
होठो पर लाली, दर्द को बाहों में छुपाए समाज को मुस्कुरा कर दुआएं देते हैं किन्नर, मुक्ति के लिए पिशाच मोचन पर होगा श्राद्ध
वाराणसी. आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी किन्नर अखाड़ा मंगलवार को पिशाच मोचन पर अपने समाज के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भारत के विभिन्न राज्यों के महामंडलेश्वर के साथ सामूहिक पिंड दान करेंगी। यह जानकारी उन्होंने महमूरगंज स्थित गंगा महासभा के कार्यालय पर मीडिया से मुखातिब होते हुए दी। उन्होंने ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा, हिन्दू समाज में मुक्ति के लिए सब कर्मकांड होना जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा होंठो पर लाली लगाए, मुस्कराकर अपने दर्द को अपनी बाहों में छुपाए अपने दामन को समाज की दुआओं के लिए इस्तेमाल करने वालों और जो किन्नर बच्चें हमारे ही समाज से आते है हम उन्हें जाति और धर्म में भेद किए बिना गले से लगाते हैं।
जो माईयां हमारे समाज से गुजर गई उनको मोक्ष दिलाना हमारा दायित्व
उन्होंने आगे कहा अब जब किन्नर अखाड़ा बन गया है और पूरे भारत में किन्नर अखाड़े के प्रतिनिधि है। तो हमारा दायित्व बनता है कि जो माईयां हमारे समाज से गुजर गई हैं। जन्म से लेकर आखिरी सांस तक मुख्य धारा से टूटी रही, समाज का कटाक्ष क्षेला, होंठो पर लाली लगाए मुस्कराकर अपने दर्द को अपने सीने में छुपाए अपने दामन को समाज की दुआओं के ले लिए इस्तेमाल किया। चाहे वो प्रधानमंत्री हो, साधू, अरबपति हो या भिखारी सभी को पैदा होने पर आशीष दिया। बदले में एक रूपये से लेकर सवा लाख रूपये या मुट्ठी भर चावल लिया। लेकिन यह लोग जीवनभर मुख्यधारा से वंचित रहे। इनके गुजरने के बाद इन्हें जला दिया जाता है लेकिन आगे कोई कर्मकांड नहीं किया जाता। ऐसे किन्नरों की आत्मा जो आज भटक रही है उनकी मुक्ति के लिए मंगलवार को पिशाच मोचन पर विभिन्न प्रदेशों से किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर के साथ श्राद्ध करेंगी।
हमें अखाड़ा परिषद के व्यंग और उपहास से ग्रसित होना पड़ा, समाज से बेदखल होना क्या होता है साधु नहीं जानेंगे
उन्होंने कहा जिस तरीके से हमारा समाज गैर धर्म में इतने सालों रहा या दूसरे धर्म में जोर जबरदस्ती से उस समय के शासकों द्वारा सनातन धर्म से पतन किया गया, किन्नर अखाड़ा गठन होने के बाद हम वापस अपने सनातन धर्म में कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश कर रहे हैं। भले ही तेरह आखाड़ों की कटाक्ष और मान्यता को लेकर समय समय पर प्रश्नचिन्ह लगते रहे हो। लेकिन हमें किसी से मान्यता की आवश्यकता नहीं है। तेरह अखाड़े साधुओं के है हम उपदेवता योनी में आते है। तभी भी कई बार हमने अखाड़ा परिषद से बात करने की कोशिश कि लेकिन हमें अखाड़ा परिषद के व्यंग और उपहास से ग्रसित होना पड़ा। उन्होंने कहा कटाक्ष क्या होता है समाज से बेदखल रहना क्या होता है यह साधु नहीं जानेंगे। क्योंकि बहोत लोग साधु परम्परा में गृहस्थ जीवन जीकर आए है।
किन्नरों के लिए महा मंडल बनाए प्रदेश सरकार
उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद,आज भी हम उपेक्षित हैं। प्रदेेश की पिछली सरकार बदल गई हम कहते कहते थक गए कि किन्नरों के लिए उत्तर प्रदेश में महा मंडल बनाए। अब तक बारह राज्य इस दिशा में कार्य कर चुके हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक नहीं बना। उन्होंने कहा हम प्रेदेश के मुख्यमंत्री जो कि संत हैं उनसे जल्द मुलाकात करते हुए मांग करेगें कि प्रदेश में जल्द से जल्द किन्नर समाज का महा मंडल बनाया जाए।
Updated on:
01 Oct 2018 07:27 pm
Published on:
01 Oct 2018 07:12 pm
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