शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि और श्री काशी विश्वनाथ की नगरी मे आदि शक्ति की आराधना का मौका। जी हां काशी यानी दुर्गापुजा के लिए मिनी कोलकाता। शुक्रवार को धूम-धाम से नाचते गाते, देवी भक्तों ने मूर्तिकारों के यहां से देवी की मृणमयी प्रतिमाओं की निकाली। प्रतिमाओं को पूजा पंडालों तक पहुंचाया। अब रात्रि विश्राम के पश्चात सप्तमी की सुबह देवी के आवाहन, कल्पारंभ, नव पत्रिका पूजन के साथ इन मृणमयी प्रतिमाओं चिन्मयी स्वरूप प्रदान कर दिया जाएगा। इसके साथ ही शुरू हो जाएगा चार दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव। जगह-जगह पूजा पंडालों में ढाकिये पहुंच गए हैं। लोहबान, धूप की गमक के साथ सुबह-शाम होगी आकर्षक आरती। वो आरती जिसे देखने के लिए हजारों हजार श्रद्धालु निकलते हैं सड़कों पर और पूरी रात पंडाल दर पंडाल देवी का दर्शन-पूजन चलता रहता है। ये है काशी की अद्भुत नवरात्रि।