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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र का हाल, गंगा किनारे ही पेयजल के लिए हाहाकार

मानसून एक्सप्रेस लेट होने से स्थिति हुई और खराब, सीएम योगी सरकार में वाटर लॉस में नहीं आयी कमी

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Banaras water supply problem

Banaras water supply problem

वाराणसी. केन्द्र सरकार एक तरफ चार साल में विकास के दावे कर रही है जबकि पीएम नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र ही केन्द्र सरकार को आईना दिखाने के लिए काफी है। यूपी में अब सीएम योगी सरकार आ गयी है इसके बाद भी बनारस में पेयजल आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ है। गर्मी के समय स्थिति इतनी विकट हो रही है कि लोगों में हाहाकार मच गया है। स्थिति ऐसी बन गयी है कि गंगा में और पानी घटा तो शहर के बहुत बड़े हिस्से में पानी आपूर्ति ठप हो जायेगी।
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बनारस में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप व गर्मी के चलते लोगों का जीना मुहाल हो गया है ऐसे में पानी का संकट स्थिति को भयावह बनाता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में हल्की बारिश हो रही है लेकिन क्रकीट का जंगल बन चुके शहर में बारिश का पानी नसीब नहीं हो रहा है। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने भी गंगा में पानी छोड़े जाने का आश्वासन दिया था इसके बाद भी पानी नहीं छोड़ गया है गंगा का जलस्तर इतना कम हो चुका है कि पेयजल आपूर्ति करने वाले पंप भी तेजी से बंद होते जा रहे हैं जिसके चलते लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
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भयावह होती जा रही पयेजल आपूर्ति की स्थिति
पेयजल आपूर्ति की स्थिति भयावह होती जा रही है। शहर के बड़े हिस्से में पानी की आपूर्ति वाला भदैनी पंप भी बंद होने के कगार पर पहुंच गया है यदि गंगा में थोड़ा और पानी कम होता है तो पंप बंद जायेगा। इसके बाद शहर में सबसे बड़ा जल संकट उत्पन्न हो जायेगा। गंगा में इतना कम पानी बचा है कि पेयजल आपूर्ति के समय में कटौती करके काम चलाया जा रहा है।
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लीकेज के चलते बर्बाद हो रहा 50 प्रतिशत से अधिक पानी
शहर में लोगों का50 प्रतिशत से अधिक पानी लीकेज के चलते ही बर्बाद हो रहा है। मायावती, अखिलेश यादव से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में लीकेज रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किये गये हैं जिसके चलते स्थिति इतनी खराब हो गयी है। शहर में पानी की कमी हो गयी है और जो पानी दिया जा रहा है उसका आधा हिस्सा बेकार में बह जाता है इसलिए लोगों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
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अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही है गंगा
पीएम नरेन्द्र मोदी ने गंगा की स्थिति को सुधारने का वादा किया था लेकिन हालत यह हो गये हैं कि गंगा अपने अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही है। पिछले 60साल की बात की जाये तो गंगा सबसे बदतर स्थिति में पहुंच गयी है। जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा ने पहले ही पत्र लिख कर गंगा में जल छोड़े जाने का अनुरोध किया था इसके बाद नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने भी गंगा में पानी छोड़े जाने की बात कही थी लेकिन आज तक गंगा में पानी नहीं छोड़ा गया है। इसके चलते स्थिति भयावह होती जा रही है।
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जानिए शहर में पेयजल आपूर्ति की स्थिति
शहर में पानी की 311 एमएलडी उत्पादन हो रहा है
शहर के लोगों को आवश्यकता से 65 एमएलडी पानी कम मिल रहा है
18 ओवर हेड पानी की नयी टंकी में से से 11 से ही जलापूर्ति
शहर के 20 ट्यूबवेल ने पानी छोड़ दिया है जबकि 128 ट्यूबवेल अपनी क्षमता से कम पानी उठा रहा है
पानी के कमी के चलते बोरिंग कराने वालों की संख्या में पांच गुना बढ़ोतरी हो गयी है
तेजी से हो रही बोरिंग के चलत भूजलस्तर और तेजी से गिर रहा है।
बोरिंग से कुछ लोगों को पानी मिल रहा है जबकि भूजल गिरने से ट्यूबवेल भी बंद होने लगे हैं।
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