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बनारस का वह तबला वादक, जिन्होंने पद्म श्री लेने से किया था इनकार

गोविंदा ने मान लिया था अपना गुरू,

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lachhu maharaj

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वाराणसी. भारत के प्रसिद्ध तबला वादक लच्छू महाराज के 74वें जन्मदिवस के अवसर पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें बधाई दी है। लच्छू महाराज ऐसे कलाकार जिन्होंने केंद्र सरकार की ओर से 'पद्मश्री' पुरस्कार को लेने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि "श्रोताओं की वाह और तालि‍यों की गड़गड़ाहट ही कलाकार का पुरस्‍कार होता है।


कौन थे लच्छू महाराज
लच्छू महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध नगरी बनारस में 16 अक्टूबर सन् 1944 में हुआ था। वे इसी काशी में पले-बढ़े। इनके पिता का नाम वासुदेव महाराज था। लच्छू महाराज बारह भाई-बहनों में चौथे नम्बर के थे। इनका निधन 27 जुलाई, 2016 को हुआ था। उनकी अंतिम संस्कार बनारस के मणिकर्णिका घाट पर किया गया। उन्होंने बनारस घराने की तबला बजाने की परम्परा को आगे बढ़ाया था। लच्छू महाराज सादगी पसंद व्यक्ति थे। उन्होंने कभी कोई पुरस्कार कोई सम्मान नहीं लिया। आज भी उनके कई शिष्य देश-विदेश में तबला बजा रहे हैं।

लच्छू महाराज की शादी फ्रांसीसी महिला टीना से हुई थी। उनकी एक पुत्री है, जो स्विट्जरलैंड में है। पूरी दुनिया में अपनी पेशेवर प्रस्तुति के अलावा लच्छू महाराज ने 'महल (1949)', 'मुगल-ए-आजम (1960)', 'छोटी छोटी बातें (1965)' और 'पाकीजा (1972)' जैसी फिल्मों कई बॉलीवुड फ़िल्मों के लिए भी तबला बजाया है। लच्छू महाराज गायन, वादन एवं नृत्य तीनों की संगत में निपुण थे।

गोविंदा ने माना था अपना गुरू
हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता गोविन्दा लच्छू महाराज के भांजे हैं। उन्होंने बचपन में ही लच्छू महाराज को अपना गुरु मान लिया था। गोविन्दा ने तबला बजाना लच्छू महाराज से ही सीखा। लच्छू महाराज जब कभी भी मुम्बई जाते तो गोविन्दा के घर पर ही रुकते थे।

IMAGE CREDIT: NET

गूगल ने डूडल बनाकर दी बधाई

भारत के प्रसिद्ध तबला वादक लच्छू महाराज के 74वें जन्मदिवस के अवसर पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें बधाई दी। गूगल ब्लॉग के मुताबिक, इस डूडल में लच्छू महाराज की तस्वीर को नीले, पीले, लाल और हरे रंगों से तैयार किया गया है। वह तबला बजाते नजर आ रहे हैं। उनके मुख पर मुस्कान और आंखों में संतुष्टि के भाव हैं।