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देवरिया कांड पर विपक्ष का जोरदार हमला, बनारस में निकला विरोध मार्च

देवरिया, हरदोई संरक्षण गृह रेप मामले ने पकड़ा तूल, वामपंथी भी उतरे सड़क पर,मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाने व चंद्रशेखर रावण को तत्काल रिहा करने की उठी मांग।

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वाराणसी. देवरिया प्रकरण को लेकर बनारस बुधवार को गर्म रहा। एकतरफ जहां देवरिया बालिका संरक्षण गृह से लापता हुई लड़कियां जो अब बरामद कर ली गई हैं उन्हें बनारस के संवासिनी गृह लाने की तैयारी में जिला प्रशासन जुटा रहा। वहीं भाकपा माले ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने शासन से देवरिया सहित प्रदेश के संरक्षण गृहों में हुए रेप की न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की। मांग के समर्थन में विरोध मार्च भी निकाला।

माले व भाकपा (माले), खेग्रामस, ऐपवा, इंसाफ मंच के संयुक्त नेताओं व कार्यकर्ताओं ने चंद्रशेखर रावण को तुरंत रिहा करने, दबंगों से सरकारी जमीनें मुक्त कर भूमिहीनों में बांटने की मांग भी उठाई। साथ ही किसानों को कर्जे से मुक्त करने व स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने की मांग भी की।

सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा राज्य सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि मोदी-योगी राज में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। पहले मुजफ्फरपुर और अब देवरिया, हरदोई संरक्षण गृहों में रेप के मामलों ने सत्ता संरक्षण को सामने ला दिया है। ऐसे में हमारी मांग है कि सीबीआई जाँच न्यायालय की निगरानी में कराई जाए और सभी सरकारी संरक्षण गृहों की स्वतंत्र जाँच भी की जाए।
युवा नेता फजलुर्रहमान अंसारी ने कहा कि मोदी-योगी राज में दलितों-मुसलमानों को बनाया जा रहा है। मॉब लिंचिंग के आरोपियों को जिस तरह मोदी सरकार के मंत्री सम्मानित कर रहे हैं। चंद्रशेखर रावण को बेवजह 14 महीनों से जेल में रखा गया है और जिस तरह से कोर्ट के आदेश के बावजूद स्लॉटर हाउस को बंद रखा गया है, उससे यह साफ हो जाता है कि यह सब कुछ सत्ता के संरक्षण में हो रहा है। ऐसे में हमारी मांग है कि मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाया जाए, चंद्रशेखर को रिहा किया जाए और स्लॉटर हाउस को चालू किया जाए।
इस मौके पर भाकपा-माले केंद्रीय कमेटी सदस्य मनीष शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा किसानों के साथ धोखा है और अगर तत्काल किसानों को हर तरह के कर्जे से मुक्त नहीं किया गया तथा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप एमएसपी नहीं लागू की गई तो किसान जनता इसका जवाब 2019 के चुनावों में देगी।
उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए ऑल इंडिया सेकुलर फोरम के संयोजक डॉ. मोहम्मद आरिफ ने कहा कि आज पूँजीवादी समाज असमाधेय ढाँचागत संकट से जूझ रहा है, इसमें सुधारों से बात बनने वाली नहीं, आमूलचूल बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हालाँकि बदलाव की वाहक मनोगत शक्तियाँ कमजोर हैं पर हताश होने की जरूरत नही है। वस्तुगत स्थितियों और मनोगत शक्तियों के बीच सीधा संबंध होता है और वह दिन जल्दी ही आएगा जब बदलाव की वाहक शक्तियाँ महत्वपूर्ण भूमिका में होंगी।
सभा व जूलूस में मुख्य रूप से अमरनाथ राजभर, सतीश सिंह, स्मिता बागड़े, आबिद, डॉ नूर फातमा, कमलेश यादव, सागर गुप्ता, अर्चना बौद्ध, अवधेश, त्रिभुवन राजभर, नागेंद्र पाल, कामता प्रसाद, जगधारी, स्वालेह, कमलेश कुमार, पिंटू कुमार, जुबैर खान, सरताज अहमद आदि मौजूद थे।

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