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उधार के पैसे से वाटर फिल्टर का शुरू किया था बिजनेस, आज है करोड़ों का कारोबार

मां की मौत से हुआ डिस्टर्ब, पिता को बिना बताए शुरू किया बिजनेस

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Nitish

निशांत

वाराणसी. अगर दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो रास्ते में आने वाली तमाम कठिनाई अपने आप पीछे छूट जाती हैं। ऐसे ही एक शख्स के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जो कई बाधाओं को पीछे छोड़ने के बाद आज तीन रेस्टोरेंट के मालिक हैं और 10 लाख से ज्यादा मंथली इनकम है। ये शख्स मात्र 17 साल में एक आइडिया से सक्सेस को छू लिया है। उधार लेकर 8 साल पहले बिजनेस शुरू किया था।

मां की मौत से हुआ डिस्टर्ब, पिता को बिना बताए शुरू किया बिजनेस
बचपन से तेज तर्रार दिमाग वाला निशांत मां के मौत के बाद डिस्टर्ब हो गया था। उस समय निशांत 12वीं में था। परिवार की जिम्मेदारियों ने उसके हौसले को कम नहीं होने दिया। निशांत ने 8 साल पहले उधार से बिजनेस शुरू किया। निशांत मां की मौत के बाद मैं पूरी तरह डिस्टर्ब हो गया। किसी तरह से इंटर की पढ़ाई पूरी की। घर में मन न लगने पर इलाहाबाद आ गया और एक रिश्तेदार के यहां रहने लगा। यहीं से निशांत ने दोस्त दीपक के साथ बिजनेस स्टार्ट करने का सोचा। निशांत ने अपने पाप को बिना बताए एक परिचित किराना कारोबारी से 3 क्विंटल मैदा और नूडल्स बनाने की मशीन उधार ली। दोस्त दीपक के साथ मिलकर 3 क्विंटल नूडल्स बनाई। पैकिंग के बाद मार्केट में बेचने गए तो दुकानदारों ने लेने से मना कर दिया। 3 महीने तक कुछ नहीं हुआ और उधार देने वाले पैसे मांगने लगे। लेकिन उसके बाद भी निशांत ने हिम्मत नही हारी।

एक आईडिया से बिजनेस ने भरी रफ्तार
निशांत के पुरोहित राम जी पंडित ने उसे अपनी स्कूटर दी और कहा कि जाओ इससे नूडल्स की सप्लाई करो। तभी आइडिया आया कि नूडल्स का 10 kg का पैकेट उस वक्त 350 रुपए में बिक रहा था, हम 9.5 KG के पैकेट को 300 में सेल करें। इस आइडिया से सप्लाई शुरू की। कौशांबी से लेकर इलाहाबाद की मार्केट में हमारी नूडल्स बिकने लगी। निशांत ने सिर्फ 5 महीने में ही न केवल सारा उधार चुकाया, बल्कि फाफामऊ, शाहगंज और बेनीगंज में 3 मॉडल की फैक्ट्री लगा ली है। कम मार्जिन में ज्यादा बिजनेस के आइडिया से सक्सेस मिलने लगी। साल 2011 में टर्नओवर तकरीबन 15 लाख तक पहुंच गया।

एक छोटी गलती ने चौपट कर दिया था बिजनेस
साल 2012 में सिविल लाइंस स्थित हीरा व्यापारी ध्रुव अग्रवाल की हत्या कर उनके शोरूम में करोड़ों की लूट हुई। आरोपी सफेद रंग की स्कार्पियो से पुराने शहर की ओर भागे। संयोग से निशांत भी अपने दोस्तों के साथ वाइट कलर की स्कार्पियो से जा रहा था तभी पुलिस ने उसे पकड़ लिया। गाड़ी की तलाशी ली गई तो उसके दोस्त के पास तमंचा मिल गया। पुलिस उसे थाने ले गई। 5 दिन बाद पुलिस ने उसके दोस्तों को अवैध असलहा रखने के आरोप मं जेल भेज दिया, लेकिन निशांत को क्लीन चिट मिल गई। घटना के बाद पिता निशांत को लेकर गांव बरगढ़ चले गए। इसकी वजह से उसका सारा बिजनेस चौपट हो गया।

एक बार फिर हासिल किया मुकाम
निशांत लगभग 6 महीने बाद दोबारा इलाहाबाद आया और अपनी बहन नेहा के साथ रहने लगा। वहीं पर एक्वा क्योर नाम से एक आरओ और वाटर फिल्टर के इंस्टालेशन का काम शुरु किया। इसी बीच डॉ. प्रवीण सिंह से मुलाकात हुई। इनके साथ मिलकर एक किराए की बिल्डिंग में सरस्वती नर्सिंग होम शुरू किया।


2014 में साथी मोहम्मद ताबिश के साथ मिलकर करीब 15 लाख रुपए की लागत से एक डीफाउंटेन नाम से रेस्टोरेंट खोला। कुछ महीनों के बाद निशांत अकेले ही रेस्टोरेंट चलाने लगे। इसके बाद दूसरा रेस्टोरेंट इंडस्ट्रियल एरिया नाम से फिर तीसरा हॉट स्टाफ के नाम से खोला। वर्तनाम में बिजनेस कर महीने का 10 लाख से ज्यादा कमाने लगा। आपको एक ऐसे शख्स से रूबरू करा रहा है, जिसने एक आईडिया से 17 साल की उम्र में ही सक्सेस को छू लिया था।

इंजीनियर की जगह बेटा बना बिजनेसमैन
चित्रकूट के मऊ निवासी निर्मल रस्तोगी, पत्नी मीरा की दो बेटियों निवेदिता और नेहा के बाद बेटा निशांत है। बचपन से ही निशांत हर बार क्लास में अव्वल आता रहा। माता-पिता बेटे को इंजीनियर बनाना चाहते थे। निशांत ने बताता, पापा ने पढ़ाई के लिए इलाहाबाद भेजा। 2010 में इंटर के एग्जाम से ठीक पहले मां की अचानक तबीयत बिगड़ गई। मां को इलाहाबाद लेकर गया। डॉक्टरों ने बताया- उनकी दोनों किडनी एवं लिवर डैमेज हो गई है। मां की हालत जान पिता कहीं टूट न जाएं, इसलिए उनको कुछ नहीं बताया। करीब 40 दिन तक कई हॉस्पिटल्स में दिखाया। 3 मार्च 2010 को मां की मौत हो गई।