
पार्किसन बीमारी
वाराणसी. आज की लाइफस्टाइल बहुत अलग है। लोग वजन कम करने के लिए डाइटिंग करते हैं। जिसमें कम भोजन बिना फैट वाली चीजें खाना पसंद करते हैं। वहीं बिना मलाई वाला दूध पीना पसंद करते हैं जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। बतादें कि बिना मलाई वाला दूध पीने से पार्किसन बीमारी हो जाती है। जिसका कोई इलाज नहीं है। यह पूरी तरह लाइलाज है। इस बीमारी की होने की आशंका 39 फीसदी तक बढ़ जाती है। जब आप दूध से मलाई हटाकर पीते हैं तो। पार्किंसन रोग के परीक्षण के लिए वर्तमान में कोई विशेष जांच मौजूद नहीं है।
तीन बार बिना मलाई का दूध लेना हो सकता है खतरनाक
रोजाना मलाईरहित दूध पीने से पार्किंसन बीमारी होने का जोखिम बढ़ सकता है। 34 फीसदी अधिक बना रहता है क्योंकि इससे भी शरीर को वसा की जरूरी मात्रा नहीं मिल पाती।
पार्किंसन के लक्षण
पार्किंसन बीमारी में मस्तिष्क के उस हिस्से की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं जो गति को नियंत्रित करता है। कंपन, मांसपेशियों में सख्ती व तालेमल की कमी और गति में धीमापन इसके आम लक्षण हैं। पार्किंसन रोग के शुरुआती चरणों में, आपके चेहरे के हाव भाव कम या खत्म हो सकते हैं या चलते समय आपकी बाजुएं हिलना बंद कर सकती हैं। आपकी आवाज़ धीमी या अस्पष्ट हो सकती है। समय के साथ पार्किंसन बीमारी के बढ़ने के कारण लक्षण गंभीर हो जाते हैं। चलने और हाथ पैर को अपनी मर्जी से न हिला पाना इसके शुरूआती लक्षण हैं, जो धीरे धीरे मरीज को हताशा और अधीरता जैसी मानसिक परेशानियों की तरफ भी ले जाते हैं।
बचाव
इस बीमारी का कारण अज्ञात है। इसलिए इसकी रोकथाम के तरीके भी एक रहस्य ही हैं। हालांकि, कुछ शोधों से पता चला है कि चाय, कॉफी, ग्रीन टी और कोका कोला में पाई जाने वाली कैफीन पार्किंसन रोग के विकास के जोखिम को कम कर सकती है।
अभी तक नहीं है कोई जांच
Published on:
16 Aug 2018 08:17 am
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