20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

BHU के कैंसर संस्थान का लोकार्पण करेंगे PM मोदी

पीएम ने ही रखी थी आधारशिला, अब करेंगे 350 बेड वाले कैंसर अस्पताल का लोकार्पण।

3 min read
Google source verification
BHU cancer hospital

BHU cancer hospital

वाराणसी. बतौर सांसद, पीएम नरेंद्र मोदी आगामी 29 दिसंबर को अपने संसदीय क्षेत्र को बड़ी सौगात देंगे। इसी तैयारी पूरी कर ली गई है। बता दें कि यह सौगात है बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल। इस अस्पताल से न केवल बनारस बल्कि पूर्वांचल क्या समूचा उत्तर भारत लाभान्वित होगा। यहां यह भी बता दें कि इस कैंसर अस्पताल की आधारशिला भी पीए ने ही रखी थी। अब यह अस्पताल बन कर तैयार हो चला है। बता दें कि पत्रिका ने पहले ही यह बताया था कि बीएचयू में निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल दिसंबर में ही जनता को लोकार्पित हो जाएगा।

बता दें कि उत्तर भारत के कैंसर रोगियों की सहूलियत के लिए महामना मदन मोहन मालवीय की कर्म स्थली बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 दिसंबर 2016 को इस अस्पताल की आधारशिला रखी थी। वह कैंसर अस्पताल अब मूर्त रूप ले चुका है। कार्यदायी कंपनी के दावे के तहत विश्वविद्यालय के सुंदर बगिया में निर्माणाधीन महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर अस्पताल तैयार हो चुका है। इसे जल्द ही टाटा मेमोरियल सेंटर को हस्तांतिरत कर दिया जाएगा।

यहां यह भी बता दें कि पीएम के आधारशिला रखने के बाद करीब साल भर तक इस अस्पताल के निर्माण के बाबत केवल कागजी कार्रवाई ही चलती रही। कार्य में हो रही देरी के मद्देनजर टाटा ट्रस्ट ने खुद ही अस्पताल परिसर का जिम्मा ले लिया। टाटा ने तीन कंपनियों को कार्य आवंटित किया। इसके तहत अस्पताल निर्माण का काम जेएसएसएल जबकि कैपासाइट कंपनी ने कराया। मैनेजमेंट, क्वालिटी व इंजीनियरिंग का जिम्मा वन ग्रुप कंपनी को सौंपा गया था। कैपासाइट का पोर्टेबल कार्यालय काफी पहले ही तैयार हो गया था। कैपासाइट कंपनी के अधिकारी शैलेंद्र शर्मा के मुताबिक कैंसर अस्पताल के आरसीसी निर्माण का कार्य भी अब पूरा हो चुका है, जहां तक बिजली, पानी, फायर फाइटिंग, फ‍निशिंग का सवाल है तो ये सारे कार्य भी अंतिम दौर में है। बता दें कि 'प्री-फैब्रिकेशन तकनीक पर आधारित होने के कारण कैंसर सेंटर की बिल्डिंग तैयार होने के चलते निर्माण में समय ज्यादा नहीं लगा। बीएचयू में प्रस्तावित पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर देश का अपनी तरह का ऐसा अकेला हॉस्पिटल होगा, जिसका भवन प्री-फैब्रिकेशन तकनीक से निर्मित होगा। यहां कैंसर के इलाज की हरसंभव व्यवस्था होगी।

क्या है प्री फैब्रिकेटेड बिल्डिंग
प्री-फैब्रिकेटेड बिल्डिंग के अधिकतर भाग को पहले ही फैक्ट्रियों में तैयार कर लिया जाता है, जिसे कंस्ट्रक्शन साइट पर लाकर असेंबल करते हैं। बिल्डिंग की दीवार, छत सभी चीजें जरूरत के हिसाब से सीमेंट व फाइबर आदि चीजों से बनी होती हैं। इस तरह की बिल्डिंग के निर्माण में कम समय लगता है।

बता दें कि बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में ही हर साल करीब 50 हजार कैंसर के मरीज आते हैं। इसके अलावा बनारस के अन्य अस्पतालों में भी कैंसर के हजारों मरीज आते हैं। विशेष सुविधा के लिए पूर्वाचल ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, नेपाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के मरीजों को मुंबई स्थित टाटा कैंसर सेंटर जाना पड़ता है। इसके कारण मरीजों को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी ने काशी में कैंसर सेंटर बनाने की घोषणा की थी। उनकी पहल पर 12 दिसंबर 2016 को पीएमओ की विशेष टीम यहा आई और पूरी रिपोर्ट मागी। इसके बाद यहा से आइएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ला व एसएस अस्पताल के तत्कालीन एमएस डॉ ओपी उपाध्याय ने पीएमओ में जाकर पूरी रिपोर्ट सौंपी। इसमें सुपर स्पेशियलिटी काप्लेक्स भी शामिल किया।

इधर प्रधानमंत्री के 29 दिसंबर को वाराणसी और गाजीपुर का कार्यक्रम तय होते ही प्रशासन ने लोकार्पण और शिलान्यास संबंधी परियोजनाओं की सूची तैयार कर पीएमओ को सूची भेज दी। इसके तहत मुंबई के टाटा कैंसर हॉस्पिटल सरीखा 350 बेड का कैंसर संस्‍थान और चावल अनुसंधान केंद्र लोकार्पण के लिए तैयार हो चला है। बीएचयू कैंपस में बना है। कैंसर अस्पताल के निर्माण पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। एक अन्य परियोजना, गोइठहां एसटीपी का काम भी अंतिम चरण में है।

फिलीपींस के बाद वाराणसी में शुरू होने वाला दूसरा इंटरनैशनल राइस रीसर्च इन्स्टिट्यूट (आईआरआरआई) दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा शोध केंद्र होगा। वाराणसी-इलाहाबाद हाइवे के किनारे चांदपुर इलाके में स्थित राष्‍ट्रीय बीज अनुसंधान केंद्र कैंपस में इसकी स्‍थापना पर करीब डेढ़ अरब की लागत आई है। यहां आधुनिक प्रयोगशाला में वैज्ञानिक चावल की सभी पुरानी प्रजातियों को मिलकार नई उन्‍नत प्रजाति विकसित की जाएगी।

ये भी पढ़ें-कैंसर रोगियों के लिए अच्छी खबर, अगले महीने तक टाटा मेमोरियल सेंटर को सौंप दिया जाएगा निर्माणाधीन अस्पताल