
CM Yogi Adityanath and Akhilesh Yadav
वाराणसी. यूपी सरकार के इस मंत्री ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव को बड़ी राहत दे दी है। अनुप्रिया पटेल के बाद मंत्री ने सीएम योगी सरकार को आईना दिखाया है। यूपी चुनाव जीतने के बाद से लगतार यूपी सरकार इन आरोपों में घिरती जा रही है। सीएम योगी के मंत्री ने बकायदे आंकड़े देकर बताया हैं कि किस तरह सबका साथ सबका विश्वास के नाम पर खेल हो रहा है।
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सीएम योगी सरकार पर लगातार हमला बोलने वाले कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश ने इस बार आरक्षण को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सीएम योगी सरकार में पिछड़े व दलितों के साथ अन्याय हो रहा है। ओमप्रकाश राजभर के अनुसार बनारस के 26 थानों में 21 थानों में सवर्ण एसओ या थाना प्रभारी तैनात हैं। इसी तरह चंदौली के 16 थानों में 21 व जौनपुर व गाजीपुर के 26-26 थानों में से 22 थानों में सवर्ण अधिकारी तैनात हैं। ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि यूपी चुनाव के समय सबका साथ सबका विश्वास का नारा दिया गया था जब सरकार बन गयी तो पुलिस थानों में सभी वर्ग को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार से 27 प्रतिशत आरक्षण में विभाजन की मांग की गयी है लेकिन उसे भी अभी तक पूरा नहीं किया गया है इससे साफ हो जाता है कि यूपी सरकार आरक्षण को खत्म करने की साजिश कर रही है।
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अनुप्रिया पटेल ने भी सीएम योगी सरकार पर उठाये हैं सवाल
बीजेपी के सहयोगी दल अनुप्रिया पटेल ने भी सीएम योगी सरकार पर सवाल उठाये हैं। अनुप्रिया पटेल ने पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार से पुलिस थानों व जिला प्रशासन में पचास प्रतिशत पिछड़े , अति पिछड़े व दलित अधिकारियों को तैनात करने की मांग की है। अनुप्रिया पटेल ने कहा था यदि जिलाधिकारी सवर्ण होता है तो एसएसपी पिछड़ा या दलित वर्ग से हो। ऐसा करके हम सभी जाति के लोगों को सरकार से जोड़ पायेंगे। अनुप्रिया पटेल के बाद ओमप्रकाश राजभर ने सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के सबका साथ सबका विश्वास नारे पर सवाल उठा दिया है।
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जानिए अखिलेश यादव को कैसे मिली राहत
सपा के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव पर बीजेपी के नेता ही जातिवाद करने का आरोप लगाते थे। विपक्ष पर रहते हुए बीजेपी लगातार अखिलेश यादव पर एक ही जाति के लोगों को पुलिस थाना देने का आरोप लगाती रहती थी लेकिन अब यूपी में बीजेपी की सरकार है और सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार पर ही जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लग रहा है जिसके चलते अखिलेश यादव को बड़ी राहत मिल गयी है। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ही बीजेपी का सोशल इंजीनियरिंग का किला ढगमगाने लगा है यदि सरकार ने सहयोगी दलों की मांग पर ध्यान नहीं दिया तो संसदीय चुनाव से पहले यह गठबंधन टूट सकता है यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी को फिर से सत्ता पर कब्जा करना बेहद कठिन हो जायेगा।
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Published on:
10 May 2018 12:48 pm
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