23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अजब-गजब : वाराणसी में एक पिता के 48 बच्चे, वोटर लिस्ट में नाम, फिर भी नहीं दे पाए मतदान, जानिए वजह

वाराणसी के शंकुलधारा वार्ड नंबर 51 की मतदाता सूची में बड़ी गलती सामने आई है। सूची के मुताबिक, एक महंत को 48 लोगों का पिता बना दिया गया है।

2 min read
Google source verification
Nikay chunav 48 children of one father in Varanasi

वाराणसी में वार्ड नंबर 51 की मतदाता सूची में बड़ी गलती सामने आई है। 48 लोगों के पिता का नाम एक ही है।

नगर निकाय चुनाव में वाराणसी नगर निगम सुबह से ही वोटर लिस्ट में नाम होने की शिकायतों से जूझता रहा, लेकिन शहर के भेलूपुर जोन के शंकुलधारा वार्ड नंबर 51 में एक पिता के 48 बच्चों का नाम छपा मिला। इस लिस्ट को देख लोग हैरान रह गए। जांच हुई तो पता चला कि पिता राम कमलदास तो ब्रह्मचारी हैं और एक मठ के महंत हैं और ये 48 बच्चे उनके शिष्य हैं।

एक पिता के 48 बच्चे
वार्ड नंबर 51 शंकुलधारा की लिस्ट में क्रम संख्या 243 से 284 तक जब पिता का नाम देखा गया तो सभी में राम कमल दास लिखा मिला। ये सभी 48 बच्चों की लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुई तो चर्चा का विषय बनी और मीडिया ने पिता की तलाश शुरू कर दी।

अमेरिका में हैं रामकमल दास
पता करने पर जानकारी हुई कि राम कमल दास वेदांती जी महाराज खोजवां के एक राम मंदिर में गुरुदीक्षा करते हैं। राम मंदिर के सचिव पंडित राम भरत शास्त्री राम कमल दास वेदांती जी महाराज इस समय अमेरिका में है। ये सभी 48 नाम उनके शिष्यों के हैं। जिन्हे 1994 में वोटर लिस्ट से जोड़ दिया गया था और अब इनमे से कोई भी यहां नहीं रहता और सबकी उम्र 60 साल से अधिक है।

मठ में गुरु ही होते हैं पिता
रामकमल दास जी के शिष्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मठों में गुरु ही हमारे पिता होते हैं। ऐसे में जब वोटर लिस्ट में नाम अंकित किया गया होगा तो सभी के नाम के आगे गुरूजी का नाम पिता के नाम की जगह पर छाप दिया गया है।

बड़ी लापरवाही
पोलिंग एजेंट्स की मानें तो यह बड़ी लापरवाही है। जहां हजारों लोगों का नाम वोटर लिस्ट से गायब है। वहां 48 नाम ऐसे भी मौजूद हैं जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं और ये नाम किन परिस्थितियों में जोड़े गए यह भी यक्ष प्रश्न है क्योंकि कोई भी व्यक्ति जिस जिले में पढ़ रहा वह उस जिले का वोटर कदापि नहीं बन सकता यदि वह उसका गृहनगर नहीं है। ऐसे में इसे बड़ी लापरवाही मना जा रहा है।