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वाराणसी: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ काशी के संतों ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को जगतगुरु बालक देवाचार्य के पातालपुरी मठ पर काशी के संतों ने बैठक की और शंकराचार्य के खिलाफ नाराजगी व्यक्ति की। संतों का आरोप है कि शंकराचार्य को गौ माता के बहाने इंडिया गठबंधन की सरकार बनवाने की जिम्मेदारी सौंप गई है। इसके साथ ही संतों ने शंकराचार्य द्वारा रामानंदी समुदाय को लेकर दिए गए बयान पर भी नाराजगी जाहिर की है।
काशी के पातालपुरी मठ पर लगभग 100 की संख्या में संत इकट्ठा हुए और उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। संतों ने बैठक कर कहा कि वह एक राजनीतिक पार्टी को समर्थन देते हैं और उन्हें भारत में उस राजनीतिक पार्टी की सरकार बनवाने की जिम्मेदारी सौंप गई है। जगतगुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि शंकराचार्य शुरू से ही राजनीति करते आए हैं और उनके अंदर साधुता नाम की कोई चीज नहीं है। इसके साथ ही उनके शब्दों पर उनका नियंत्रण नहीं है और किसी भी साधु से उन्हें सहानुभूति भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि 70-78 साल बीत गए, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके दिवंगत गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कभी भी गौ माता के लिए काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर वह इतने बड़े गौ भक्त हैं तो उनके पास गौशाला क्यों नहीं है। बालक देवाचार्य ने सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि इस समय की सरकार गायों के संरक्षण के लिए कटिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जगतगुरु रामानंदाचार्य को छोटा बता रहे हैं। कह रहे हैं कि हमारी परंपरा बड़ी है और रामानंद संप्रदाय छोटा है। उन्होंने कहा कि कोई भी आचार्य छोटा बड़ा नहीं होता, सभी एक समान होते हैं, सभी का अपना दायित्व होता है और वह उसे निभाते हैं। बालक देवाचार्य ने कहा कि शंकराचार्य को किसी को कालनेमि कहने का हक किसने दे दिया। उन्होंने सवाल किया कि जो शंकराचार्य के साथ खड़ा है वह सनातनी है और बाकी सभी कालनेमि है, ऐसा कैसे हो सकता है? बालक देवाचार्य ने कहा है कि ऐसे hi चलता रहा तो एक दिन सारा संत समाज उनके खिलाफ खड़ा हो जाएगा। उन्हें संयम से और सोच समझकर बयान देना चाहिए।
Published on:
11 Mar 2026 04:11 pm
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