
Akhilesh Yadav and Shivpal Yadav
वाराणसी. सपा में बिखराव शुरू हो गया है। पार्टी से शिवपाल यादव के अलग होते ही सपा कमजोर होने लगी है। अखिलेश सरकार में मंत्री रहे दो नेता को शिवपाल यादव ने समाजवादी सेक्लुयर मोर्चा का प्रवक्ता तक बना दिया है। बड़ा सवाल है कि शिवपाल व अखिलेश में 12 प्रतिशत वोटों का भाग्य कौन तय करेगा। यह नेता जिसके साथ रहेगा। वही इन वोटों का बड़ा प्रतिशत ले पायेगा।
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यादव बंधुओं को सपा का कैडर वोटर माना जाता है। यूपी में अनुमान के मुताबित १२ प्रतिशत यादव है। यादव के साथ 20 प्रतिशत मुस्लिम व अन्य जाति के वोट जुड़ जाते हैं तो सपा बहुमत में आ जाती है। यूपी में मुलायम सिंह यादव को यादव वर्ग का सबसे बड़ा नेता माना जाता है। यूपी चुनाव 2017 में मुलायम सिंह यादव ने सपा के लिए अधिक प्रचार नहीं किया था नतीजा हुआ कि सपा इतने कम सीट पर सिमट गयी है। सपा में मुलायम सिंह यादव के बाद शिवपाल व अखिलेश यादव थे लेकिन अब शिवपाल यादव ने अपना मोर्चा बना लिया है और रैली कर ताकत भी दिखाने लगे हैं। शिवपाल यादव ने मीडिया के सामने ही कहा है कि मुलायम सिंह यादव उनके लिए सब कुछ है और नेता जी के ही आशीर्वाद से नया मोर्चा बनाया है। मुलायम सिंह यादव की राजनीति में सक्रियता बहुत कम हो गयी है उन्होंने नया मोर्चा बनाने के बाद शिवपाल यादव को मनाने की बात कही थी लेकिन शिवपाल नहीं माने।
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मुलायम को मिलेगा जिसका साथ, वही यादव वोटर का होगा मालिक
युवाओं में अखिलेश यादव को लेकर क्रेज है लेकिन पुराने समाजवादी आज भी मुलायम सिंह यादव को ही अपना नेता मानते हैं। पुराने समाजवादियों ने यह तक कहा है कि शिवपाल यादव के अलग हो जाने से बहुत अंतर नहीं आयेगा। मुलायम सिंह यादव ने अगर सपा को छोड़ दिया तो अखिलेश यादव को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। शिवपाल यादव भी चाहते हैं कि किसी तरह मुलायम सिंह यादव उनके साथ आ जाये।
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शिवपाल के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं अमर सिंह
सपा से अमर सिंह को निकाल दिया गया है इसके बाद वह लगातार मुलायम सिंह यादव के परिवार पर हमला बोलते रहते हैं। अमर सिंह के निशाने पर अखिलेश यादव ही रहते हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में अमर सिंह बीजेपी में शामिल होना चाहते है। अमर सिंह हमेशा ही पीएम मोदी व सीएम योगी की तारीफ करते रहते हैं। सूत्रों की माने तो बीजेपी अमर सिंह का सहयोग ले सकती है। बीजेपी चाहती है कि शिवपाल यादव व अमर सिंह अपने साथ मुलायम सिंह यादव को ले आये। यदि ऐसा हो जाता है तो राहुल गांधी, अखिलेश यादव व मायावती के महागठबंधन को पटखनी देना आसान हो जायेगा।
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Published on:
13 Sept 2018 02:43 pm
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