
धान की बालियों से सजा अन्नपूर्णा दरबार
वाराणसी. धर्म नगरी काशी में सात वार नौ त्योहार की मान्यता है। ऐसा कोई महीना नहीं जब कोई पर्व-त्योहार न पड़ता हो। फिर बात जगत जननी मां अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ से जुड़ी हो तो अपने आप में ही पर्व विशेष बन जाता है। इसी कड़ी में गुरुवार को मां अन्नपूर्णा दरबार को धान की बालियों से सजाया गया। मां के भक्तों के बीच धान की बालियां वितरित की गईं। अब ये धान की बालियां भक्तजन अपने घरों के अन्न भंडार में रखेंगे। यही नहीं यह विशेष पर्व किसानों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि पूर्वांचल के किसान अपनी धान की फसल को माता के श्री चरणों में अर्पित करते हैं फिर आज के दिन प्रसाद रूप में उसे ग्रहण कर अन्न के भंडार (कोठार) में रखते हैं ताकि अन्न की वृद्धि हो। यही नहीं किसान समुदाय इन्हीं बलियों को अगले वर्ष बीज में मिलाते है। मान्यता है कि ऐसा करने से धान की उपज बढ़ती है। ऐसे में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के किसान मां के दरबार में पहुंचे और धान की बाली मां के श्री चरणों में अर्पित किया। इसी दिन सत्रह दिवसीय व्रत अनुष्ठान की पूर्णाहुति भी हुई। महिलाओं ने 17 गांठ के धागे और इतनी ही संख्या में फल-फूल, दुर्वादल, अक्षत, सिंदूर से सविधि पूज-अर्चना किया।
इसके पूर्व गुरुवार को तड़के महंत शंकर पुरी ने मां को पंचामृत स्नान कराया फिर नूतन वस्त्र धारण करा कर जगत जननी का शृंगार किया फिर सविधि पूजन-अर्चन कर माता रानी का पट भक्तों के लिए खोल दिया गया। फिर मध्यान भोग आरती में धान की बालियों से मां का शृंगार किया गया। इस मौके पर समूचे गर्भ गृह सहित पूरे मंदिर प्रांगण को धान की बालियों से सजया गया।
गुरुवार की सुबह माता रानी का पट जो भक्तों के लिए खुला तो पूरा मंदिर परिसर मांग के जयकारे से गूंज उठा। दर्शनार्थियों की भीड़ ऐसी कि मंदिर परिसर में पांव रखने तक की जगह नहीं रही। अब ये सिलसिला देर रात्रि तक अनवरत जारी रहेगा।
इस मौके पर महंत शंकर पुरी ने बताया कि मां अन्नपूर्णा के व्रत से अन्न-धन, पुत्र,यस,वैभव और आरोग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा किसान धान की बालियां मां को इसलिए अर्पित करते हैं कि उनके अन्न भंडार में वृद्धि हो और इन्हीं बलियों को अगले वर्ष बीज में मिलाते है जिससे धान की उपज बढ़ जाती है।
ठीक ऐसे ही कमच्छा क्षेत्र स्थित मां कामाख्या मंदिर में भी मां का धान की बालियों से भव्य शृंगार किया गया। साथ ही पूरे मंदिर परिसर को धान की बालियों से सजाया गया। मां कामाख्या की अद्भत छटा देखत ही बन रही थी। यहां भी भक्तों के मंदिर आने का सिलसिला जो सुबह से शुरू हुआ वह देर रात तक जारी रहेगा।
Published on:
09 Dec 2021 04:25 pm
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