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ईरानी जनरल सुलेमानी ने इराक में फंसे भारतियों को बचाने में मदद की थी, मौलाना नदीम असगर का दावा

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Nadeem Asghar

मौलाना नदीम असगर

वाराणसी. ईरान के सुप्रीम कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद पूरे आलम-ए-इस्लाम में गम और गुस्सा है। ये कहना है कि बनारस के मशहूर जव्वदिया अरबी कॉलेज के मौलाना नदीम असगर का। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर जनरल कासिम सुलेमानी का दहशतगर्दी से संबंध होता तो वह आईएसआईएस के खात्मे के लिये क्यों लड़ते। मौलाना नदीम असगर जव्वादिया अरबी कॉलेज में मंगलवार को जनरल कासिम सुलेमानी की याद में आयोजित होने वाली मजलिस (शोक) के पहले पत्रिका से बातचीत में अमेरिका और इजराइल पर जमकर बरसे और जनरल सुलेमानी को शहीद बताया।

उन्होंने कहा है कि जनरल सुलेमानी किसी का सिर नहीं काटते थे। वो तो लोगों की जान बचाते थे। दावा किया कि भारत के लोग जब ईराक में फंसे थे तो सुलेमानी ने ही उन्हें वहां से निकालने में मदद की थी। नदीम असगर ने कहा कि अमेरिका और इजराइल को इंसानियत की हिफाजत करने वाले पसंद नहीं आते। ये दोनों अंदर ही अंदर अलकायदा और आईएसआईएस जेसे आतंकी संगठनों को सपोर्ट करते हैं।

उन्होंने सवाल उठाए कि मानव अधिकारों और यूएन की बात करने वाले अमेरिका को अगर उनपर ऐतराज था तो वह यूएनओ में क्यों नहीं गया। सबकुछ दरकिनार करके एक आदमी को कत्ल कर दिया और अब उन्हें दहशतगर्द कहकर बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुलेमानी की शहादत पर चुप रहने वालों को सोचना चाहिये कि अमेरिका ऐसा किसी और देश के साथ भी कर सकता है।


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