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#Once upon a time: जो श्री काशी विश्वनाथ तक की हरते है चिंता वो हैं चिंतामणि गणेश

-Once upon a time: 56 विनायक में है आपका स्थान -40 दिन तक लगातार दूब, लावा और लड्डू चढ़ा कर जो करता है पूजा दूर होती है सारी चिंता -हर बाधा दूर करने को यहां आते हैं भक्त -स्वयंभू है गणेश जी की यह प्रतिमा -इकलौता मंदिर जहां श्री गणेश सपरिवार निवास करते हैं

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Chintamani Ganesh

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वाराणसी. Once upon a time: आदि देव भोले शंकर की नगरी के केदार खंड में स्थित हैं चिंतामणि गणेश। यहां प्रथमेश का विग्रह स्वयंभू है। 56 विनायक में इन चिंतामणि गणेश का स्थान। मान्यता है कि चिंतामणि गणेश श्री काशी विश्वनाथ तक की चिंता हरते हैं। ऐसे में यह वर्ष पर्यंत भक्तों की भारी भीड़ जमा होती है। यह इकलौता मंदिर है जहां गणेश जी सपरिवार निवास करते हैं।

IMAGE CREDIT: patrika

मंदिर के महंत चल्ला सुब्बाराव बताते हैं कि यह इकलौता मंदिर है जहां गणेश जी सपरिवार निवास करते हैं। ऊपर शुभ-लाभ तो नीचे ऋद्धि-सिद्धि हैं। अष्टभुजा का विग्रह भी है। सबसे महत्वपूर्ण कि यह मंदिर और गणेश जी की प्रतिमा दक्षिण मुखी है। ऐसे में इन गणेश जी का महत्व कहीं ज्यादा बढ़ जाती है।

बताया कि मान्यता है कि जब कोई दुःख, दारिद्र से त्रस्त हो जाता है, चिंताओं में घिरा रहता है तो इन गणेश जी की 40 दिन तक लगातार पूजा करने से उसकी सारी चिंता दूर होती है। सारे कष्ट दूर होते हैं। यश, कीर्ति, धन की प्राप्ति होती है। महंत सुब्बाराव ने बताया कि गणेश जी की आराधना के लिए दुर्वा ग्रास, धान का लावा और बेसन के लड्डू से पूजा करनी चाहिए। दुर्वा ग्रास से पूजन करने से व्यक्ति धनवान होता है। लावा चढ़ाने से यश-कीर्ति में वृद्धि होती है। विद्या अध्ययन में लाभ होता है। ऐसे में जिन बच्चों का मन पढ़ने में नहीं लगता है उनके माता पिता 40 दिन तक अगर लावा चढ़ाएं और ध्यान करें तो उनकी मन्नत पूरी होती है। वहीं लड्डू चढाने से हर तरह की मनोवांक्षित कामना पूर्ण होती है। बताया कि 40 दिन तक लगातार पूजन-अर्चन से मान्नत पूरी होने पर नारियल चढ़ाना चाहिए।

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उन्होंने बताया कि चिंतामणि गणेश की आराधना करने से वह प्रसन्न हो कर भक्त की सारी चिंताओं को खुद ले कर उसे चिंताओं से मुक्त करते है, यही वजह है कि इनका नाम चिंतामणि पड़ा। गणेश जी को मणि रूप में भी पूजा जाता है। बताया कि काशी खंड में चिंतामणि गणेश जी का नाम लंबोदर विनायक है तो केदार खंड में चिंतामणि नाम है। उन्होंने यह भी बताया कि हर महीने की चतुर्थी को प्रथमेश की पूजा करनी चाहिए। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ठी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रख कर रात में चंद्रमा को अर्घ्यदान के बाद गणेश जी की पूजा करने से संकट दूर होते हैं। वहीं शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं, उदया तिथि में चतुर्थी मिलने पर ही यह विनायक चतुर्थी मान्य होती है।

बताया कि भाद्रपद की चतुर्थी पर चिंतामणि गणेश जी का 11 दिन तक उत्सव मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि को भव्य शोभा यात्रा निकलती है, संगीत समारोह होता है और विविध क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वालों को प्रसाद स्वरूप सम्मानित किया जाता है।