आजीवन कारावास की सजा पाये कैदी की अस्पताल में मौत, परिजनों ने जहर देने का लगाया आरोप

Devesh Singh

Publish: Jul, 13 2018 06:52:05 PM (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India

वाराणसी. सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मुश्ताक की शुक्रवार को भोर में दीनदयाल राजकीय अस्पताल में मौत हो गयी है। मृतक के परिजनों ने शव के नीला पडऩे की बात करते हुए जेल में जहर देने का आरोप लगाया है जबकि जेल प्रशासन का कहना है कि कैदी दमा से पीडि़त था और बीमार होने पर उसे अस्पताल में भेजा गया था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यदि हमारे यहां पर आईसीयू होता तो जान बचाना संभव भी हो सकता था।
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भदोही निवासी मुश्ताक (60) को हत्या करने पर आजीवस कारावास की सजा मिली थी। वर्ष 2011 से ही मुश्ताक जेल में सजा काट रहा था। पहले उसे भदोही जेल में रखा गया था बाद में 27 मई 2018 को बनारस के सेंट्रल जेल में भेजा गया था। यहां पर बीती देर रात मुश्ताक को दमा का दौरा पड़ा था जिसके बाद जेल प्रशासन ने मुश्ताक को पंडित दीनदयाल राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया था। भर्ती कराने के आधा घंटा के अंदर ही उसकी मौत हो जाती है। इसके बाद कैदी के शव को मर्चरी में रखवा कर परिजनों को सूचना दी जाती है। मुश्ताक के बेटे मुजाहिद खान का कहना है कि शुक्रवार को दोपहर में भदोही कोतवाली से पिता की मौत की सूचना आती है जिसके बाद हम लोग दीनदयाल अस्पताल पहुंचते हैं। बेटे का आरोप है कि उसके पिता का शव नीला पड़ गया था जिससे पिता को जहर देने का संदेह पैदा हो गया है। मुजाहिद ने कहा कि उसके पिता ठीक थे। भदोही में बीमार हुए थे तो दवा करायी गयी थी इसके बाद कभी दवा की जरूरत नहीं हुई। बेटे ने कहा कि यहां पर आने के बाद उनकी तबयत खराब थी तो सेंट्रल जेल प्रशासन को हम लोगों को सूचना देनी चाहिए थी लेकिन किसी ने बीमार होने की सूचना नहीं दी थी जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि साजिश कर जहर दिया गया होगा। बेटे ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का खुलासा हो जायेगा। अस्पताल के सीएमएस ने कहा कि जब मुश्ताक को यहां पर लाया गया था तो उसकी स्थिति बहुत खराब थी वह सांस नहीं ले पा रहा था। यदि हमारे पास आईसीयू होता तो परिणाम कुछ और हो सकता था। रेफर करने के प्रश्र पर कहा कि इतना समय ही नहीं था कि उसे रेफर किया जाता। सेंट्रल जेल के अधीक्षक डा.अम्बरीश गौड का कहना है कि मुश्ताक को दमा का अटैक आया था। जेल में ही उसका 6 से 9 जून तक इलाज कराया गया था इसके बाद वह ठीक हो गया था। बीती देर रात तबयत ज्यादा बिगडऩे पर उसे तुरंंत ही दीनदयाल अस्पताल में भेजा गया था जहां उसकी मौत हो गयी। जेल अधीक्षक ने मौत में किसी साजिश से इंकार किया है।
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मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद जेल पर लगी है सभी की निगाहे
सुपारी किंग मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हुई हत्या के बाद से सभी लोगों की निगाह जेल व्यवस्था पर लगी हुई है। जिस तरह से बागपत जेल में पिस्टल भेजी गयी थी और ताबड़तोड़ गोली चला कर मुन्ना बजरंगी की हत्या की गयी थी उससे जेल व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। बनारस के ही सेंट्रल जेल में मुन्ना बजरंगी के शूटर अन्नू त्रिपाठी की गोली मार कर हत्या की गयी थी।
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