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डीएम साहब एक नजर इधर भी, कलेक्ट्रेट और कचहरी की पूरी चौहद्दी सरकारी अतिक्रमण की जद में, रास्ता चलना दूभर

जिला प्रशासन चला रहा अतिक्रमण विरोधी अभियान पर कलेक्ट्रेट ही अतिक्रमण की जद में। गोलघर से कलेक्ट्रेट, कचहरी पहुंचना मुश्किल। ये अतिक्रमण वैध भी है क्योंकि नगर निगम ने इसका ठेका दे रखा है। जनता परेशान ही नहीं गुस्से में भी है।

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कलक्ट्रेट कचहरी की चौहद्दी पर नगर निगम का अतिक्रमण

कलक्ट्रेट कचहरी की चौहद्दी पर नगर निगम का अतिक्रमण

वाराणसी. जिला प्रशासन ने शहर को संवारने के लिए अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया है। इसकी शुरूआत शहर के पूर्वी छोर सामनेघाट-लंका क्षेत्र से हुई है। लेकिन प्रशासन को अपनी चौहद्दी नहीं दिखती जहां जाना मुश्किल है। कलेक्ट्रेट और कचहरी की पूरी चौहद्दी अतिक्रमण की जद में है। कलेक्ट्रेट व कचहरी के अंदर घुसना टेढी खीर है। अव्वल तो यह कि यह अतिक्रमण सरकारी है, इसके लिए नगर निगम ने ठेका दे रखा है। कचहरी के तीन तरफ का इलाका वाहन स्टैंड से घिरा है। गोलघर से कचहरी-पुलिस लाइन जाने वाले मार्ग की एक लेन पूरी तरह से नगर निगम के ठेकेदारों के कब्जे में है।

बता दें कि जिला प्रशासन अगले महीने होने वाले अप्रवासी सम्मेलन के लिए शहर को साफ-सुंदर बनाने में जुटा है। इसके तहत ही अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया गया है। इस बार अभियान का आगाज सामनेघाट-लंका इलाके से हुआ। अब लोगों का कहना है कि आम आदमी का अतिक्रमण तो जिला प्रशासन को दिख जाता है। लेकिन सरकारी अतिक्रमण पर किसी का ध्यान नहीं जाता है।

आलम यह है कि नगर निगम ने जहां-तहां लबे सड़क वाहन स्टैंड का ठेका जारी कर दिया है। नतीजा यह है कि सड़क पर चलना ही दूभर हो गया है। खास तौर पर गोलघर स्थित अम्बेडकर पार्क से आगे बढ़ते ही बाईं लेन पर नगर निगम का वाहन स्टैंड शुरू हो जाता है। अब बनारस क्लब से कचहरी होते विकास भवन तक यही हाल है। इस मार्ग से आना-जाना आसान नहीं। कचहरी आने-जाने वालों से रोजाना ठेकेदारों की किचकिच हो रही है। अब वाहन स्टैंड है तो बगल में ठेला खोमचा भी लगा है लेकिन यह किसी को नहीं दिखता।

कचहरी से विकास भवन, सर्किट हाउस की ओर जाने वाले मार्ग पर तो दोनों ही लेन पर कब्जा है। विकास भवन में प्रवेश करना भी मुश्किल हैं। एक तरफ विकास भवन की चहारदीवार के बाहर वाहन स्टैंड है तो दूसरी लेन में कमिश्नरी कमंपाउंड की चहारदीवारी से सटे भी यही हाल है। वहां चार पहिया वाहनों की कतार लगी हुई है। इसके आगे बढ़ें तो कलेक्ट्रेट की चहारदीवारी से सटे भी यही हाल है। दो पहिया वाहनों के चलते एक लेन पर आधी स़ड़क तक कब्जा है।

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय, यूपी बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय, पुलिस लाइन, भारतीय स्टेट बैंक की रिजनल शाखा सब इसी रास्ते पर है, लेकिन लोगों को इन दफ्तरों में जाने के लिए घंटों मशक्कत करनी होती है।

अगर गोलघर से कमिश्नर आवास की ओर जाएं तो उद्यान विभाग की चहारदीवार से सटे अस्थाई दुकानें सज गई हैं। कहीं कंबल बिक रहा तो कहीं फल बिक रहा है। ठेला-खोमचा लगा है सो अलग।

अब अधिवक्ता श्यमान नारायण सिंह, अभिमन्यू प्रताप नारायण सिंह, अनिरुद्ध शंकर शर्मा, लोकेश उपाध्याय आदि का कहना है कि दूर दराज से आने वाले मुवक्किल तो समझ ही नहीं पाते कि कचहरी में प्रवेश किधर से करें। मेन गेट तक दिखता ही नहीं है इन वाहन स्टैंड के चलते। पूरी सड़क पर कब्जा है इन ठेकेदारों का। अधिवक्ताओं ने कहा कि अतिक्रमण हटाना अच्छा है। इस पर सख्ती से काम होना चाहिए पर पहले सरकारी अतिक्रमण भी तो हटना चाहिए। कहा कि मैदागिन से शव वाहनों को हटाया गया ठीक है, लेकिन कचहरी को भी तो अतिक्रमण मुक्त किया जाए।