
तुलसी और हल्दी
वाराणसी. घर-आंगन में पायी जाने वाली तुलसी और किचन में इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी से मुंह के कैंसर का इलाज भी हो सकता है। बीएचयू की फैकल्टी ऑफ डेंटल साईंस के डॉक्टरों ने तंबाकू और गुटखा से होने वाले माउथ कैंसर के इलाज और इसकी रोकथाम के देसी इलाज का दावा किया है। शुरुआती लक्षणों में ही यह देसी इलाज कारगर साबित हो सकता है। डॉक्टरों की टीम ने इसपर शोध कर पाया है कि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन कैंसर रोकने में भी मददगार साबित हुआ है तो तुलसी इस रोग में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है। डेंटल कौंसिल ऑफ इंडिया ने भी बीएचयू के इस शोध अध्ययन को मान्यता दे दी है।
वैसे तो तुलसी और हल्दी में कुदरती आयुर्वेदिक गुण होते ही हैं मगर इसमें कैंसर रोकने वाले महत्वपूर्ण एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व भी होते हैं। तुलसी इस रोग में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है। मैग्नेशियम, पोटैशियम, आयरन, विटमिन बी सिक्स, ओमेगा थ्री, ओमेगा सिक्स फैटी ऐसिड और ऐंटिसेप्टिक गुणों से भरपूर हल्दी नैचुरल हीलर है। डॉक्टरों का दावा है कि इसमें मौजूद करक्यूमिन कैंसर रोकने में मददगार साबित हुआ है। तुलसी और हल्दी दोनों आयुर्वेदिक औषधियों असानी से उपलब्ध भी हैं।
इस शोध टीम के इंचार्ज प्रो टीपी चतुर्वेदी की मानें तो उनकी टीम ने करीब 50 मरीज़ों पर इसको लेकर गहन शोध किया। उनकी टीम ने पाया कि तुलसी के विशिष्ठ गुणों का उपयोग ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस, जो आगे चलकर मुख कैंसर बन जाता है, के इलाज में भी किया जा सकेगा। जबकि तुलसी इस रोग में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है।
ऐसे होता है इलाज
हल्दी और तुलसी की पत्तियों को पीसकर उनका पाउडर बना लिया जाता है। इस पाउडर को ग्लिसरीन के साथ मिलाकर लगाया जाता है। इसके लिये सबसे पहली शर्त ये है कि मरीज़ को तम्बाकू और गुटखा का सेवन छोड़ना पड़ता है। प्रो टीपी चतुर्वेदी कहते हैं कि गुटखा के सेवन करने के चलते भारतीय युवाओं में यह माउथ कैंसर सबसे ज़्यादा होता है। वो बताते हैं कि गुटखा खाने से मांसपेशियों का लचीलापन खत्म हो जाता है और धीरे धीरे मुंह का खुलना भी कम हो जाता है।
Published on:
21 May 2020 03:40 pm
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