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#Once Upon a Time काशी का प्राचीन श्रृणमुक्तेश्वर मंदिर, जहां दर्शन मात्र से मिलती है श्रृणों से मुक्ति

-अद्भुत है इस मंदिर की विशेषता-यहां है भगवान शिव को वो मंदिर जो उनके ही कहने पर स्थापित किया गया

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RinMukteshwar temple in Kashi

RinMukteshwar temple in Kashi

वाराणसी. काशी धार्मिक मान्यताओं के लिए पूरी दुनियां में विख्यात है। तंत्र मंत्र की बातें हों या पौराणिक मान्यताओं और विरासतों के संग्रह की, काशी विश्व भर में इसके लिए जानी जाती है। इसी काशी में एक ऐसा स्थल भी है जिसके बारे में मान्यता है कि वहां जाने से पूजन आदि करने से ऋणों से मुक्ति मिलती है। मौजूदा समय में इस मंदिर की प्रासंगिकता और भी बढ गई है। यहां भक्तों की भारी भीड़ जमा होने लगी है।

कहा जाता ही कि प्राचीन काल में काशी के एक ब्राह्मण की तूती बोलती थी। लेकिन परिवार में विपत्तियों के कारण ब्राह्णण के घर दिनों दिनों धन की हानि होने लगी। वह ब्राह्मण. चिंतित रहने लगे। उन्होंने भगवान शिव की उपासना शुरू की। इसी बीच अवढर दानी भगवान शिव ने उनके स्वप्न में आए और निर्देश दिया कि महमूरगंज इलाके में विशालकाय पीपल के पेड़ के नीचे शिवलिंग की स्थापना करके शिव का पूजन करे। पंडित ने ऐसा ही किया। देखते ही देखते उसके सारे कष्ट दूर हो गए। वो फिर से धनवान हो गए। उसके बाद से ही इस मंदिर में लोगों को आना जाना शुरू हुआ। अब तो हर सोमवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ में उमड़ती है।

इस मंदिर में भगवान के शिवलिंग के साथ ही भगवान राम, लक्ष्मण माता सीता की भी मूर्ति है। इसके साथ ही यहां भक्त हनुमान का भी वास है। पीपल के विशाल पेड़ में रक्षा बांधने से लोगों के कष्ट भी दूर हो जाते हैं। मंदिर के पुरोहित मुकेश शास्त्री कहते हैं कि यहां पर पूर्वांचल के कई जिलों के लोगों का आना जाना होता है। भगवान शिव की कृपा से लोगों के कष्ट दूर हो जाते हैं।

IMAGE CREDIT: patrika