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…तो इस बार लोकसभा चुनाव में मुसलमान नहीं होगा किंग मेकर !

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस रहित सपा-बसपा गठबंधन से मुस्लिम मतों का विभाजन तय है।

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Muslim voter

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डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. आगामी लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को सत्ता से बाहर करने की विपक्ष की मौजूदा रणनीति से मतदाताओं के उलझन में आने के आसार बढ रहे हैं। खास तौर पर मुस्लिम मतदाता। वह भी यूपी में। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान जो हालात बने और जिस तरह से कांग्रेस ने काफी हद तक अकेले दम पर तीनों विधानसभा में फतह हासिल की और उसके बाद जिस तरह से कांग्रेस हाईकमान का रुख है, उससे जो तस्वीर सामने आ रही है उसके तहत यूपी में सपा-बसपा और कांग्रेस के बीच तालमेल नहीं होगा। अगर ऐसा होता है तो सबसे ज्यादा प्रभावित होगा मुस्लिम मतदाता। ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानन है। वो कहते हैं कि मौजूदा स्थिति में मुस्लिम मतों का बिखराव होना तय है।


ये वही मुस्लिम समाज है जिसकी अब तक हर चुनाव में किसी की भी हार या जीत में निर्णायक भूमिका रहती आई है।इसीलिए इन्हें किंग मेकर कहा जाता है। लेकिन यह पहली बार है जब इस बड़े वोटबैंक को जबरदस्त झटका लगाता दिख रहा है। वैसे इसके लिए राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के साथ सपा-बसपा नेतृत्व को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा को उसी की रणनीति से पटखनी देने की कांग्रेस नेतृत्व की हालिया रणनीति ने उसे भी परंपरागत वोटैबंक से अलग करता दिख रहा है तो सपा-बसपा नेतृत्व की अति महत्वाकांक्षा भी एक बड़ा कारण बन रही है। लेकिन ऐसा होता है तो यूपी की 20 फीसदी मुस्लिम आबादी का मत बिखरना तय है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यूपी में सपा-बसपा के साथ न आ कर कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव में उतरती है तोमुसलमानों का वोट बट सकता है। उनका कहना है कि यूपी में 20 फीसदी मुसलमानों का 20-25 फीसदी वोट सपा-बसपा के संभावित गठबंधन से छिन सकता है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में 20 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है जो लोकसभा चुनाव में परंपरागत रूप से कांग्रेस के साथ ही जाते हैं। वहीं विधानसभा में इन मुसलमान मतों का बंटवारा सपा,बसपा और कांग्रेस के बीच होता है। वैसे पिछले तीन दशक की बात करें तो यूपी में मुसलमान सपा या बसपा के ही झोली में जाया करता रहा है। कारण गत 28-29 साल से यूपी में कांग्रेस सियासी हाशिये पर है। लेकिन लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस और भाजपा में सीधी जंग होती है तो वो कांग्रेस के ही पक्ष में जाते हैं। अब जबकि सपा-बसपा, कांग्रेस से अलग होंगे तो यह भ्रम की स्थिति बनेगी।

वैसे सूत्रों की मानें तो इस बात को बसपा सुप्रीमों भली भांति समझ रही हैं और अप्रत्यक्ष तौयूपर पर वह सीधे कांग्रेस हाईकमान से वार्ता कर यूपी में कांग्रेस और बसपा का गठबंधन कराने के फिराक में हैं। वैसे सपा भी अंदरखाने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने लगी है। सपा के एक उच्च पदस्थ सूत्र पर विश्वास करें तो पार्टी के बड़े नेता ने दस जनपथ संदेशा भेजा था कि गठबंधन में सीटें तय करने के लिए बसपा सुप्रीमों से राहुल गांधी की मीटिंग का समय निर्धारित हो जाय। लेकिन इसमें मायूसी ही हाथ लगी और कांग्रेस का संदेशा आया कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर से मायावती बात कर लें। ऐसे में इन दलों के बीच तालमेल का किस करवट बैठेगा अभी कुछ कहना मुश्किल है पर आपसी ईगो के चलते भाजपा विरोधी दलों के बीच कोई बेहतर सामंजस्य नहीं बन सका तो मुस्लिम वोट बैंक एक तरफा न होकर बिखराव का शिकार हो सकता है।

वैसे भी 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक की स्थित जो सामने दिख रही है उसमें मुस्लिम समाज सियासत के हाशिये पर ही नजर आ रहा है। यही कारण रहा कि पिछले पांच राज्यों के चुनाव में ध्रुवीकरण के माहौल का सफाया होता नजर आया। अब तो यह भी कयास लगाया जा रहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में धर्म की नहीं बल्कि जाति कि हवा चलेगी। यही कारण है कि जातिवाद के लिए सबसे ज्यादा बदनाम यूपी पर सबकी निगाहें टिकी हैं। सबसे ज्यादा सीटों वाला यूपी ही दिल्ली की कुर्सी तय करता रहा है.

ऐसे में बसपा सुप्रीमो मायावती राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सिवा गठबंधन के संबंध में किसी से बात भी करने को तैयार नहीं हैं। उधर राहुल गांधी अभी बात करने के मूड में नहीं है जिससे मामला लटक गया है।.इस बीचख़बरें ये भी आ रही हैं कि सीटों का तालमेल नहीं हो पाया तो कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन प्लान बी पर भी काम कर सकते हैं। इसके तहत.यहां नूरा कुश्ती (फ्रेंडली फाइट) हो सकती है। कुछ सीटों पर कांगेस को जिताने के लिए सपा-बसपा के डमी कैंडिडेट उतरेंगे तो बाकी सीटों पर कांग्रेस की भूमिका वोट कटवा की होगी। कांग्रेस भी भाजपा की शिकस्त के लिए यूपी में वोट कटवा की छोटी पर अहम भूमिका के लिए राजी हो सकती है।