
प्रतीकात्मक तस्वीर
वाराणसी: महिलाओं संग हो रहे अपराध को लेकर काशी में चौकाने वाले आंकड़े सामने निकलकर आए हैं। यहां एक साल में महिलाओं के साथ हुए अपराध में 480 मामले सामने आए हैं। हाल ही में एनसीआरबी की रिपोर्ट आई थी, जिसमें पता चला है कि महिला अपराध से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार पहले के मुकाबले अभी भी धीमी है।
जानकारी के मुताबिक, वाराणसी की अदालत में महिला अपराध से जुड़े सैकड़ों मुकदमे अभी भी लंबित पड़े हुए हैं। वहीं, महिला अपराध के मामले में निस्तारण केवल 33% के आंकड़ों के साथ रहा है। वाराणसी में बीते एक साल में शहर के विभिन्न थानों पर साइबर उत्पीड़न, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, छेड़खानी और घरेलू हिंसा से जुड़े करीब 480 मामले दर्ज किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि महिला अपराध से जुड़े सबसे अधिक मामले शहरी इलाकों में दर्ज किए गए हैं, जिनमें कैंट, लंका सिगरा, भेलूपुर और शिवपुर थानों में शिकायत दर्ज हुई है। वहीं, ग्रामीण इलाकों की बात करें तो बालिकाओं से जुड़े अपराधों में बड़ागांव, चोलापुर और रोहनिया में सर्वाधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं।
बताया जा रहा है कि जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में स्थित विशेष पॉक्सो कोर्ट में लगभग 3000 मामले लंबित हैं। इनमें कुछ मामले 2 से 3 वर्ष पुराने हैं और इन मामलों में दोष सिद्धि की दर 30% के आसपास है। बताया जा रहा है कि ज्यादातर ऐसे मामलों में गवाह मुकर जा रहे हैं या समझौते के दबाव में अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ जा रहा है। इसके साथ ही अधिकांश मामलों में मेडिकल रिपोर्ट का लंबित रहना और चार्ज शीट दाखिल होने में देरी से इसका ट्रायल प्रभावित होता है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह ने बताया है कि पॉक्सो से जुड़े मामलों में ठोस पैरवी भी की जा रही है। उन्होंने बताया है कि कुछ ऐसे मामले भी हैं जिनमें अदालत ने काफी कम समय में फैसला सुनाया हैं। उन्होंने बताया कि गवाहों का मौजूद नहीं रहना, साक्ष्य देर से मिलना और फॉरेंसिक रिपोर्ट ऐसे कारण है जिसमें ज्यादातर मामलों में उनकी कमी पाए जाने की वजह से मामले लंबित रह जाते हैं। उन्होंने बताया है कि अदालत में प्रतिदिन एक से दो मामले पॉक्सो के दर्ज हो रहे हैं।
Updated on:
23 May 2026 07:55 am
Published on:
23 May 2026 07:55 am
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