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कोर्ट में अब 25 फरवरी को होगी ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर की पुरातात्विक सर्वेक्षण की सुनवाई

कोर्ट में रखा अपना तर्क, जानिए क्या है कहानी

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Kashi Vishwanath Mandir

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वाराणसी. ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण की अगली सुनवाई अब 25 फरवरी को होगी। गुरुवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत में प्रार्थना पत्र लिया गया। कुछ देर सुनवाई के बाद अगली तिथि 25 फरवरी निर्धारित की गयी है। अब लोगों की निगाहे इस दिन के निर्णय पर लग गयी है।
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सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या में राम मंदिर विवाद सुलझने के बाद सभी की निगाहे अब ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर पर चल रही सुनवाई पर लगी हुई है। सिविल कोर्ट के क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही है। स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर की तरह से बहस के दौरान दलील दी गयी कि विवादित क्षेत्र मंदिर है। इसका धार्मिक स्वरुप मंदिर से परिवर्तित किया गया है। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई का अधिकार सिविल कोर्ट को है। इस मामले की सुनवाई वक्फ ट्रिब्यूनल को नहीं है। वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कोर्ट में कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद का जिस वक्फ एक्ट 1954 के तहत रजिस्ट्रेशन होना बताया गया था वह एक्ट यूपी में लागू नहीं हुआ था। कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड की बहस के लिए अब नयी तिथि 25 फरवरी निर्धारित की है।
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कोर्ट से की गयी है पुरातत्विक सर्वेक्षण कराने की मंग
वाद मित्र ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर पूरे परिसर की पुरातत्विक सर्वेक्षण कराने की मांग की है। इस सुनवाई को रोकने के लिए विपक्षी सुन्नी वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने कई आपत्ति दाखिल की है। बताते चले कि 22 साल बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई है। कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय करता है यह अब आने वाला समय ही बतायेगा।
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