
म्यूजिक कॉन्सर्ट
वाराणसी. बनारस घराने की शान सुप्रसिद्ध ठुमरी गायिका सुर साम्राज्ञी पद्मविभूषण गिरिजा देवी को उनकी 92वीं जयंती पर याद किया जा रहा है। कोरोना काल में लॉक डाउन के चलते जब सबकुछ बंद है तो ऐसे में उनकी शिष्य मण्डली उन्हें डिजिटल सुरांजलि देकर उनको याद कर रही है। शुक्रवार से शुरू हुआ ऑनलाइन संगीत समारोह के ज़रिये डिजिटल सुरांजलि का ये क्रम 15 दिनों तक रोज़ाना दो सत्रों में चलेगा। इसका अयोजन उनकी 92 वीं जयंती के मौके पर काशी विरासत फ़ाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। इसे काशी विरासत फ़ाउंडेशन के फेसबुक पेज पर देखा जा सकता है।
आयोजन के दूसरे दिन शनिवार नौ मई को प्रात:कालीन सत्र में पूर्वाह्न 11 बजे से मोशमी सेन के गायन से शुरुआत हुई। इनके अलावा विवेक करमहे और उर्वशी झा भी इस सत्र में अपनी प्रस्तुति देंगी। दूसरे सत्र में शाम के छह बजे से सुरंजना बोस, कृष्णा मुखेदकर और डॉ. शालिनी वेद का गायन होगा।
शुक्रवार को उनकी पुत्री डॉ. सुधा दत्ता ने गिरिजा देवी के जीवन से जुड़े कई पहलुओं को ऑनलाइन देख रहे संगीत प्रेमियों के साथ साझा किया। शुरुआत गिरिजा देवी की लोकप्रिय ठुमरी, चैती, ख्याल, टप्पा और कजरी शानदार प्रस्तुतियां के साथ हुईं। सुनंदा शर्मा के राग भैरवी में दादरा और टप्पा सुनाया तो मालिनी अवस्थी ने प्रसिद्ध ठुमरी ‘बाबुल मोरा नइहर छूटा जाए’ का सुमधुर गायन किया और टप्पा भी गाया।
राहुल-रोहित ने राग गुजरी तोड़ी में दो बंदिशें पेश कीं। शक्ति चक्रवर्तीओं, कार दादरकर व डॉ. रीता देव ने शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय शैलियों प्रस्तुतियां दीं। संचालन बारी बारी से काशी विरासत फाउंडेशन से शिवानी, स्वाति एवं माला ने किया।
Published on:
09 May 2020 11:52 am
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