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या देवी सर्वभूतेषु.. .राष्ट्र के नाम समर्पित काशी की दुर्गा पूजा

आखिर वो बेला आ ही गई, जगत जननी की आराधना को सज गए पूजा पंडाल, देवी प्रतिमाएं पहुंच गईं पंडालों में, अब सप्तमी यानी शनिवार से मचेगी दर्शन-पूजन की धूम। जानिए कहां क्या है...

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Ajay Chaturvedi

Oct 07, 2016

Mata Durga

Mata Durga

वाराणसी.
शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि और श्री काशी विश्वनाथ की नगरी मे आदि शक्ति की आराधना का मौका। जी हां काशी यानी दुर्गापुजा के लिए मिनी कोलकाता। शुक्रवार को धूम-धाम से नाचते गाते, देवी भक्तों ने मूर्तिकारों के यहां से देवी की मृणमयी प्रतिमाओं की निकाली। प्रतिमाओं को पूजा पंडालों तक पहुंचाया। अब रात्रि विश्राम के पश्चात सप्तमी की सुबह देवी के आवाहन, कल्पारंभ, नव पत्रिका पूजन के साथ इन मृणमयी प्रतिमाओं चिन्मयी स्वरूप प्रदान कर दिया जाएगा। इसके साथ ही शुरू हो जाएगा चार दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव। जगह-जगह पूजा पंडालों में ढाकिये पहुंच गए हैं। लोहबान, धूप की गमक के साथ सुबह-शाम होगी आकर्षक आरती। वो आरती जिसे देखने के लिए हजारों हजार श्रद्धालु निकलते हैं सड़कों पर और पूरी रात पंडाल दर पंडाल देवी का दर्शन-पूजन चलता रहता है। ये है काशी की अद्भुत नवरात्रि।









भारत सेवा श्रमसंघ की प्रतिमा शोभायात्रा
भारत माता सेवाश्रम संघ के स्वयंसेवकों ने बाजे-गाजे के साथ कमच्छा से मां की प्रतिमा शोभायात्रा निकाली। ऊंट, घोड़ा, हाथी के साथ निकाली शोभा यात्रा। यात्रा में शामिल नवयुवक तलवारबाजी की कला का प्रदर्शन भी करते रहे। मूर्तिकार के यहां निकली शोभायात्रा पंडाल तक पहुंचने तक प्रतिमा पूरी तरह तलवार की छांव में रही। शक्ति की आराधना का इनका अलग तरीका है। शक्ति प्रदर्शन के रूप में तलवार भाजने से लेकर परेड तक का करतब दिखाया रास्ते भर।






























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भारत माता की प्रतीक अवतार भी शोभायात्रा का आकर्षण रही। कतार बद्ध आश्रम से सन्यासी, छात्र-छात्राओं का हुजूम। पूरे अनुशासन के साथ। गोदौलिया चौराहे पर भी इस शोभायात्रा की मौजूदगी के बावजूद अतिरिक्त जाम की स्थिति नहीं रही। पूरी श्रद्धा के साथ सेवा श्रम संघ के अनुयायी देवी की पारंपरिक शैली की प्रतिमा को लेकर पहुंचे सिगरा जहां यह आश्रम है और जिस आश्रम में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से ही तैयारी चल रही है। बतादें कि आश्रम की प्रतिमा में कोई तड़क-भड़क नहीं होती पर प्रतिमा जीवंत होती है। हर बार की तरह इस बार भी पूजा राष्ट्र के नाम समर्पित रहेगी। शक्ति संधान से जुड़े अनुष्ठान आयोजित होंगे। बांग्ला व हिंदी में दुर्गा स्तुति होगी। विद्वानों के प्रवचन होंगे।









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पंडालों पर कल्पना की उड़ान
पूजा मंडपों ने इस बार भी कल्पना की लंबी उड़ान भरी है और पंडाल से लेकर प्रतिमा तक में नई-नई कल्पनाओं को आकार दिया है। इस बार पूजा पंडालों में जहा आपको कलकत्ता से लेकर तमिलनाडू तक का एहसास होगा वही मंडपों में राष्ट्रभक्ति भी हिलोरे भरेंगी। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर बीरता का पराक्रम कर राष्ट्र के नाम दुर्गा पूजा को समर्पित किया गया है। हालांकि विसर्जन की विसंगतियों से बचने के लिए कई पूजा पंडाल आयोजकों ने मां की प्रतिमा के साथ समझौता कर लिया है लेकिन दर्शकों को बिलकुल भी यह एहसास नही होगा की प्रतिमा मिट्टी की है या फिर कागज की। वाराणसी के इन पूजा पंडालों ने देवी भक्त दर्शकों के लिए खास इंतेजाम किए है चाहे वह सुरक्षा की दृष्टि से हो या फिर आपके आनंदित करने के लिए। प्रस्तुत हैं कुछ पंडालों की चर्चा...











हथुआ मार्केट पंडाल-तमिलनाडु के तज्जौर के वृहदेश्वर महादेव मंदिर का दृश्य
प्रसिद्ध हथुआ मार्केट में कई दशकों से दुर्गोत्सव मना रहे प्रिमियर ब्याज क्लब की ओर से तमिलनाडु के तंज्जौर के वृहदेश्वर महादेव मंदिर का रूप दिया गया है। आकर्षण यह कि कमल के फूल से मां दुर्गा प्रकट होंगी। करीब एक मिनट तक भक्तों को मंत्रों के बीच दर्शन देने के बाद पुनः कमल के फूल में समाहित हो जाएंगी। बता दें पिछली बार इस पंडाल को पूरी तरह दुर्गाकुंड का रूप दिया गया था।


बाबा मछोदरानाथ-वृंदावन मंदिर मथुरा का प्रमुख द्वार
बाबा मछोदरानाथ स्पोर्टिंग क्लब (मछोदरी पार्क) के पंडाल को वृंदावन मंदिर, मथुरा के प्रमुख द्वार का स्वरुप दिया गया है। यहां भक्तों को माता की रजत प्रतिमा के दर्शन होंगे। क्लब के अध्यक्ष राजेश यादव ने बताया कि दुर्गा पूजा के पश्चात प्रतिमा कोलकाता म्यूजिम में भेज दी जाएगी। इसके पीछे तर्क प्रतिमा के गंगा में विसर्जन पर लगी रोक है। भक्त तालाब में विसर्जन नहीं करना चाहते।


जगतगंज विजेता स्पोर्टिंग क्लब- सर्जिकल स्ट्राइक
विजेता स्पोर्टिंग क्लब जगतगंज में सामयिक सर्जिकल स्ट्राइक को अपनी मुख्य थीम बनाया है। चंदनपुर (कोलकाता) के कारीगरों की इलेक्ट्रानिक साज-सज्जा हर बार की तरह आकर्षण का केंद्र होगी। एलईडी बल्बों की सजावट के माध्यम से जंगलों के जानवरों को दर्शाया जाएगा। यह सन्देश देने का प्रयास है कि हमें उनका संरक्षण करना होगा अन्यथा वह दिन दूर नही जब धीरे-धीरे यह विलुप्तता के कगार पर पहुंच जाएंगे। दिलचस्प यह है कि बिजली से बनी डालफिन मछली अपना करतब दिखाएगी।


मां बागेश्वरी क्लब, जैतपुरा-लखनऊ और राजस्थान की भूलभलैया
मां बागेश्वरी क्लब की ओर से जैतपुरा के स्कन्द माता मंदिर के समीप बनाए गये पंडाल को लखनऊ और राजस्थान की तर्ज पर भूलभलैया बनाया गया है जहा बाहर पहाड़ का स्वरुप दिखेगा7 पंडाल में घुसने के बाद श्रधालुओं को भूलभुलैया का एहसास होगा।






इसी तरह शिवाला स्थित काशी दुर्गोत्सव समिति, बंगाली टोला, सनातन धर्म इंटर कालेज और गिरिजाघर के पूजा पंडालों में भी जबरदस्त तैयारी है। यहां परपरागत तौर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।