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अन्नकूट पर काशी के मंदिरों में सजा अन्न का भंडार

काशी का है यह खास त्योहार, हर मंदिर में लगा 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग। सुरक्षा के नाम पर अन्नपूर्णा से विश्वनाथ मंदिर न जा सके भक्त।

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. काशी जिसका महात्म्य वेद, पुराण सहित सभी धर्म ग्रंथों में मिलता है। दुनिया में इसे धार्मिक नगरी की मान्यता हासिल है। देवाधिदेव श्री काशी विश्वनाथ की नगरी है काशी। लेकिन यही काशी विश्वनाथ को मां अन्नपूर्णा के सामने झोली फैलानी पड़ती है ताकि सृष्टि में कोई भूखा न रहे। सृष्टि में हर किसी का कल्याण हो। तभी तो यहां धन त्रयोदशी पर ही मां अन्नपूर्मा की स्वर्णमयी प्रतिमा का दरबार भक्तों के लिए खुलता है। चार दिनों तक माता अन्नपूर्णा, भूमि देवी और मां लक्ष्मी की स्वर्ममयी प्रतिमा के दर्शन मिलते हैं। अन्नकूट को मां अन्नपूर्णा के दरबार में 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगाया जाता है। इसे अन्नकूट कहत हैं। इसी के तहत शुक्रवार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया गया अन्नकूट का पर्व। इसके तह मां अन्नपूर्णा के साथ ही काशी के प्रायः सभी मंदिरों में 56 प्रकार के विविध पकवान का भोग लगा। माता के दरबार सहित श्री काशी विश्वनाथ में भी करीने से सजाया गया अन्न का भंडार। मां अन्नपूर्णा के दरबार में इन 56 प्रकार के व्यंजनों के भोग का भक्तों के बीच वितरण भी हुआ।

दरअसल यह देश प्राचीन काल से कृषि प्रधान रहा है। ऐसे में यहां की परंपरा भी कृषि आधारित है। इस देश में जहां वेद, पुराण, एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों में नारी शक्ति को विशेष ध्यान दिया गया है। इसी के तहत दीपावली को ज्योति पर्व मानने के बाद अगले दिन अन्नकूट पर्व मनाया जाता है। इसमें पृथ्वी यानी संपूर्ण सृष्टि की जननी माता अन्नपूर्णा और पकवान निर्मात्री यानी नारी की पूजा की मान्यता है। अन्नकूट के दिन सबसे पहले काशी की पालनहारिणी माता, मां अन्नपूर्णा को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगता है। इसके तहत आज यानी अन्नकूट को मां अन्नपूर्णा 101 क्विंटल वजन के विविध पकवानों का भोग लगाया गया। इसके बाद इसका वितरण हुआ। इसमें हर वर्ग के श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

माता अन्नपूर्णा के अलावा काशीधिपति बाबा विश्वनाथ के दरबार में 22 क्विंटल भोज्य सामग्री का भोग लगाया गया। इसी तरह से शनि देव के मंदिर में 5 क्विंटल, कैलाश मंदिर में 11 क्विंटल, अक्ष्यवट मंदिर मे 151 किलो का भोग लगाया गया। इसी तरह से काशी के प्रायः सभी देवालयों में 56 प्रकार के विविध व्यंजनों के भोग लगाए गए।

IMAGE CREDIT: अजय चतुर्वेदी

मंदिरों में अन्नकूट सजाने के पीछे अन्न सुरक्षा का भी भाव रहता है। वेदों में लिखित है कि नित्यप्रति 56 प्रकार के व्यंजन पकाए जाएं। उनसका प्रथम अर्पण मातो होगा फिर पुखों को अर्पित करें, दीन दुखियों के बीच उसका वितरण किया जाए। उसके बाद ही खुद अन्न ग्रहण करना चाहिए। इसी मान्यता के अनुसार अन्नकूट को माता अन्नपूर्णा मंदिर में आए समस्त भक्तों को पेट भर भोजन मिला। इस संबंध में अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी महाराज का कहाना है कि मां अन्नपूर्णा की ही कृपा है कि काशी में लोग उठते भले भूखे पेट हैं पर कोई भूखे पेट सोता नहीं है।

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लेकिन धनतेरस पर्व के बाद दो दिनों तक निरंतर मां अन्नपूर्णा का दर्शन पूजन चलता रहा। पर शुक्रवार को अन्नकूट पर्व पर श्री विश्वनाथ मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर में अन्नकूट दर्शन से भक्तो को वंचित कर दिया गया। भक्त शनिदेव, कैलाश भगवान, अक्षयवट हनुमान के अन्नकूट दर्शन नही कर सके। हालांकि न कोई लंबी कतार रही न भारी भीड़। फिर भी अन्नपूर्णा मंदिर और विश्वनाथ मंदिर के पास बैरिकेडिंग कर दिया गया। ऐसा एसपी ज्ञानवापी सुरक्षा के आदेश पर ऐसा किया गया। दर्शन से वंचित भक्तो को काफी ठेस पहुंची। साथ ही देवालयों के महंत परिवार भी एसपी ज्ञानवापी के इस निर्णय से खासे आक्रोशित रहे।

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