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मायावती के नये दांव से बढ़ गयी अखिलेश यादव की मुश्किल,बीजेपी को रोकना होगा कठिन

बसपा ने प्रत्याशियों के नाम घोषित करके बनायी बढ़त, जानिए क्या है कहानी

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Mayawati

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वाराणसी. बसपा सुप्रीमो मायावती के नये दांव से अखिलेश यादव की मुश्किल बढ़ गयी है। बीजेपी को हराने के लिए सपा व बसपा के गठबंधन की अटकलों के बीच बसपा सुप्रीमो ने नयी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके बाद भी सपा व बसपा में गठबंधन होता है तो सपा को समझौता करना पड़ सकता है।
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यूपी में बीजेपी व कांग्रेस को छोड़ दिया जाये तो सपा व बसपा ही मुख्य क्षेत्रीय दल बचते हैं। दोनों दलों में कौन ताकतवर है यह गठबंधन के तहत मिली सीट बतायेगी। सपा व बसपा में अभी गठबंधन नहीं हुआ है इसी बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने आजमग के लालगंज से घूरा राम को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसके अतिरिक्त बाहुबली मुख्तार अंासरी के बेटे अब्बास अंसारी, बाहुबली अतीक अहमद व अन्य लोगों को प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा चल रही है। बसपा के इस उद्देश्य से साफ हो जाता है कि पार्टी से जितने प्रत्याशी घोषित कर दिये होंगे। उतने सीट पर बसपा ही लड़ेगी। बची हुई सीट पर गठबंधन होता है तो ही सपा के साथ सीट बांटी जायेगी। मायावती के रणनीति से अखिलेश यादव की मुश्किल बढ़ जायेगी। अब अखिलेश यादव को अपनी पसंद की सीटे मिलना कठिन हो जायेगा। इसके चलते सपा में बगावत भी हो सकती है।
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बसपा जल्द जारी करेगी और प्रत्याशियों की सूची
बसपा सुप्रीमो जल्द ही अन्य प्रत्याशियों की सूची जारी करेगी। यह वह सीट होगी, जहां पर बसपा प्रत्याशी बहुत कम अंतर से चुनाव हारे हैं। बसपा सुप्रीमो प्रत्याशियों की सूची जारी करके एक तीर दो शिकार कर रही है। बीएसपी को सबसो बड़ा फायदा होगा कि गठबंधन होने की स्थिति में प्रत्याशी घोषित किये गये सीट पर सहयोगी दल से किसी प्रकार का विवाद नहीं होगा। दूसरे निशाने के रुप में मायावती ने सपा पर दबाव डालना शुरू कर दिया है कि यदि गठबंधन करना है तो बसपा के अनुसार होगा। अब देखना है कि पीएम नरेन्द्र मोदी व सीएम योगी को हारने के लिए सपा व बसपा को गठबंधन होता है या नहीं।
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