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सीएम योगी आदित्यनाथ नहीं अखिलेश यादव को देना होगा बड़ा इम्तिहान

चुनाव परिणाम ही तय करेगा पार्टी का भविष्य, जानिए क्या है कहानी

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CM Yogi Adityanath and Akhilesh Yadav

CM Yogi Adityanath and Akhilesh Yadav

वाराणसी. यूपी में होने वाले नगर निगम चुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ से बड़ी परीक्षा अखिलेश यादव की होगी। यूपी की सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी के कार्यकाल का पहला चुनाव होगा। बीजेपी प्रत्याशियों की हार व जीत से सीएम योगी के कार्यकाल की समीक्षा होना तय है। इससे अधिक चर्चा सपा के हार व जीत की होगी।
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सपा के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के कार्यकाल में पहला चुनाव वर्ष २०१४ में हुआ था। संसदीय चुनाव में सपा को मात्र चार सीट मिली थी, जिसमे एक आजमगढ़ संसदीय सीट शामिल है। इसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव हुआ था जिसमे सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। इस चुनाव को अखिलेश यादव के कार्यकाल पर जनता की राय माना गया था और इस चुनाव में भी सपा को करारी शिकस्त मिली थी पहली बार सपा मात्र ४७ सीट पर सिमट कर रह गयी थी। इसके बाद अब नगर निगम का चुनाव होने वाला है। अब देखना है कि सपा की क्या स्थिति होती है। सपा को पहले से अधिक सीट मिलती है तो अखिलेश यादव को ताकत मिलनी तय है। यदि सपा को पहले से कम सीट मिलती है तो अखिलेश यादव को नेतृत्व में सवाल उठने लगेंगे, जो सपा के भविष्य के लिए सही नहीं होगा।
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सपा के लिए पूर्वांचल है बेहद खास
सपा जब भी पूर्वांचल से कमजोर होती है तो यूपी की सत्ता से पार्टी को बाहर होना पड़ता है। पूर्वांचल के नगर निगम व नगर पालिका परिषद में सपा को फिर से अपनी खोयी ताकत पाने का मौका मिला है। सीएम योगी सरकार के कार्यकाल को छह माह से अधिक का समय बीत गया है। यूपी सरकार से लोगों में नाराजगी भी है और खुशी भी। नगर निगम चुनाव में बीजेपी की स्थिति सबसे मजबूत रहती है इसलिए यूपी में बीजेपी सरकार के बाद सबको उम्मीद है कि पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। पार्टी खराब प्रदर्शन करती है तो सीएम योगी के कार्यकाल पर भी सवाल उठना तय हैं।
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शिवपाल यादव भी कर रहे मौके का इंतजार
अखिलेश यादव के परिवार में कलह अब थम चुकी है, लेकिन शिवपाल यादव व अखिलेश यादव के बीच की दूरी अभी खत्म नहीं हुई है। पूर्वांचल के चुनाव में सपा को हार मिलती है तो शिवपाल यादव की ताकत बढऩा तय है और फिर अखिलेश यादव की रणनीति ही सवालों के घेरे में आ जायेगी। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि सीएम योगी से अधिक महत्वपूर्ण अखिलेश यादव के लिए यह चुनाव है। सीएम योगी पहली बार परीक्षा देंगे तो अखिलेश यादव का तीसरा इम्तिहान होगा।
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