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एशियन गेम्स 2018- वाराणसी के इस लाल पर टिकी सबकी निगाह, काफी जद्दोजहद के बाद पहुंचा है जकार्ता

चंदौली जिले के मूल निवासी, अब रहते हैं वाराणसी में, बड़े भाई भी रह चुके हैं नेशनल एथलीट।

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अभय सिंह

अभय सिंह

वाराणसी. इंडोनेशिया के जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में जहां पूरी भारतीय टीम लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। पूरे देश की निगाह इंडोनेशिया गए इन खिलाड़ियों पर है। लेकिन काशीवासियों की निगाह लगी है गंगा तट निवासी इस युवा पर जो इंडियन वाटर स्पोर्ट्स टीम का सदस्य है। बता दें कि लगातार शानदार प्रदर्शन करने और कई मेडल जीतने के बाद भी इसे जकार्ता का टिकट हासिल करने के लिए कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अंततः कोर्ट के फैसले के बाद इसे जकार्ता जाने वाली भारतीय टीम में शामिल किया गया। ये और कोई नहीं अभय सिंह हैं, इनके कोच सहित समूची काशी को इनसे काफी उम्मीदें हैं। कोच नन्हें सिंह को पूरा भरोसा है कि अभय देश के लिए मेडल जरूर जीतेगा।

चंदौली के मूल निवासी अब बनारस में रहते हैं अभय
एशियाई गेम्स के लिए बनारस के अभय सिंह का चयन किया गया है। वह वाटर स्पोर्ट्स (कैमकिंग कैनोईंग) खेल में चुनौती पेश करेंगे। उन्होंने देश के लिए पदक जीतने की बात कही है। बता दें कि चंदौली के सकलडीहा क्षेत्र में धरहरा गांव के मूल निवासी अभय इन दिनों बनारस में डीजल रेल इंजन कारखाना (डीरेका) के पास ही रहते हैं। साई सेंटर यूपी कॉलेज के प्रभारी नन्हें सिंह ने पत्रिका को बताया कि अभय ने कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं।

मध्य प्रदेश सरकार विक्रम अवार्ड से कर चुकी है सम्मानित
अभय साई सेंटर भोपाल में थे। भोपाल से ही उन्होंने पढ़ाई की है। उनकी खेल प्रतिभा और उनकी उपलब्धियों से प्रभावित हो कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन्हें विक्रम अवार्ड से सम्मानित कर चुके हैं। बताया कि चीन बाली शहर में 06 से 08 जुलाई तक आयोजित पांचवी एशियन चैंपियनशिप ड्रैगन बोर्ड में अभय ने पूरे एशिया में चौथा स्थान प्राप्त किया था। चीन में अपना लोहा मनवाने के बाद अब अभय की निगाहें इंडोनेशिया के जकार्ता में विजयी तिरंगा झंडा लहराने पर टिकी हुई हैं।


दिल्र्ली हाई कोर्ट के आदेश पर भारतीय दल में शामिल हुई नौका दौड़ टीम
आईओए के रवैये के खिलाफ नौका दौड़ के खिलाड़ी अभय सिंह ने अदालत में याचिक दायर की थी। आईओए ने चयन के लिए जरूरी योग्यता मानदंडों को पूरा नहीं करने पर नौका दौड़ टीम का चयन नहीं किया था। अभय ने एशियाई स्तर के टूर्नामेंट में रजत और कांस्य पदक जीतने के बाद इस मामले में अदालत से दखल देने की मांग की थी। अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि याचिकाकर्ता और टीम इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सके। बता दें कि कयाकिंग एंड कैनोइंग में पुरूष और महिला टीमों में 16-16 खिलाड़ी होते हैं। नौका दौड़ में 12 खिलाड़ी भाग लेते हैं जबकि चार रिजर्व खिलाड़ी होते है।

कैनोइंग कयाकिंग (ड्रैग्न बोर्ड) गेम के खिलाडी हैं अभय
भोपाल से स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने वाले अभय कैनोइंग कयाकिंग (ड्रैग्न बोर्ड) गेम के खिलाडी हैं। जकार्ता में एशियन गेम्स में अभय 200 मीटर, 500 मीटर और 1000 मीटर स्पर्धा में चुनौती पेश करेंगे। बताया कि इनके पिता सुभाष चंद्र सिंह बीज विकास निगम में उप निदेशक रह चुके हैं। बड़े भाई अमित सिंह अंतरराष्ट्रीय एथलीट रहे हैं। खास तौर पर वह 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में भाग लेते रहे।

25 से 27 अगस्त के बीच होना है इवेंट
साईं कोच नन्हे सिंह ने बताया कि वाटर स्पो‌र्ट्स गेम्स का आयोजन 25 से 27 अगस्त के बीच होगा। हालांकि अभय बुधवार को ही जकार्ता रवाना हो गया है। उन्होंने कहा कि अभय जकार्ता के देश के लिए मेडल लेकर ही लौटेगा।

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