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शिक्षण संस्थानों में थोपी जा रही RSS की विचारधारा: BHU में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ सवाल पर अजय राय

Politics news: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में इतिहास विभाग के परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र में 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता' को लेकर पूछे गए सवाल पर नाराजगी व्यक्त की है।

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UP Congress President Ajay Rai

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय। PC: IANS

वाराणसी: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में इतिहास विभाग के परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र में 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता' को लेकर पूछे गए सवाल पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने बताया है कि इस तरह के सवाल समाज को बांटने का काम करते हैं। उन्होंने कहा है कि आरएसएस की विचारधारा को शिक्षण संस्थानों में जबरदस्ती थोपा जा रहा है।

शिक्षण संस्थानों में नफरत नहीं फैलानी चाहिए: राय

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एमए इतिहास विभाग के चतुर्थ सेमेस्टर में पूछे गए सवाल 'ब्राह्मणवादी पितृ सत्ता से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस तरह ब्राह्मणवादी पितृ सत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली?' को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे RSS की विचारधारा बताते हुए शिक्षण संस्थानों पर जबरदस्ती थोपे जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि शिक्षण संस्थानों को नफरत और विभाजन की राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।

ब्राह्मण समाज हमेशा से पूजनीय था है और रहेगा: राय

अजय राय ने कहा है कि इस तरह के शब्दों का जिस प्रकार प्रश्न के रूप में उपयोग किया गया है उसने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा है कि शिक्षा का उद्देश्य किसी जाति, वर्ग या समुदाय के प्रति दुर्भावना पैदा करना नहीं, बल्कि समाज को ज्ञान, संवेदनशीलता और एकता के सूत्र में पीरोना है। अजय राय ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में ब्राह्मण समाज सदैव ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक रहा है। वेदों, उपनिषदों, भारतीय दर्शन, संस्कृत, साहित्य और शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में ब्राह्मण समाज का ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज सदैव ही पूजनीय था है और रहेगा।

राय ने कहा है कि विश्वविद्यालय, कॉलेज और भर्ती परीक्षाओं में ऐसे प्रश्न और विषय शामिल किया जा रहे हैं जो समाज के भीतर जातीय तनाव और विरोधाभास पैदा कर रहे हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश में दारोगा भर्ती परीक्षा में ब्राह्मण समाज को अवसरवादी बताने वाला प्रश्न पूछा गया था। वहीं 'घूसखोर पंडत' फिल्म के जरिए भी पूरे वर्ग को अपमानित करने का प्रयास किया गया, जिसका विरोध किया गया था। अब काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इस प्रकार के प्रश्न शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सवाल

दरअसल, यह सवाल एमए इतिहास के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछा गया था। बताया जा रहा है कि यह सवाल आधुनिक भारत और महिलाएं विषय के चौथे प्रश्न पत्र में पूछा गया। वहीं, परीक्षा खत्म होने के बाद यह सवाल तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। लोगों ने सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया दी है