
गोरखनाथ और काशी विश्वनथ मंदिर
वाराणसी. अब गोरक्षनाथ मंदिर की तर्ज पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मनाया जाएगा खिचड़ी उत्सव। मकर संक्रांति को बाबा के भक्तों के बीच वितरित किया जाएगा खिचड़ी। यह व्यवस्था कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने लागू की है। काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए यह एक नई पहल होगी। विश्वनाथ मंदिर का खिचड़ी से कोई खास सरोकार कभी नहीं रहा है, जबकि गोरक्षनाथ मंदिर क्या गोरखनाथ और खिचड़ी के बीच गहरा संबंध है। ऐसे में गोरक्षनाथ मंदिर में मकर संक्रांति को विशेष उत्सव मनाया जाता है। श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता है वो बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं और मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता है। वहां यह मेला महीने भर तक चलता है।
गोरखनाथ और खिचड़ी की कहानी
मान्यताओं के अनुसार हिमांचल प्रदेश के कांगडा जिले में बाबा गोरखनाथ की मुलाकात ज्वाला देवी से हुई। ज्वाला देवी ने बाबा से कहा था कि आज खिचड़ी बनेगी उसी का भोग लगेगा। उसके बाद ज्वाला देवी ने आग जलाई और उस पर पतीले में पानी भी चढ़ा दिया। उसी दौरान बाबा गोरखनाथ ने ज्वाला देवी से कहा कि वह भिक्षाटन के लिए निकल रहे हैं ताकि खिचड़ी योग्य अनाज जुटाया जा सके। लेकिन बाबा कांगड़ा से निकले और खिचड़ी के लिए भिक्षाटन करते हुए गोरखपुर पहुंच गए। यहीं वह एक स्थान पर बैठ गए। लोग उनके भिक्षा पात्र में अनाज डालते गए पर वह पात्र भरता ही नहीं था। ऐसे में गोरखनाथ वापस कांगड़ा गए ही नहीं। कहा यह भी जाता है कि कांगड़ा में ज्वाला देवी मंदिर के पास एक कुंड है जिसका पानी खौलता रहता है। पुरनिये बताते हैं कि दरअसल वहीं पर ज्वाला देवी ने खिचड़ी के लिए 'अदहन' (आग पर पानी चढ़ाना) चढ़ाया था वह आज भी गोरखनाथ के भिक्षाटन कर लौटने का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में हर साल मकर संक्रांति पर गोरक्षनाथ मंदिर में खिचड़ी उत्सव धूम धाम से मनाया जाता है। लोग सुबह से ही स्नान ध्यान कर दाल चावल ले कर वहां पहुंचने लगते हैं। मंदिर परिसर में लोग खुद भी खिचड़ी बनाते और खाते हैं। साथ ही मंदिर प्रशासन की ओर से भिक्षुओं और अन्य लोगों के बीच खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता है।
विश्वनाथ मंदिर से नहीं रहा है खिचड़ी का कोई ताल्लुक
काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं रहा है। अन्नपूर्णा मंदिर के प्रबं? नाथ ाशी नाथ मिश्र ने पत्रिका को बताया कि यहां हर त्योहार पर विशेष भोग लगता है और वह प्रसाद भक्तों के बीच वितरित किया जाता है। उन्होंने बताया कि अभी मंदिर के स्थापना दिवस पर बुंदिया का भोग लगा और वह भक्तों के बीच बांटा गया। ऐसे ही खिचड़ी के दिन भी दिन में खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। उसके बाद उसका वितरण होता है। यहां खिचड़ी उत्सव जैसी परंपरा नहीं रही है। यह पहली बार है कि बाबा विश्वनाथ मंदिर में खिचड़ी उत्सव मनाया जाएगा। बताया कि बाबा के दरबार में हर नए अनाज का भोग लगता है। यह कोई नई बात भी नहीं है। हां! अन्नकूट पर जरूर माता अन्नपूर्णा मंदिर के अलावा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भी विविध व्यंजनों का भोग भी लगता है और मिठाई, साग सब्जी और अन्य अनाज चढाए जाते हैं।
108 किलो खिचड़ी का लगेगा भोग
इस बीच कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने बताया है कि मकर संक्रांति के अवसर पर 15 जनवरी को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के भोग आरती के पश्चात बाबा भक्तों में पहली बार खिचड़ी को प्रसाद के रूप में वितरण किया जाएगा। श्रीकाशी विश्वनाथ को 108 किलो खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा। विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब बाबा को मकर संक्रांति के दिन 108 किलो खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा। खिचड़ी भोग पकाने के लिए ज्ञानवापी परिसर स्थित मिर्जापुर मठ के पास चूल्हा लगाया जाएगा। मकर संक्रांति के दिन मध्याह्न आरती में बाबा को भोग लगाने के बाद खिचड़ी का वितरण भक्तों में किया जाएगा। इन अवसर पर मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण मुख्य यजमान होंगे।
यहां से आएंगे और इधर से निकलेंगे श्रद्धालु
इस बार यह व्यवस्था भी की जाएगी कि सरस्वती फाटक और ढुंढिराज गणेश की ओर से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करने वाले दर्शनार्थी ज्ञानवापी द्वार से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय भक्तों को प्रसाद दिया जाएगा। इन भक्तों की निकासी छत्ताद्वार और नीलकंठ द्वार से प्रस्तावित है।
Published on:
10 Jan 2018 06:19 pm
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