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इस वजह से महिलाओं को जल्दी होता है मेटास्टैटिक कैंसर, आसान नहीं है पहचान

महिलाओं में तेजी से फैलता है मेटास्टैटिक कैंसर

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metastatic cancer

मेटास्टैटिक कैंसर

वाराणसी. कैंसर एक जानलेवा बीमारी है। इंडिया में इसका इलाज सम्भव नहीं है। आपने फेफड़ा,आंत, लीवर, ब्रेस्ट, बोन कैंसर के बारे में तो सुना होगा। महिलाओं में ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, लंग्‍स, सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), स्टमक और लीवर कैंसर के मामले ज्यादा देखे जाते हैं। हालांकि इनके अलावा भी कई तरह के कैंसर होते हैं, जिनके बारे में लोगों को ज्यादा नहीं पता. ऐसा ही एक कैंसर है, जिसे मेटास्टैटिक कैंसर कहते हैं।


मेटास्टैटिक कैंसर एक एडवांस कैंसर है, जो अनियंत्रित कोशिकाओं के कारण होता है। ये कैंसर कोशिकाएं प्रभावित अंग के बेसमेंट मेंबरेन (झिल्ली) को फाड़ कर बाहर निकल जाती हैं और लिम्फ नोड्स और नसों के जरिए फेफड़े, हड्डियां, लिवर, ब्रेन जैसे अन्य अंगों में फैल जाती हैं। यह सबसे खतरनाक कैंसर है।


महिलाओं में तेजी से फैलता है मेटास्टैटिक कैंसर
वैसे तो कैंसर कोई भी खतरनाक है। लेकिन इसमें भी सबसे खतरनाक है मेटास्टैटिक कैंसर। यह कैंसर हड्डियों से शुरू होता है और उनमें दर्द होने लगता है। कई बार हड्डियां कमजोर होने की वजह से टूटने का खतरा भी रहता है। महिलाओं को यह बीमारी इसलिए तेजी से होती है क्योंकि ज्यादातर महिलाएं छोटी-छोटी बीमारी जैसे- बुखार आना, बॉडी पेन, थकान इन जैसी बीमारी को नजरअंदाज कर देती हैं।


मेटास्टैटिक कैंसर के लक्षण
मेटास्टैटिक कैंसर की पहचान करना आसान नहीं है। हालांकि इसे कुछ निशानों और लक्षणों से पहचाना जा सकता है, जैसे-चलने में दिक्कत और अचानक फ्रैक्चर (बोन मेटास्टेसिस)
सिरदर्द।
चक्कर आना या दौरा पड़ना।
देखने में समस्या (ब्रेन मेटास्टेसिस)।
सांस की तकलीफ (लंग मेटास्टेसिस)।
पेट में अक्सर सूजन या पीलिया (लीवर मेटास्टेसिस) जैसी बीमारियां।
ये लक्षण मोटे तौर पर इस बात पर निर्भर करते हैं कि मेटास्टैटिक ट्यूमर का आकार क्या है और शरीर में वो किस जगह पर है।
यह आपके मस्तिष्क में भी हमला करता है। जिसके कारण आपको चक्कर आना, सिरदर्द, दौरे पड़ना आदि की समस्या हो सकती है।

कैंसर का इलाज संभव
किसी भी तरह का कैंसर हो अगर उसके बारें में समय से पता चल जाएं तो उसका इलाज संभव है। अगर मेटास्टैटिक कैंसर की बात करें तो इसमें सेल्स को रोकना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन समय से इसके बारें पता चल जाएं तो इसके काफी हद तक निजात पाया जा सकता है। इसके अलावा दवाओं, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी या फिर सर्जरी के जरिएं इसका इलाज संभव है।