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नेक पहलः सरकारी स्कूल देंगे पर्यावरण संरक्षण का संदेश

वाराणसी पहले से ही दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल है। लगातार पेड़ों कटाई के चलते प्रदूषण बुरी तरह से शहर पर भारी पड़ रहा है। ऐसे में बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्ध स्कूलों नें काशी की धरती को प्रदूषण मुक्त करने का बीड़ा उठाया है। अब हर स्कूल में बागीचा बनाने की कवायद शुरू हो गई है। बच्चे पौधे लगाएंगे उनकी सेवा करेंगे और शिक्षक पौधों को गोद लेंगे।

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वाराणसी के स्कूलों में होगी बागवानी, लगेंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

वाराणसी के स्कूलों में होगी बागवानी, लगेंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

वाराणसी. ये जिला दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक वायु प्रदूषण है। ऐसे में बेसिक शिक्षा परिषद से संबद्ध स्कूलों ने जिले को प्रदूषण मुक्त करने का बीड़ा उठाया है। इसके तहत हर स्कूल में बगीचा होगा। छात्र-छात्राएं पौधे रोपेंगे जबकि हर हर शिक्षक एक-एक पौधे को गोद लेंगे। साथ ही स्कूलों में भू- जल संचयन का भी इंतजाम किया जाएगा।

हर स्कूल में होगा पौधरोपण और स्थापित किए जाएंगे रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

बेसिक स्कूलों में जहां एक ओर विद्यार्थी पौधरोपण करेंगे वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग हर स्कूल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएगा। इसके पीछे सोच वर्षा जल का संचयन कर भू-जल के गिरते स्तर को मेंटेन करना है। लिहाजा स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ सोख्ता भी बनाया जाएगा जिससे वर्षा का जल जमीन के भीतर जा सके।

स्कूलों में लगेंगे फलदार व औषधीय गुणों वाले पौधे

स्कूलों में फलदार और औषधीय गुण वाले पौधे लगाए जाएंगे। इसमें भी आंवला, केला, सहजन, नीबू आदि का पौधा जरूर रोपा जाएगा। इसके अलावा हर स्कूल में न्यूटी गार्डन बनाने को कहा गया है। इसके तहत ही फलदार व औषधीय गुणों वाले पौधों के साथ सब्जियां भी उगाई जाएंगी।

बच्चे स्कूलों को हरा-भरा करने के साथ घर और आसपास भी हरियाली का संदेश देंगे
कहा गया है कि बच्चे स्कूलों में पौधे लगाएंगे तो इससे उनके भीतर पर्यावरण के प्रति लगाव पैदा होगा जिससे वो अभिभावको संग आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर सकेंगे।

"बच्चों संग शिक्षक भी पौधरोपण करेंगे और अपने द्वारा लगाए गए पौधे को गोद लेंगे,ताकि उनका संरक्षण हो सके। इससे स्कूलों में हरियाली आएगी। साथ ही बच्चों में प्रकृति से लगाव होगा। उनमें बागवानी की प्रवृत्ति विकसित होगी।" राकेश कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी