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Dussehra in DLW: तैयारी अंतिम दौर में, जानें कितना ऊंचा होगा रावण का पुतला और क्या-क्या होगें खास कार्यक्रम

- डीएलडब्ल्यू में अपने तरह का अनोखा होता है Dussehra-राम चरित मानस की चौपाइयों और दोहों पर आधारित होती है मूक लीला

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निर्माणाधीन रावण का पुतला

निर्माणाधीन रावण का पुतला

वाराणसी. गोस्वामी तुलसी दास की कर्मभूमि काशी में यूं तो कई राम लीलाएं होती हैं, कई लीला विश्व प्रसिद्ध भी है, जिसमें नाटी इमली का भरत मिलाप है। लेकिन डीजल रेल इंजन कारखाना (डीएलडब्ल्यू) परिसर में होने वाली विजया दशमी की लीला भी अनोखी होती है। विगत 4 दशक में इस लीला ने अपनी लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा किया है। अब तो लीला के दिन यानी दशहरे को यहां दोपहर से ही भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। इसमें केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल के श्रद्धालु होते हैं।

विजया दशमी को डीएलडब्ल्यू में होने वाले दशहरा मेला की खास बात यह है कि यहां रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशालकाय पुतले तो जलाए ही जाते हैं, सबसे आकर्षक होती है मूक लीला जो रामचरित मानस की चौपाइयों और दोहों पर आधारित होती है। इस लीला में डीरेका स्कूल के छात्र-छात्राएं भाग लेते हैं। इसकी तैयारी महीना भर पहले से ही शुरू हो जाती है। पूरे रामचरित मानस का प्रसंग जीवंत हो उठता है। तकरीबन ढाई घंटे तक चलने वाली यह लीला श्रद्धालुओं को विभोर कर जाती है। कई श्रद्धालुओं की आंखें छलक पड़ती हैं तो प्रसंग के अनुसार कई क्रोधित हो उठते हैं।

वाराणसी के डीरेका में होने वाली रामलीला की तैयारियां अब अंतिम दौर में हैं। दशहरे के दिन डीरेका के खेल मैदान में होने वाले रामचरित मानस पर आधारित ढाई घंटे के रूपक का मेगा रिहर्सल डीरेका के संस्थान में चल रहा है। आयोजकों का दावा है को ऐसा कहीं नहीं होता है।

डीरेका में दशहरे के दिन होने वाले रामचरित मानस पर आधारित राम वन गमन से लेकर रावण वध तक की लीला को ढाई घंटे में रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, यहां के रूपक में पात्र संवाद नहीं बोलते है। संवाद सिर्फ मंच से किया जाता है। इस रूपक में 60 फीसद दृश्य और 40 प्रतिशत श्रब्य होते हैं। संवाद मंच से बोले जाते हैं और पात्र मूक अभिनय करते हैं। इसमें रामचरित मानस की चौपाइयों के गीत, कजरी और हिंदी की सभी विधाओं का प्रयोग किया जाता है।

विजया दशमी समिति डीरेका के निदेशक एसडी सिंह ने बताया कि इस बार 8 अक्टूबर को लीला के साथ आकर्षक आतिशबाजी होगी। रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा। सबसे ऊंचा होगा रावण का पुतला जिसकी ऊंचाई 70 फीट होगी। इसके अलावा मेघनाद के पुतले की ऊंचाई 60 फीट और कुभकरण के पुतले की ऊंचाई 65 फीट होगी।