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BHU में पीपल-बरगद पर धागा बांधने का विवाद: सामने आया विद्वत परिषद का बयान, बताया सनातन में क्या है पेड़ों का महत्त्व

Varanasi news : BHU परिसर के भीतर मौजूद बरगद और पीपल के पेड़ों पर धागा बांधने और दीपक जलाने को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच काशी विद्वत परिषद के प्रोफेसर विनय पांडे ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

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Banaras Hindu University

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वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में पीपल और बरगद के पेड़ों पर धागा बांधने और दीपक जलाने को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच काशी विद्वत परिषद ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है। विद्वत परिषद ने बताया है कि सनातन में हर चीज का एक अपना महत्व है, इसी वजह से इन पेड़ों की पूजा करना सनातन की परंपरा है। विद्वत परिषद के विद्वान ने बताया है कि इस पर रोक लगाए जाने को लेकर जिस प्रकार का तर्क दिया गया है, वह व्यक्तिगत हो सकता है।

इन पेड़ों में भगवान का वास

काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर के भीतर मौजूद बरगद और पीपल के पेड़ों पर धागा बांधने और दीपक जलाने को लेकर शुरू हुए विवाद के बीच काशी विद्वत परिषद के प्रोफेसर विनय पांडे ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने बताया कि पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु और बरगद के पेड़ में भगवान शिव का वास होता है। उसी प्रकार पाकड़ के पेड़ में भगवान ब्रह्मा का वास होता है। इसी वजह से सनातन में इन पेड़ों का विशेष महत्व है और लोग इनकी पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि इन वृक्षों की पूजा करने मात्र से ही इंसान की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इसीलिए शास्त्रों में इन्हें संरक्षित करने का वर्णन है।

उन्होंने बताया, "इन पेड़ों में जो धागा लपेट जाता है, वह कच्चे सूत का होता है और कच्चा सूत इतना मुलायम होता है कि अगर उसे सही से ना खोला जाए तो वह आसानी से टूट जाता है। इतने नाजुक धागों को यदि इन पेड़ों में लपेटा जाता है तो मुझे नहीं लगता कि वह इन पेड़ों को कोई नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, जिन्होंने भी यह पत्र लिखकर इन पेड़ों की पूजा को रोकने की मांग की है, मुझे उनका तर्क नहीं समझ में आया।"

प्रोफेसर विनय पांडे ने बताया कि सनातन धर्म में पशु, पक्षी इंसान, पेड़-पौधे सभी चीजों की पूजा होती है। लोगों की अलग-अलग चीजों पर अलग-अलग आस्था है। यही वजह है कि सनातन में सभी चीजों को पूजा जाता है और सिर्फ इनकी पूजा ही नहीं होती बल्कि इन्हें संरक्षित रखने का संकल्प भी लिया जाता है। उन्होंने बताया है कि सनातन में किसी भी चीज को नष्ट करने की परंपरा नहीं है। सनातन हमेशा ही चीजों को संरक्षित रखने पर जोर देता है, इसीलिए पीपल या बरगद के पेड़ की पूजा करने से उन्हें किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंच सकता। यह सभी आरोप निराधार हैं।

क्या है मामला

दरअसल, केंद्रीय कार्यालय के विशिष्ट निधि अनुभाग के आशीष कुमार ने कुलपति को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि कैंपस में स्थित पीपल और बरगद के पेड़ पर्यावरण संरक्षण एवं ऑक्सीजन उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन कुछ लोग धार्मिक मान्यता से इन पेड़ों पर धागा बांधते हैं और दिये जलाते हैं, जिससे पेड़ को गंभीर क्षति पहुंचती है। आशीष कुमार ने तर्क दिया है कि पेड़ों पर बांधे जाने वाला धागा पेड़ की छाल में घुस जाता है और इसकी वृद्धि को रोक देता है। इसके साथ ही पेड़ों को संक्रमण का खतरा भी उत्पन्न हो जाता है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि दीया जलाने से भी वायु प्रदूषण होता है और वैज्ञानिक रूप से इन पेड़ों की आयु एवं स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है। इस पत्र के बाद मामले को लेकर लोगों ने तरह तरह की प्रतिक्रिया दी है।

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