ये है मध्यप्रदेश का भोपाल स्टेशन। यात्रियों को इंतजार है मालवा सुपर फास्ट एक्सप्रेस का। ट्रेन करीब 12 बजे प्लेटफार्म नंबर दो पर आ कर रुकती है। लंबी सी ट्रेन। ट्रेन स्टेशन पर रुकती है। यात्रियों का बड़ा झुंड जनरल बोगी तलाशने में जुटता है। कोई इंजन की ओर दौड़ता है तो कोई सबसे पीछे। एक के बाद एक बोगी निकलती जा रही है। एसी प्रथम, एसी द्वितीय, एसी तृतीय, पेंट्री कार। फिर शुरू होता है स्लीपर का क्रम शुरू होता है। एस-1 से शुरू हुआ सिलसिला एस-12 तक जाता है। इतनी लंबी फेहरिस्त के बीच जनरल कोच कहां है कुछ पता ही नहीं। अब जो यात्री ट्रेन के बीच में है वह इंजन की तरफ भागता है। एक डिब्बा है वहां। सब उसी में चढ़ने में जुट जाते हैं। देखते ही देखते इस बोगी का आलम यह कि इस बोगी में इंसान इस तरह से ठुंसे नजर आते हैं जैसे रेल की बोगी न हो कर मालगोदाम हो जिसमें इंसान को आलू के बोरे की तरह ठूंस दिया गया हो।