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Nagpanchami 2022: काशी के नागकूप में स्नान और पूजन से मिलती है काल सर्प दोष से मुक्ति, यहीं हैं छोटे गुरु और बड़े गुरू

Nagpanchami 2022: काशी के जैतपुरा क्षेत्र स्तिथ नवापुरा मोहल्ले में है प्राचीन नागकूप। नागपंचमी को यहां काशी ही नहीं वरन दूरदराज से श्रद्धालुओं का आगमन होता है। मान्यता है कि इस प्राचीन नागकूप (कुंड) में स्नान करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। पवित्र कुंड का जल घर में 21 दिन रखने, छिडकाव, स्नान व आचमन से हर तरह के कष्टों से मुक्ति भी मिलती है। ये महर्षि पांचजलि की है तपोस्थली भी है। महर्षि पाणिणी ही बड़े गुरु और पतंजलि हैं छोटे गुरु हैं।

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काशी का प्रसिद्ध नागकूप मंदिर

काशी का प्रसिद्ध नागकूप मंदिर

वाराणसी. Nagpanchami 2022 श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि को काशी में नाग देवता की खास पूजा की परंपरा है। काशी में नागपंची का पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। काशी के प्राचीन नागकूप में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। मान्यता है कि इस कूप में माला-फूल, दूध, लावा चढाने और स्नान करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। मान्यता ये भी है कि यह महर्षि पतंजलि की है तपोस्थली। ऐसे में यहां हर साल नागपंचमी को काशी ही नहीं अपितु आस-पास के जिलों के श्रद्दालु आते हैं और स्नान करते हैं, फिर पवित्र कुंड में जल, दूध, धान का लावा आदि चढाते हैं। कुंड के ऊपर है नाग देवता का मंदिर भी है जहां श्रद्धालु पूजन-अर्चन करते हैं।

नवापुरा, जैतपुरा मोहल्ले में है नागकूप व मंदिर

नागकूप नवापुरा, जैतपुरा मोहल्ले में स्थित है। नागपंचमी के दिन कुंड में स्नान, पूजन को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। आस पास के इलाकों में तुलसी की माला, बिल्व पत्र, दूध और लावा की दुकानें सज जाती हैं।

यहीं महर्षि पाणिनी ने पतंजलि को दी थी शिक्षा

इस नागकूप के महंत का कहना है कि यह गुरु पतंजलि की तपोस्थली है। मान्यता है कि नाग स्वरूप महर्षि पाणिनी ने यहीं पतंजलि को शिक्षा दी थी। पाणिनी प्रकांड व्याकरणाचार्य रहे। इसीलिए पाणिनी को बड़े गुरु और पतंजलि को छोटे गुरु की मान्यता प्राप्त है। आज के दिन यानी नागपंचमी को इन दोनों की पूजा की जाती है।

नाग कूप में तुलसी की माला या तुलसी दल चढ़ाने का विशेष महत्व

महंत का कहना है कि इस प्राचीन कुंड में है नागेश्वर महादेव का शिवलिंग है। नागदेवता को तुलसी की माला प्रिय है, ऐसे में इस कूप में तुलसी की माला चढाई जाती है। दूध और लावा नागदेवता के भोज्य पदार्थ के रूप में चढाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन नाग कूप (कुंड) में स्नान करने का भी मान्यता है कुंड में स्नान करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही भक्तजन कुंड का जल अपने साथ घर जाते हैं और हर कमरे में जल का छिड़काव किया जाता है। मान्यता यह भी है कि लगातार 21 दिन तक इस कुंड के जल से स्नान, आचमन करने से काल सर्प दोष से तो मुक्ति मिलती ही है साथ ही हर तरह की भय-बाधा से भी मुक्ति मिलती है।

घर-घर पूजे जाएंगे नाग देव

नागकूप के अलावा घर-घर में नाग की तस्वीर दरवाजों पर दीवारों पर लगाई जाती हैं। महिलाएं पूजन स्थल को साफ सुथरा कर नाग देव की तस्वीर चिपकाती हैं और दूध लावा चढा कर पूजन-अर्चन करती हैं। नागपंचमी पर इस नाग कूप में भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो जाता है। जैसे-जैसे दिन चढता है श्रद्धालुओं की भीड़ बढती जाती है।