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चार महीने बाद BHU को प्रो. चोपड़े के रूप में मिला नया कुलपति

बाबा अम्बेडकर विश्वविद्यालय मराठवाड़ा, औरंगाबाद, महाराष्ट्र के है कुलपति। पत्रिका की खबर पर लगी मुहर।

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बीेएचयू के नए कुलपति प्रो चोपड़े

बीेएचयू के नए कुलपति प्रो चोपड़े

वाराणसी. काशी हिंदू विश्वविद्यालय को आखिर चार महीने के इंताजर के बाद नया कुलपति मिल गया। अब बाबा अम्बेडकर विश्वविद्यालय, मराठवाड़ा, औरंगाबाद, महाराष्ट्र के कुलपति प्रो. बालू आंद्रे चोपड़े विश्वविद्यालय के नए कुलपति होंगे। इनके नाम पर विजिटर, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मुहर लग गई है। बताया जा रहा है कि प्रो. चोपड़े बायो इनफार्मेटिव और बायो टेक्नॉलजी के विशेषज्ञ हैं। यह प्रो. जीसी त्रिपाठी के उत्तराधिकारी होंगे। बता दें कि सबसे पहले पत्रिका ने ही यह संभावना जताई थी कि इस बार कोई वैज्ञानिक ही बीएचयू का कुलपति होगा और वही हुआ।

बता दें कि पिछले 21 सितंबर को बीएचयू के भारत कला भवन के समीप बीएएफए की छात्र संग हुए छेड़छाड़ के बाद छात्राओ के आदोलन के जिसमें विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों और पुलिस कर्मियों ने छात्राओँ पर लाठीचार्ज भी किया था, कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी को उनके विवादित बयानों के चलते मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने फोर्स लीव पर भेज दिया था। उसके बाद 27 नवंबर को प्रो. त्रिपाठी का कार्यकाल पूरा हो गया, तब से कुलसचिव डॉ नीरज त्रिपाठी कार्यवाहक कुलपित के रूप में काम देख रहे थे। इधर तीन महीने से लगातार नए कुलपति का इंतजार किया जा रहा था। दरअसल कुलपति पद के लिए करीब दो सौ से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था। उसमें योग्य व्यक्ति के चयन में काफी विलंब हुआ। अंततः प्रो. चोपड़े के नाम पर सहमति बनी। हालांकि इस दौड़ में बीएचयू के भी कई प्रोफेसर लाइन में लगे थे। कहा यह भी जा रहा था कि इस बार किसी महिला को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। लेकिन उन सभी कयासों पर अब विराम लग गया।

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बता दें कि हाल के दिनों में गैर उत्तर भारत से इससे पूर्व प्रो, वाईसी सिम्हाद्री बीएचयू के कुलपति बने थे। उनके बाद चाहे प्रो. पंजाब सिंह हों या डॉ लालजी सिंह या प्रो. डीपी सिंह और प्रो जीसी त्रिपाठी सभी उत्तर भारत से ही जुड़े थे। इस बार जैसे ही कुलपति की चयन प्रक्रिया शुरू हुई तभी पत्रिका ने यह खबर प्रसारित की थी कि इस बार कोई वैज्ञानिक ही बीएचयू का कुलपति होगा और अब पत्रिका की खबर पर मुहर लग गई। बता दें कि इससे पूर्व डॉ़ लालजी सिंह भी बायो टेक्नॉलजी के वैज्ञनिक रहे। प्रो चार जून 2014 से बाबा साहेब अम्बेडकर विश्वविद्यालय में कुलपति रहे। रिसर्चर, इनोवेटर, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविद्, दूर द्रष्टा, रिसर्च मेंटर, कुशल प्रशासक के रूप में इन्हें जाना जाता है। यूरोप से पीएचडी की तो अमेरिका से पोस्टर डॉक्टरेट। यूनिवर्सिटी ऑफ पुने में शिक्षण शुरू किया। माइक्रोबायोलॉजी विभाग को नया आयाम दिया। इंस्टीट्यूट ऑफ बायो इनफार्मेटिक व बायोटेक्नॉलजी की स्थापना की। इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। वह 29 पीएचडी स्कॉलर्स के मेंटर रह चुके हैं। इन्हें कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। नाटिंघम, इंग्लैड में वह भारत सरकार के स्कॉलर के रूप में काम कर चुके हैं। माइक्रो बायोलॉजी एंड मॉलेकुलर जेनेटिक्स में इन्होंने 1983 से 1986 के बीच पीएचडी की है। पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन के द्वारा इन्हें प्रतिष्ठापरक राष्ट्रीय फेलोशिप भी दी जा चुकी है।

बीएचयू को एक वैज्ञानिक कुलपति तो मिल गया है लेकिन उनके लिए यह कांटों भरा ताज ही है। कारण इस विश्वविद्यालय में चुनौतियां ही चुनौतियां हैं। आंतरिक कानून व्यवस्था हो, निवर्तमान कुलपति प्रो त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियां और प्रमोशन जैसे मसले हों, इन सभी के मामले उच्च न्यायालय में विचाराधन हैं। कई मामलों में कोर्ट विश्वविद्यालय को नोटिस भी जारी कर चुका है। लेकिन इन बड़ी चुनौतियों के अलावा विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों की जातीय राजनीत भी उऩके लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगी। माना जा रहा है कि सवर्ण नहीं हैं ऐसे में यहां के ब्राह्मण व क्षत्रिय शिक्षक-कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करना आसान नहीं होगा। हालांकि केंद्र सरकार ने बडी चतुराई का परिचय देते हुए एक दलित को बीएचयू की कमान थमाई है।