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चुनावी साल में काशी को मिली सौगात, अब PM का संसदीय क्षेत्र भी होगा स्मार्ट

तीसरे प्रयास में काशी ने मारी बाजी, केद्र ने तो वादा किया पूरा अब नगरियों के पाले में गेंद। जानिये क्या होंगे फायदे स्मार्ट सिटी के...

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Ajay Chaturvedi

Sep 20, 2016

Varanasi smart city

Varanasi smart city

डॉ. अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी.
केंद्रीय विकास मंत्रालय के सेक्रेटरी शंकर अग्रवाल जब 27 नवंबर 2014 को बनारस आए थे तब उन्होंने कहा था कि बनारस के विकास का खाका अधिकारी नहीं यहां की पब्लिक ही खीचेंगी। जी हां, इसके लिए शहर के हर वर्ग से सुझाव लिये जायेंगे। मिले सुझावों के आधार पर ही बनारस में विकास को गति दी जायेगी। उन्होंने बताया था कि स्वच्छता, शहर का मौलिक स्वरूप, आर्थिक सुधार व बेहतर लाइफ स्टाइल जैसे चार इश्यूज पर मंथन होगा। इस पर जनता की राय ली जायेगी। जनता की राय लेने की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। इसके लिए एक बेवसाइट स्मार्ट वाराणसी. ओआरजी जारी की जाएगी। इसपर कोई भी, स्मार्ट सिटी संबंधित अपना सुझाव पोस्ट कर सकता है। जनता का सुझाव जरूरी होता है क्योंकि लोग ही सटीक बताएंगे कि उनके शहर की जरूरतें क्या हैं। क्या किया जाये कि उनके जीवन स्तर को सुधारा जा सके बनारस शहर की मौलिकता व ऐतिहासिकता को संरक्षित करते हुए शहर का डेवलपमेंट करना बड़ी चुनौती है लेकिन जनता के सहयोग से इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। काम शुरू हुआ। लेकिन न पहली सूची में काशी का नाम आया न दूसरी सूची में। इससे न केवल काशी के उन अधिकारियों को निराशा हाथ लगी जो इसके लिए दिन रात एक किए थे बल्कि उससे कहीं ज्यादा काशीवासियों को इसका मलाल रह गया कि वे स्मार्ट बनने से चूक गए। लेकिन न काशीवासियों ने हार मानी न अधिकारियों ने। अंततः मंगलवार 20 सितंबर का दिन आधुनिक काशी के लिए मील का पत्थर बन गया। केंद्र ने अपना वायदा पूरा कर दिया, अब गेंद उत्तर प्रदेश और काशी के पाले में है। देखना है कि यूपी सरकार कितना मदद करती है और काशीवासी खुद को इस नए कांसेप्ट से कितना जोड़ पाते हैं और वह भी कितना जल्दी।


स्मार्ट बनने की राह के रोड़े
सबसे पहले बता दें कि स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होना ही गर्व की बात नहीं। असल गर्व तो तब होगा जब हम सचमुच में काशी को स्मार्ट सिटी बना देंगे। लेकिन इस राह में बड़े-बड़े रोड़े हैं। वैसे जानते हैं कि


वाराणसी से भेजे गए सुझाव
-पहला बिंदु-एर्नस्ट ऐंड यंग स्टडी प्लान की स्टडी के मुताबिक वाराणसी की सड़कों की आधी से ज्यादा जगह अवैध पार्किंग से घिरी हुई है। इसकी वजह शहर में पार्किंग की कोई स्थायी व्यवस्था न होना है। इसके अलावा शहर के तमाम इलाकों में हुआ अतिक्रमण भी सड़कों के चौड़ीकरण के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है। केंद्र को पेश की गई योजना रिपोर्ट में कहा गया है, 'गैरनियोजित ढंग से बसे 4,000 साल पुराने इस शहर की अधिकतर जनता ट्रैफिक मैनेजमेंट की व्यवस्था चाहती है।


-दूसरा बिंदु- केंद्र को भेजे गए प्लान में शहर के मुख्य हिस्से काशी विश्वनाथ मंदिर वाले इलाके भेलुपुर, सिगरा, गोदलिया और लहुराबीर को दोबारा संयोजित करने की मांग की गई है। यह इलाके वाराणसी के सेंट्रल बिजनस जोन में माने जाते हैं। इनके इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने से करीब 4 लाख लोगों को लाभ मिलेगा।


-तीसरा बिंदु- स्मार्ट सिटी प्लान में गोदलिया क्रॉसिंग से दशाश्वमेघ घाट तक के इलाके को चमकाने का प्रस्ताव है।पर्यटकों के लिए यह इलाका हमेशा से मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है। इसके अलावा स्मार्ट कार्ड सिस्टम युक्त मल्टी लेवल पार्किंग की स्थापना, तमाम लोकेशंस पर डिस्प्ले बोर्ड, पार्किंग की उपलब्धता के लिए मोबाइल ऐप और ई-रिक्शा के संचालन का प्रस्ताव स्मार्ट सिटी के प्लान में दिया गया है।


वाराणसी का संक्षिप्त परिचय
विश्व के जीवंत प्राचीनतम नगरों में एक वाराणसी का पौराणिक महत्व है। वैदिक काल से लेकर द्वापर, त्रेता और मौजूदा काल तक इस अनूठे तीर्थस्थल का त्रिशूलाकार अपने आप में निराला स्वरूप है। ओंकारेश्वर, विश्वेश्वर, केदारेश्वर तीन खंडों में विभक्त काशी का विश्वव्यापी महत्व है। उत्तर वाहिनी गंगा के किनारे बने घाटों से अवस्थित वाराणसी का नैसर्गिक सौंदर्य नयनाभिरामी है। ज्योतिर्लिंग पर निर्मित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा माता यहां की अस्मिता से जुड़ी हैं। बोधिसत्व महात्मा बुद्ध का प्रथम ज्ञान स्थल सारनाथ, जैन, सिख, सहित अनेक धर्मों के प्रादुर्भाव वाला यह शहर वर्तमाम में भी पौराणिक मान्यताओँ का पालन कर रहा है।


संकरी गलियां, हस्तनिर्मित वस्तुओं (कुटीर उद्योग) जैसे लकड़ी के खिलौने, साड़ी, कपड़े तथा पौराणिक अनुष्ठान व अध्ययन-अध्यापन आजीविका के प्रमुख साधन हैं। इसके अलावा बाहरी इलाकों में खेती है। हालांकि यहां खेती बहुत सीमित ही है।


काशी हिंदू विश्वविद्यालय, तिब्बती संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, अरबिया विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थान हैं।


मौजूदा हालत
तमाम उत्कृष्ठताओं के बावजूद वर्तमान में काशी के अपने अस्तित्व पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। सड़कें गड्ढ़ों से पटी हैं। बिजली के तार व खंभे बेतरतीबी से जहां-तहां झूल रहे हैं। सीवरयुक्त गंदा पानी पेयजलके रूप में घरों में पहुंच रहा है। जाम की समस्या यहां सबसे बड़ी समस्या है। बिजली-पानी की समस्या अलग है। आवारा पशुओं की बहुलता। अतिक्रमण, अवैध कालोनियां, पान-गुटका खा कर सड़कों, डिवाइडरों व अन्य सार्वजनिक स्थलों को गंदा करते लोग। धूल व आटो मोबाइल का जहर उगलता धुआं। बढ़ती जनसंख्या, सिकुड़ता शहर।


पड़ोसी जिलों का आब्रजन

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सपा एमएलसी व शहर के मिजाज को अच्छी तरह से समझने वाले शतरुद्र प्रकाश बताते हैं कि पड़ोसी जिलों और खास तौर पर बिहार से आए लाखों लोगों का आब्रजन बनारस में जम गया है। आलम यह है कि 30 फीसदी मकान वाले हैं तो 70 फीसदी किरायेदार हो गए हैं। शहर का पक्का महाल यानी मूल शहर का आबादी घनत्व 2500 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर हो गया है। इस चक्र के बाहर भी आबादी का घनत्व 2000 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर हो गया है। चलना मुश्किल हो गया है। हरियाली के अभाव में आक्सीजन की मात्रा धीरे-धीरे घटती जा रही है। ऐसी सूरत में वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाना मुश्किल तो नहीं पर चुनौतीपूर्ण जरूर है।


स्मार्ट शहर के मानक

ट्रांसपोर्ट
: एक स्थान से दूसरे स्थान को जाने के लिए ट्रैवेल टाइम अधिकतम 45 मिनट।

- कम से कम दो फीट चौड़ा फुटपाथ

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-रिहाइशी इलाकों से 800 मीटर दूरी पर 10 मिनट या पैदल चलने पर बस या मेट्रो की उपलब्धता।

आवास- 95 प्रतिशत इलाके ऐसे हों जहां 400 मीटर से भी कम दूरी पर स्कूल, पार्क, मनोरंजन पार्क की उपलब्धता।

-25 प्रतिशत मकान आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए।

-कम से कम 30 प्रतिशत आवासीय और व्यवसायिक क्षेत्र से बस या मेट्रो की उपलब्धता 800 मीटर के दायरे में हो।

बिजली-पानीः
स्मार्ट सिटी में प्रतिदिन 24 घंटे बिजली व पानी की आपूर्ति।

-शत प्रतिशत घरों में बिजली-पानी कनेक्शन।

शिक्षाः
15 प्रतिशत इलाका शैक्षणिक संस्थाओं के लिए मुकर्रर हो।

-प्रत्येक 1500 लोगों पर एक मुफ्त प्राथमिक विद्यालय, प्रत्येक 5000 लोगों पर एक प्राइमरी स्कूल, हर 7500 लोगों पर सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक लाख की आबादी पर पहली से 12वीं तक की शिक्षण संस्था।

-10 लाख की आबादी पर एक विश्वविद्यालय, एक मेडिकल कॉलेज, एक इंजीनियरिंग कॉलेज तथा एक पैरा मेडिकल कॉलेज।

स्वास्थ्यः
स्मार्ट शहर में एमरजेंसी सहायता की आधे घंटे में उपलब्धता अनिवार्य है।

-हर 15,000 लोगों पर एक डिस्पेंसरी

-एक लाख की आबादी पर 30 बेड का अस्पताल, 80 बिस्तर वाला मध्यम तथा 200 बिस्तर वाला बड़ा अस्पताल।

-हर 50,000 की आबादी पर एक जांच केंद्र।

वाई-फाई कनेक्टिविटीः
शत प्रतिशत घरों में वाई-फाई कनेक्टिविटी हो।

-100 एमबीपीएस की स्पीड पर वाई-फाई कनेक्टिविटी हो।


सुझावः
एमएलसी व समाजवादी विचारधारा वाले नेता शतरुद्र प्रकाश के सुझाव

-शहर का जीवन सरल व सुगम बनाने के लिए हरियाली का प्रबंध, ताकि पर्याप्त आक्सीजन मिले।

-आब्रजनों की आबादी को शहर से वापस भेजना जो कठिन कार्य है। ऐसे में वाराणसी और आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, भदोही जैसे जनपदों के बीच अलग से टाउनशिप का विकास हो।

-मूल शहर की रक्षा को शहर का विस्तार कर लोगों को शहर के बाहरी इलाके में भेजना।

-पड़ोसी जिलों का नगरीयकरण।

-रिंग रोड की सीमा से 500 मीटर से 4000 मीटर की दूरी पर नियोजित टाउनशिप।

-पौराणिक मान्यता वाले मूल शहर को हेरिटेज परिक्षेत्र के रूप में प्राचीन वास्तु कला के हिसाब से संजोया जाना। इसके साथ कोई छेड़-छाड़ न होना।

-गंगा में डीजल व पेट्रोल से चलने वाले वाहनों पर लगे पाबंदी।

-रोजगार के लिए डीरेका के लिए बनने वाले एसीलरी पार्ट्स को आस-पास के इलाकों के घरों में कुटीर उद्योग के रूप में परिवर्तित करना।

- वाराणसी में 2000 मेगावाट का एक बिजली घर का निर्माण। साथ ही सोलर प्लांट को अधिक अधिक से उपयोग में लाने को जागरूक करना।

-कूड़ा फेंकने का समय निर्धारित हो। कूड़े का उठाना सुनिश्चित हो।

-सुगम यातायात के लिए दुकानों के खुलने व बंद करने तथा स्कूलों व दफ्तरों के खुलने व बंद होने के समय को रीशेड्यूल किया जाए।

-क्षेत्रवार कॉल सेंटर खोले जाएं।

-प्रशासन एक मेगा मानीटरिंग कंप्यूटर सेंटर स्थापित हो।

-मोबाइल व नेट का इस्तेमाल करने वालों से प्रशासन की ऑन लाइन कनेक्टिविटी हो।

-सीवर व पेयजल पाइप लाइन की कंप्यूटरिंग तत्काल हो। मेन लाइन, ब्रांच लाइन व साइड लाइन का नक्शा तैयार हो।


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