वैसे महंत सुधीर गौड़ कटार से शिवलिंग पर हुए वार के निशान भी दिखाते हैं। बताया कि विदेशी आक्रांताओं के आक्रमण के चलते महादेव काशी छोड़ कर मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी में समाहित हो गए।

राजा पटनीमल ने 1656 में इस मंदिर का पुनः निर्माण कराया
लेकिन जब आक्रांता लौट गए तो उन्होंने राजा महाराजाओं व रानियों को स्वप्न दिया। उसी दौरान राजा पटनीमल की माता को भी स्वप्न दे कर काशी में विशाल शिवालय बनवाने का निर्देश दिया, तब राजा पटनीमल ने 1656 में इस मंदिर का पुनः निर्माण कराया। उसके बाद 21 ब्राह्मण मध्य प्रदेश गए, मल्लाहों और गोताखोरों को नर्मदा नदी के तट तक भेजा गया। लेकिन शिवलिंग को निकालने में दो बार शिवलिंग छूट गया तीसरे प्रयास में खुद कृत्ति वासेश्वर महादेव बाहर निकले। उस शिवलिंग को काशी लाकर सविधि फिर से प्राण प्रतिष्ठा की गई। उन्होंने बताया कि इस मंदिर से सटे ही औरंगजेब काल की मस्जिद भी है, उसमें प्राचीन कृत्ति वासेश्वर का शिवलिंग भी है। हालांकि वहां अब सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस फोर्स तैनात रहती है। बताया कि प्राचीन काल का यह अति वैभवशाली विशाल शिवाला था।

IMAGE CREDIT: patrika

महाशिवरात्रि पर महादेव के दर्शऩ से ही व्रत-पर्व का पुण्य लाभ प्राप्त होता है
उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि और मास शिवरात्रि पर कृत्ति वासेश्वर महादेव के पूजन का विशेष महात्म्य है। महाशिवरात्रि पर महादेव के दर्शऩ से ही व्रत-पर्व का पुण्य लाभ प्राप्त होता है। इसके अलावा हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी इन महादेव के दर्शऩ-पूजन की मान्यता है। वैसे यहां दक्षिण भारतीय भक्तों की भीड़ ज्यादा होती है।

IMAGE CREDIT: पत्रिका